chevron_left  धनञ्जय़स्यarrow_drop_down
सभा पर्व
अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़स्य वक्ष्यामि विजय़ं पूर्वमेव ते |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़स्य वार्ष्णेय़ मम भीमस्य चोभय़ोः ||
६२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़स्य सङ्ग्रामे प्रत्यपश्याम भैरवम् ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़स्याधिरथेश्च मार्गे; गजैरगम्या वसुधातिदुर्गा ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़स्याधिरथेश्च विस्मिताः; प्रशंसमानाः प्रय़युस्तदा जनाः ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५४
भीम उवाच
धनञ्जय़स्याशनितुल्यवेगै; र्ग्रस्ता शरैर्वर्हिसुवर्णवाजैः ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७५
भगवानु उवाच
धनञ्जय़स्यैष कामो न हि युद्धं न कामय़े ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़हिते युक्तस्तत्प्रिय़े सततं रतः ||
४४ ख
सभा पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़ानामृषभः सुसामा सामगोऽभवत् ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ार्थं समरे पराक्रान्तस्य दारुक ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११५
धृतराष्ट्र उवाच
धनञ्जय़ार्थे यत्तस्य कुशलो ह्यसि सञ्जय़ ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़े कथं नाथे पाण्डवे च वृकोदरे |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय २६
युधिष्ठिर उवाच
धनञ्जय़े नकुले चैव सूत; तथा वीरे सहदेवे मदीय़े ||
२५ ख
सभा पर्व
अध्याय ४४
शकुनिरु उवाच
धनञ्जय़ेन गाण्डीवमक्षय़्यौ च महेषुधी |
५ क
वन पर्व
अध्याय ९०
लोमश उवाच
धनञ्जय़ेन चाप्युक्तं यत्तच्छृणु युधिष्ठिर |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
द्रोण उवाच
धनञ्जय़ेन चोत्सृष्टो वर्तते प्रमुखे मम |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़ेन निहतो नैष नुन्नः शिखण्डिना ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ेन युध्यस्व श्रेय़श्चेत्प्राप्तुमिच्छसि ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़ेन विक्रम्य किमनेन तदा कृतम् ||
३७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़ेन विक्रम्य गमिते यमसादनम् ||
४१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ेन विक्रम्य गमितो यमसादनम् ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ेन विक्रम्य गमितो यमसादनम् ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ो महाराज कुरूणामन्तकोऽभवत् ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़ो महावाहुर्नातितीव्रेण कर्मणा ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
दुर्योधन उवाच
धनञ्जय़ो मय़ा शक्य आचार्य प्रतिवाधितुम् ||
२७ ख
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़ो यज्ञसेनं महात्मानं महारथः ||
४१ ख
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ो रथानीकमभ्यवर्तत वीर्यवान् |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ो रथानीकमवधीत्तव भारत |
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ो रथेनाजावभ्यवर्तत वीर्यवान् |
६४ क
वन पर्व
अध्याय १६१
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़ो वज्रधरप्रभावः; श्रिय़ा ज्वलन्पर्वतमाजगाम ||
१९ ख
विराट पर्व
अध्याय २०
भीमसेन उवाच
धनञ्जय़ो वा सुश्रोणि यमौ वा तनुमध्यमे |
६ क
सभा पर्व
अध्याय ४४
शकुनिरु उवाच
धनञ्जय़ो वासुदेवो भीमसेनो युधिष्ठिरः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३४
सञ्जय़ उवाच
धनञ्जय़ो हि नस्तात गर्हय़ेदेत्य संय़ुगात् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़ोत्सुकास्ते तु वने तस्मिन्महारथाः |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़ोऽपि तां दृष्ट्वा धनुर्विससृजे प्रभुः ||
२३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १७१
युधिष्ठिर उवाच
धनतृष्णाभिभूतश्च किं कुर्वन्सुखमाप्नुय़ात् ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
धनत्यागाभिरामाश्च वाक्संय़मरताश्च ये ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १९
वदान्य उवाच
धनदं समतिक्रम्य हिमवन्तं तथैव च |
१६ क
स्त्री पर्व
अध्याय ४
विदुर उवाच
धनदर्पेण दृप्तश्च दरिद्रान्परिकुत्सय़न् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय १५०
वैशम्पाय़न उवाच
धनदस्यालय़ाच्चापि विसृष्टानां महावल |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
धनदा सुप्रसादा च भवदा च जलेश्वरी |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
भगीरथ उवाच
धनधान्यसमृद्धांश्च ग्रामाञ्शतसहस्रशः ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १६
व्राह्मण उवाच
धननाशश्च सम्प्राप्तो लव्ध्वा दुःखेन तद्धनम् ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७१
भीष्म उवाच
धननाशोऽधिकं दुःखं मन्ये सर्वमहत्तरम् |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७१
भीष्म उवाच
धनमस्येति पुरुषं पुरा निघ्नन्ति दस्यवः |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
युधिष्ठिर उवाच
धनमाहुः परं धर्मं धने सर्वं प्रतिष्ठितम् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
धनमित्येव पापानां सर्वेषामिह निश्चय़ः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय २०४
नारद उवाच
धनरत्नमदाभ्यां च सुरापानमदेन च ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३३
महेश्वर उवाच
धनरिक्ते कुले जन्म लभन्ते स्वल्पवुद्धय़ः ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३७
विदुर उवाच
धनलाभस्तृतीय़ं तु वलमाहुर्जिगीषवः ||
४९ ख