chevron_left  धृतराष्ट्रमभिप्रेक्ष्यarrow_drop_down
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमभिप्रेक्ष्य समभाषत माधवः ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमभिप्रेक्ष्य सुहृदां शृण्वतां मिथः ||
२३ ख
सभा पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमिदं वाक्यमपदान्तरमव्रवीत् ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमुखांश्चापि सर्वान्ससुहृदस्तथा ||
४६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमुखाः सर्वे यय़ू राजसभां शुभाम् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १९२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमुपागम्य वचोऽव्रूतामिदं तदा ||
२५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमुपातिष्ठद्विदुरः सञ्जय़स्तथा |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमुपासीनं युय़ुत्सुं चापराजितम् ||
२६ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमुपेत्येदं वाक्यमाह महार्थवत् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रमुवाचेदं राजमध्येऽभिपूजय़न् ||
४२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२४
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रवचः श्रुत्वा भीष्मद्रोणौ समर्थ्य तौ |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रश्च कृष्णश्च भीमार्जुनय़मास्तथा ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रश्च कौरव्यो राजानश्च वय़ोऽधिकाः ||
४६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रश्च तद्वाक्यमभिपूज्य पुनः पुनः |
२५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रश्च तान्वीरान्विनीतान्विनय़े स्थितान् |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५४
दुर्योधन उवाच
धृतराष्ट्रश्च धर्मज्ञो न वध्यः कुरुसत्तमः ||
९ ख
विराट पर्व
अध्याय २
युधिष्ठिर उवाच
धृतराष्ट्रश्च नागानां हस्तिष्वैरावतो वरः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय १९८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रश्च पाञ्चाल्य त्वय़ा सम्वन्धमीय़िवान् |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय १०२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रश्च पाण्डुश्च विदुरश्च महामतिः |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रश्च पाण्डुश्च सुतावेकस्य विश्रुतौ |
४ क
सभा पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रश्च भीष्मश्च विदुरश्च महामतिः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रश्च राजर्षिः सर्वाः प्रकृतय़स्तथा ||
१५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रश्च सामात्यः प्रय़यौ सह पाण्डवैः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
धृतराष्ट्रश्चिरं ध्यात्वा सञ्जय़ं वाक्यमव्रवीत् ||
९५ ग
उद्योग पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रसुतश्चापि समानिन्ये महीपतीन् ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
धृतराष्ट्रसुताः सर्वे हता भीमेन मानद |
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्ततो भीष्ममनुमान्य प्रसाद्य च |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १
जनमेजय़ उवाच
धृतराष्ट्रस्तदा राजा शोकव्याकुलचेतनः |
२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्तु तान्सर्वान्पश्यन्दिव्येन चक्षुषा |
२१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्तु तेनाह्ना गत्वा सुमहदन्तरम् |
१६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्तु धर्मात्मा पाण्डवैः सहितस्तदा |
२ क
आदि पर्व
अध्याय १३०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्तु पुत्रस्य श्रुत्वा वचनमीदृशम् |
१ क
स्त्री पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्तु राजर्षिर्निगृह्यावुद्धिजं तमः |
७ क
सभा पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्तु संहृष्टः पर्यपृच्छत्पुनः पुनः |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय १०२
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्त्वचक्षुष्ट्वाद्राज्यं न प्रत्यपद्यत |
२३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य च तदा दिव्यं चक्षुर्नराधिप |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय १००
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य च भ्राता पाण्डोश्चामितवुद्धिमान् ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय १३१
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य तं काममनुवुद्ध्वा युधिष्ठिरः |
११ क
वन पर्व
अध्याय २२६
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य तद्वाक्यं निशम्य सहसौवलः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
धृतराष्ट्रस्य दाय़ादा इति वीभत्सुरव्रवीत् |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय ११७
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य दाय़ादा दुर्योधनपुरोगमाः |
१५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य दुर्वुद्धेर्यद्वृत्तं द्यूतकारितम् ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
धृतराष्ट्रस्य दौरात्म्यात्सपुत्रस्य सदा वय़म् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य नृपतेः सौवलेन निवेदितः ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
धृतराष्ट्रस्य पाण्डोश्च पाण्डवानां च सम्भवः ||
८२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य पुत्राणां यस्तु ज्येष्ठः शतस्य वै |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४४
कर्ण उवाच
धृतराष्ट्रस्य पुत्राणामर्थे योत्स्यामि ते सुतैः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय १०८
जनमेजय़ उवाच
धृतराष्ट्रस्य पुत्राणामानुपूर्व्येण कीर्तय़ ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य पुत्रेण निकृत्या प्रत्यपत्स्महि ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय ८४
वैशम्पाय़न उवाच
धृतराष्ट्रस्य पुत्रेण वृता युधि महावलाः |
७ ख