chevron_left  धूरर्जुनेनarrow_drop_down
उद्योग पर्व
अध्याय ७५
भगवानु उवाच
धूरर्जुनेन धार्या स्याद्वोढव्य इतरो जनः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५७
भीष्म उवाच
धूर्तैः प्रवर्तितं ह्येतन्नैतद्वेदेषु कल्पितम् ||
९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
धूर्धरेण त्वय़ा भारस्तुलय़ा न समं धृतः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४
व्यास उवाच
धृतदण्डस्य दुर्भुद्धेर्भगवन्क्षन्तुमर्हसि ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्र इति ख्यातः कृष्णद्वैपाय़नादपि |
७८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४१
विदुर उवाच
धृतराष्ट्र कुमारो वै यः पुराणः सनातनः |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
इन्द्र उवाच
धृतराष्ट्र प्रहितो गच्छ मरुत्तं; संवर्तेन सहितं तं वदस्व |
२ क
वन पर्व
अध्याय ९
व्यास उवाच
धृतराष्ट्र महाप्राज्ञ निवोध वचनं मम |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्र महावाहो कच्चित्ते वर्धते तपः |
२ क
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्र महावाहो यत्त्वां वक्ष्यामि तच्छृणु |
१२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्र महावाहो शृणु कौरवनन्दन |
६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं च सम्प्रेक्ष्य सदा भवति दुर्मनाः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय २२८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं ततः सर्वे ददृशुर्जनमेजय़ |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं ततश्चैव विदुरं चान्वभाषत |
१३ क
स्त्री पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं तु शोचामि कृपणं हतवान्धवम् ||
८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य गङ्गामभिमुखोऽगमत् ||
४४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य गान्धारीं च पतिव्रताम् |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य गान्धारीं च यशस्विनीम् |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८९
युधिष्ठिर उवाच
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य ते तं प्रत्युद्ययुस्तदा ||
२२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य पृथिवीं पर्यपालय़न् ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य भीष्मद्रोणादय़स्ततः |
३४ क
सभा पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य विविशुस्तां सभां ततः ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य विविशुस्तां सभां शुभाम् ||
७ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य विवेश गजसाह्वय़म् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य स्वपुरं प्रविवेश ह ||
३० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं प्रति नृपं देवर्षे लोकपूजित ||
३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
युधिष्ठिर उवाच
धृतराष्ट्रं महात्मानमास्थितं परमं तपः ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय ७२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं महाराज तदा चिन्ता समाविशत् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं महाराज सभाय़ां कुरुसंसदि ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय ९०
युधिष्ठिर उवाच
धृतराष्ट्रं महाराजमभिगच्छन्तु चैव ते |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं महाराजमाभाष्येदं वचोऽव्रवीत् ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय १०७
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं महावाहुं वैश्या पर्यचरत्किल ||
३५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं महावाहुमव्रवीत्कुरुसंसदि ||
१७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं महीपालमास्यतामित्यभाषत ||
२४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं महीपालमुपतस्थे यथाविधि ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं यथापूर्वं गान्धारीं विदुरं तथा |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
धृतराष्ट्रं विमुञ्चेच्छां न कथञ्चिन्न जीव्यते ||
६८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं सभार्यं वै पृथां पृथुललोचनाम् ||
२२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रं समुद्दिश्य ददौ स पृथिवीपतिः |
१७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
जनमेजय़ उवाच
धृतराष्ट्रः किमकरोद्राजा चैव युधिष्ठिरः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रः प्रथमजः पाण्डुर्वाह्लीक एव च ||
४९ ख
आदि पर्व
अध्याय १९८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रः सपुत्रस्त्वां सहामात्यः सवान्धवः ||
१५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रः समासाद्य व्यासं चापि तपस्विनम् ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८६
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रः सहामात्यो व्यथितो विमनाभवत् ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय १३३
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रः सुदुर्वुद्धिर्न च धर्मं प्रपश्यति ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३९
कर्ण उवाच
धृतराष्ट्रकुले कृष्ण दुर्योधनसमाश्रय़ात् |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ५२
सूत उवाच
धृतराष्ट्रकुले जाताञ्शृणु नागान्यथातथम् |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय १३१
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रप्रय़ुक्तास्तु केचित्कुशलमन्त्रिणः |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमथामन्त्र्य काले वचनमव्रवीत् ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमनुज्ञाप्य जातुषं गृहमादिशत् ||
१६ ख