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शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
भीष्म उवाच
सर्वभावेन भक्तः स देवदेवं जनार्दनम् ||
२० ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
सर्वभाष्यविदां मध्ये चोदय़ामास भिक्षुकी ||
१५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
सर्वभूतकरी देवी शुभाशुभनिदर्शना ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
सर्वभूतकृतावासो वासुदेवेति चोच्यते ||
८७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
सर्वभूतक्षय़करे धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
सर्वभूतगुणैर्युक्तं नैवं त्वं ज्ञातुमर्हसि |
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
सर्वभूतदय़ा चैव सत्त्वस्यैते गुणाः स्मृताः ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
महेश्वर उवाच
सर्वभूतदय़ा धर्मो न चैकग्रामवासिता |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७१
भीष्म उवाच
सर्वभूतदय़ां चैव विद्धि मां शरणागतम् ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०३
याज्ञवल्क्य उवाच
सर्वभूतदय़ावन्तः केवलं ज्ञानमास्थिताः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३२
महेश्वर उवाच
सर्वभूतदय़ावन्तस्ते नराः स्वर्गगामिनः ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
सर्वभूतदय़ावन्तस्ते शिष्टाः शिष्टसंमताः ||
८३ ख
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
सर्वभूतदय़ावन्तो अहिंसानिरताः सदा |
८० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३२
महेश्वर उवाच
सर्वभूतदय़ावन्तो विश्वास्याः सर्वजन्तुषु |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४७
नागभार्यो उवाच
सर्वभूतपरित्राणं क्षत्रधर्म इहोच्यते |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३७
अर्जुन उवाच
सर्वभूतप्रधानांस्तान्भैक्षवृत्तीनहं सदा |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
व्यास उवाच
सर्वभूतभवं ज्ञात्वा लिङ्गेऽर्चय़ति यः प्रभुम् |
९० क
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
सर्वभूतभवं देवं व्रह्माणमिव शाश्वतम् ||
४२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
सर्वभूतमय़ं चेशं तमजं जगतः पतिम् |
४२ क
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
सर्वभूतरुतज्ञा त्वं पश्य वुद्ध्या समन्विता |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
सर्वभूतवरौ वीरौ नरनाराय़णावुभौ ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०७
गुरुरु उवाच
सर्वभूतविशिष्टास्ते सर्वज्ञाः सर्वदर्शिनः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३२
महेश्वर उवाच
सर्वभूतसमा दान्तास्ते नराः स्वर्गगामिनः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०७
भीष्म उवाच
सर्वभूतसमुच्छेदः स्रोतसेवोह्यते सदा |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४२
व्रह्मो उवाच
सर्वभूतसुहृन्मैत्रो व्रह्मभूय़ं स गच्छति ||
४६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
सर्वभूतस्थमात्मानं ये पश्यन्ति न ते मृताः ||
४७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४७
व्रह्मो उवाच
सर्वभूतस्थमात्मानं स सर्वगतिरिष्यते ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २८
श्रीभगवानु उवाच
सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय २८
श्रीभगवानु उवाच
सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थितः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
सर्वभूतहितं मैत्रं पुराणं यं जना विदुः ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३८
व्रह्मो उवाच
सर्वभूतहितं लोके सतां धर्ममनिन्दितम् ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २३
भीष्म उवाच
सर्वभूतहिता मैत्रास्तेभ्यो दत्तं महाफलम् ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
सर्वभूतहिता ये च श्राद्धेष्वेतान्निमन्त्रय़ेत् |
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५२
भीष्म उवाच
सर्वभूतहिताश्चैव सर्वदेय़ाश्च भारत |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय १०९
मृग उवाच
सर्वभूतहिते काले सर्वभूतेप्सिते तथा |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४७
शौनक उवाच
सर्वभूतहिते तिष्ठ धर्मं चैव प्रतिस्मर ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३५१
सूर्य उवाच
सर्वभूतहिते युक्त एष विप्रो भुजङ्गम ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१३
भीष्म उवाच
सर्वभूतहिते युक्तो न स्मय़ाद्द्वेष्टि वै जनम् |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
सर्वभूतहितो मैत्रः सर्वेन्द्रिय़यतो मुनिः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
सर्वभूतात्मभूतः स्यात्स गच्छेत्परमां गतिम् ||
४५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३०
महेश्वर उवाच
सर्वभूतात्मभूतश्च स वै धर्मेण युज्यते ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०९
गुरुरु उवाच
सर्वभूतात्मभूतस्थं तदध्यात्मगुणं विदुः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०३
गुरुरु उवाच
सर्वभूतात्मभूतस्थं तस्माद्वुध्येत वुद्धिमान् ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७५
भीष्म उवाच
सर्वभूतात्मभूतस्थो दुर्विज्ञेय़ोऽकृतात्मभिः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४०
व्यास उवाच
सर्वभूतात्मभूतस्य गुणमार्गेष्वसज्जतः ||
१७ ख
सभा पर्व
अध्याय १७
कृष्ण उवाच
सर्वभूतात्मभूतस्य वाय़ोरिव शरीरिणः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
सर्वभूतात्मभूतस्य सम्यग्भूतानि पश्यतः |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३१
व्यास उवाच
सर्वभूतात्मभूतस्य सर्वभूतहितस्य च |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६१
कपिल उवाच
सर्वभूतात्मभूतस्य सर्वभूतानि पश्यतः |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११४
वृहस्पतिरु उवाच
सर्वभूतात्मभूतस्य सर्वभूतानि पश्यतः |
७ क