chevron_left  धृष्टद्युम्नंarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं ततो विद्ध्वा विराटं च त्रिभिः शरैः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं ततोऽविध्यन्नवभिर्निशितैः शरैः |
१२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं तथा षष्ट्या विराटं दशभिः शरैः ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं तदाय़ान्तं द्रोणस्यान्तचिकीर्षय़ा |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
धृष्टद्युम्नं तु पाञ्चाल्यमानीय़ स्वं विवेशनम् |
५१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं तु विरथं हताश्वं छिन्नकार्मुकम् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं तु संसक्तं द्रौणिना दृश्य भारत |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं तु समरे संनिवार्य महावलः |
३१ क
सभा पर्व
अध्याय ७१
विदुर उवाच
धृष्टद्युम्नं द्रौपदीं च वेदीमध्यात्सुमध्यमाम् ||
३९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं निर्विभेदाथ षड्भि; र्जघान चाश्वं दक्षिणं तस्य सङ्ख्ये |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं पराक्रान्तं सात्यकिः प्रत्यपद्यत ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं परिष्वज्य समेय़ादथ सात्यकिम् ||
११० ख
आदि पर्व
अध्याय १८४
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नं पर्यपृच्छन्महात्मा; क्व सा गता केन नीता च कृष्णा ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं पुरस्कृत्य नचिरात्प्रत्यदृश्यत ||
४८ ख
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं महानीकं तत्र नोऽभूद्रणो महान् |
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं महाराज भीष्मान्तिकमुपागतम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नं महेष्वासं पार्थानां मन्त्रधारिणम् |
५७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं युधामन्युं माद्रीपुत्रौ वृकोदरम् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं रणे कर्णो विव्याध दशभिः शरैः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं रणे द्रौणिर्नाशय़िष्यत्यसंशय़म् ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं रणे यान्तं भीष्मस्य वधकाङ्क्षिणम् |
३८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं शरव्रातैः समन्तात्पर्यवारय़त् ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं समासाद्य त्रिधा सैन्यमभिद्यत ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं समासाद्य वाह्वोरुरसि चार्दय़त् ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं समासाद्य स गतः परमां गतिम् ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं समीपस्थं त्वरमाणो विशां पते |
२३ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नं सात्यकिं च धृष्टद्युम्नस्य चात्मजान् |
२४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नं हतं श्रुत्वा द्रौपदेय़ा विशां पते |
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
धृष्टद्युम्नः कुमारोऽय़ं द्रुपदस्य भवत्विति ||
४९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः कृपं चाथ तस्मिन्वीरवरक्षय़े |
९ क
सभा पर्व
अध्याय ४९
दुर्योधन उवाच
धृष्टद्युम्नः पाण्डवाश्च सात्यकिः केशवोऽष्टमः ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः प्रहस्यान्यत्पुनरादाय़ कार्मुकम् |
१२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शतानीको विराटश्च सकेकय़ः |
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च कृतवैरौ मय़ा सह |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
कृप उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च दौर्मुखिर्जनमेजय़ः ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च द्रौपदेय़ाः प्रभद्रकाः |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च द्रौपदेय़ाः प्रभद्रकाः ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च द्रौपदेय़ाश्च सर्वशः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च द्रौपद्याः पञ्च चात्मजाः ||
६३ ख
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च पाञ्चालाः सह सोमकैः |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च पाञ्चालाश्च प्रभद्रकाः |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च पाण्डुपाञ्चालसृञ्जय़ाः |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च युधामन्यूत्तमौजसौ |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च विराटो द्रुपदस्तथा |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय ६
शल्य उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च सर्वे चापि प्रभद्रकाः ||
१३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च सात्यकिश्च महारथः |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च सात्यकिश्च महारथः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः सदैवैतान्सन्दीपय़ति भारत |
४७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
धृष्टद्युम्नः सपुत्रश्च विराटः केकय़ैः सह |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
धृष्टद्युम्नः सात्यकिश्च द्रौपदेय़ा वृकोदरः |
४२ क