शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
दण्डेन रक्ष्यमाणा हि राजन्नहरहः प्रजाः |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
दण्डेन सहिता ह्येषा लोकरक्षणकारिका |
७७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
दण्डेनोपनतं शत्रुं यो राजा न निय़च्छति |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
दण्डैः कनकचित्रैश्च विप्रविद्धान्परश्वधान् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
दण्डो दत्तः समानात्मा दण्डो हीदं सनातनम् |
४७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
श्रीभगवानु उवाच
दण्डो दमय़तामस्मि नीतिरस्मि जिगीषताम् |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
दण्डो यत्राविनीतेषु सत्कारश्च कृतात्मसु |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
दण्डो विधात्रा विहितो धर्मार्थावभिरक्षितुम् ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
दण्डो हि भगवान्विष्णुर्यज्ञो नाराय़णः प्रभुः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
दण्ड्यं दण्डे निक्षिपति तथा न ग्लाति धार्मिकम् ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८९
भीष्म उवाच
दण्ड्यास्ते च महाराज धनादानप्रय़ोजनाः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
राजो उवाच
दण्ड्यो हि त्वं मम मतो नास्त्यत्र खलु संशय़ः ||
१०० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५९
द्युमत्सेन उवाच
दण्डय़ेच्च महादण्डैरपि वन्धूननन्तरान् ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६२
युधिष्ठिर उवाच
दत्तं किं फलवद्राजन्निह लोके परत्र च |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
दत्तं तत्प्रतिजानीहि सङ्गरप्रतिमोचनम् ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
दत्तं दातारमन्वेति यद्दानं भरतर्षभ ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
दत्तं भुक्तमधीतं च प्राप्तमैश्वर्यमीप्सितम् |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
दत्तं मन्येत यद्दत्त्वा तद्दानं श्रेष्ठमुच्यते |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३७
द्रोण उवाच
दत्तं हुतमधीतं च व्राह्मणास्तर्पिता धनैः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
१११
वैशम्पाय़न उवाच
दत्तः क्रीतः कृत्रिमश्च उपगच्छेत्स्वय़ं च यः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४३
भीष्म उवाच
दत्तः स्वमांसं ददता कपोतेन महात्मना ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४४
व्राह्मण उवाच
दत्तचक्षुरिवाकाशे पश्यामि विमृशामि च |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
दत्तदेय़ा विसृज्यन्तां पूजय़ित्वा चिकित्सकाः ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
दत्तमाहारमिच्छामि त्वय़ा क्षुद्वाधते हि माम् |
३३ क
वन पर्व
अध्याय
२९३
वैशम्पाय़न उवाच
दत्तरक्षाप्रतिसरामन्वालभनशोभिताम् |
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
दत्तवान्गौतमस्येदमङ्गिरा वै महातपाः |
६४ क
वन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
दत्तवेतनभक्तं च दत्ताय़ुधपरिच्छदम् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
११३
पाण्डुरु उवाच
दत्तस्यापि च धर्मेण नाधर्मे रंस्यते मनः ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
दत्ता कृष्णापहरणे कालेनाद्भुतकर्मणा ||
३४ ग
शल्य पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
दत्ता दाय़ा यथाशक्ति मित्राणां च प्रिय़ं कृतम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
२८७
वैशम्पाय़न उवाच
दत्ता प्रीतिमता मह्यं पित्रा वाला पुरा स्वय़म् ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
दत्ता भीम त्वय़ा संवित्कृतं गुरुवचस्तथा ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५४
वासुदेव उवाच
दत्ता यशो विप्रथेत कथं भूय़स्तवेति ह ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
७६
देवय़ान्यु उवाच
दत्तां वहस्व पित्रा मां त्वं हि राजन्वृतो मय़ा |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
२१९
स्कन्द उवाच
दत्ताः प्रजा न ताः शक्या भवतीभिर्निषेवितुम् |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४२
व्राह्मणा ऊचुः
दत्तात्रेय़प्रसादाच्च मय़ा प्राप्तमिदं यशः |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३८
वाय़ुरु उवाच
दत्तात्रेय़प्रसादेन प्राप्तं परमदुर्लभम् ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९१
भीष्म उवाच
दत्तात्रेय़स्य पुत्रोऽभून्निमिर्नाम तपोधनः |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
दत्तानकुशलैरर्थान्मनीषी सञ्जिजीविषुः |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७०
युधिष्ठिर उवाच
दत्तानां फलसम्प्राप्तिं गवां प्रव्रूहि मेऽनघ |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५८
भीष्म उवाच
दत्तानुकीर्तिर्विषमः क्षुद्रो नैकृतिकः शठः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३४७
भीष्म उवाच
दत्ताभ्यनुज्ञः स्वं वेश्म कृतकर्मा विवस्वतः ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२
शल्य उवाच
दत्ताभय़ां च विप्रेन्द्र त्वय़ा देवर्षिसत्तम ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
धृतराष्ट्र उवाच
दत्ते वरे गते विप्रे चिन्तासीन्महती ततः |
४४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८८
भीष्म उवाच
दत्तेन मासं प्रीय़न्ते श्राद्धेन पितरो नृप ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
दत्तेष्वस्त्रेषु दिव्येषु वरुणेन यमेन च ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
दत्तेऽवकाशे पुरुषैर्विस्मय़ोत्फुल्ललोचनैः |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
दत्तैषा भवता मह्यं तां ते प्रतिददाम्यहम् |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
दत्तो भगवता पुत्रः साम्वो नाम तवानघ |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
दत्तोंऽशः पाण्डुपुत्राणां भेदाद्भीतैररिन्दम ||
४० ख