अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
धुन्धुमारो दिलीपश्च सगरश्च प्रतापवान् ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
धुन्धुर्दैत्यो महावीर्यो मधुकैटभय़ोः सुतः ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
धुन्धुर्नाम महातेजास्तय़ोः पुत्रो महाद्युतिः |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
धुन्वानाः कार्मुकाण्याजौ विक्षिपन्तश्च साय़कान् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१८४
सरस्वत्यु उवाच
धुरन्धरं वलवन्तं युवानं; प्राप्नोति लोकान्दश धेनुदस्य ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३०
भीष्म उवाच
धुरमुद्यम्य वहतस्तथा वर्तेत वै नृपः |
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
धुरि ये नावसीदन्ति विषमे सद्गवा इव |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
धुर्यं धुर्यतरान्सूतान्रथांश्च परिसङ्क्षिपन् |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
धुर्यप्रदानेन गवां तथाश्वै; र्लोकानवाप्नोति नरो वसूनाम् |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
धुर्ययोर्हय़योरेकस्तथान्यौ पार्ष्णिसारथी |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
धुर्यान्धुर्यतरान्सूतान्ध्वजांश्चापानि साय़कान् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
धुर्यान्प्रमुच्य तु रथाद्धतसूतान्स्वलङ्कृतान् |
८६ क
वन पर्व
अध्याय
९७
लोमश उवाच
धुर्यासनमथासाद्य निषसाद महामुनिः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६६
भीष्म उवाच
धूतपापः स तेजस्वी लघ्वाहारो जितेन्द्रिय़ः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
८५
वैशम्पाय़न उवाच
धूतपाप्मभिराकीर्णा पुण्यं तस्याश्च दर्शनम् ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८
शल्य उवाच
धूतपाप्मा जितस्वर्गः स प्रेत्येह च मोदते ||
१९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
धूतपाप्मा जितस्वर्गो मुमुदे भ्रातृभिः सह ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
धूतपाप्मा जितस्वर्गो व्रह्मभूय़ं स गच्छति ||
२८ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
धूतपाप्मा जितस्वर्गो व्रह्मभूय़ाय़ गच्छति ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२७
व्यास उवाच
धूतपाप्मा तु मेधावी लघ्वाहारो जितेन्द्रिय़ः |
८ क
वन पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
धूतपाप्मा सहास्माभिर्लोमशेन च पालितः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
धूनय़ामास वेगेन वाय़ुश्चण्ड इव द्रुमम् ||
५९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
धूपदीपोदकविधिं न यथावच्चकार ह |
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०२
युधिष्ठिर उवाच
धूपप्रदानस्य फलं प्रदीपस्य तथैव च |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
धूपप्रदानैर्दीपैश्च नमस्कारैस्तथैव च ||
४ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
धूपांश्च विविधान्साधूनसाधूंश्च निवोध मे ||
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
धूपेष्वपि परिज्ञेय़ास्त एव प्रीतिवर्धनाः ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
धूपैरञ्जनय़ोगैश्च नस्यकर्मभिरेव च |
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०१
नारद उवाच
धूमं प्रमुमुचे विन्ध्यस्तदद्भुतमिवाभवत् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२९
धृतराष्ट्र उवाच
धूमकेतुरिव क्रुद्धः कथं मृत्युमुपेय़िवान् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३९
धृतराष्ट्र उवाच
धूमकेतुरिव क्रुद्धः स कथं मृत्युमीय़िवान् ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
धूमकेतुर्महाघोरः पुष्यमाक्रम्य तिष्ठति ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
धूमत्यामतिकृष्णां च सूचीं छावीं च कौरव |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
धूमावतीं ततो गच्छेत्त्रिरत्रोपोषितो नरः |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
धूमाशनैरूष्मपैः क्षीरपैश्च; विभूषितं व्राह्मणेन्द्रैः समन्तात् ||
३८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
धूमाय़न्ते ध्वजा राज्ञां कम्पमाना मुहुर्मुहुः |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
धूमाय़न्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च |
५८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६२
विदुर उवाच
धूमाय़न्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
धूमाय़माना दृश्यन्ते सहसा मारुतेरिताः ||
१३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२५
श्रीभगवानु उवाच
धूमेनाव्रिय़ते वह्निर्यथादर्शो मलेन च |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३०
श्रीभगवानु उवाच
धूमो रात्रिस्तथा कृष्णः षण्मासा दक्षिणाय़नम् |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३२
भीष्म उवाच
धूमो वाय़ोरिव वशं वलं धर्मोऽनुवर्तते ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
धूम्रं रूपं च यत्तस्य धूर्जटिस्तेन उच्यते |
८८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४६
वासुदेव उवाच
धूम्रं रूपं च यत्तस्य धूर्जटीत्यत उच्यते |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
धूम्रः श्वेतः कलिङ्गश्च सिद्धार्थो वरदस्तथा ||
५९ ख
वन पर्व
अध्याय
२७०
मार्कण्डेय़ उवाच
धूम्राक्षं च महेष्वासं ससैन्यं वानरर्षभैः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
२७०
मार्कण्डेय़ उवाच
धूम्राक्षः कपिसैन्यं तद्द्रावय़ामास पत्रिभिः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२७०
मार्कण्डेय़ उवाच
धूम्राक्षमवधीद्धीमान्हनूमान्मारुतात्मजः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
धूम्रारुणं रजस्तीव्रं रणभूमिं समावृणोत् |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
धूम्राय़ाश्च धरः पुत्रो व्रह्मविद्यो ध्रुवस्तथा |
१८ क