कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
धनुश्चिच्छेद सङ्क्रुद्धो विव्याध च शितैः शरैः ||
६४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
धनुश्चिच्छेद समरे कौरव्यस्य महात्मनः ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
धनुश्चिच्छेद समरे क्षुरप्रेण शितेन ह ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
धनुश्चिच्छेद समरे प्रहसन्निव भारत ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
धनुश्चिच्छेद समरे माधवस्य महात्मनः ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
धनुश्चिच्छेद समरे सज्यं स सुमहारथः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
धनुश्चिच्छेद सहसा क्षुरप्रेण हसन्निव |
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
धनुश्चित्रं सुमहद्भारसाहं; व्यवस्थितो योत्स्यमानः प्रगृह्य ||
९३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
धनुश्चैकेन वाणेन चिच्छेदेन्द्रध्वजोपमम् |
४० क
कर्ण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
धनुश्चैतत्केशवाय़ प्रदाय़; यन्ताभविष्यस्त्वं रणे चेद्दुरात्मन् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४३
सञ्जय़ उवाच
धनुश्चैव महाराज यतमानस्य संय़ुगे ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
धनुश्च्युतानां विय़ति ददृशे वहुधा व्रजः ||
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
धनुश्च्युतै रुक्मपुङ्खैः शरैः संनतपर्वभिः |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
धनुश्छित्त्वार्धचन्द्रेण व्यधमत्तिलशो रथम् ||
३३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
धनुषः पततस्तस्य सव्यसाचिकराद्विभो |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
धनुषश्च शराणां च तदपश्याम केवलम् ||
२० ख
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
धनुषश्चाविधेय़त्वाच्छराणां सङ्क्षय़ेण च ||
६३ ख
विराट पर्व
अध्याय
४१
उत्तर उवाच
धनुषश्चैव निर्घोषः श्रुतपूर्वो न मे क्वचित् ||
१४ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
धनुषा कर्म कुर्वंस्तु रश्मीन्स पुनरुत्सृजत् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३३
सञ्जय़ उवाच
धनुषा फल्गुनः शूरः कर्णः शूरो मनोरथैः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
धनुषा रथवाहैश्च नीलैर्नीलोऽभ्यवर्तत ||
५५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
धनुषा वाणमुत्सृज्य सघोषं विननाद च ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
धनुषा वाणमुत्सृज्य सघोषं विननाद च ||
११ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
धनुषां कूजतां तत्र तलानां चाभिहन्यताम् |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
धनुषां कूजतां शव्दः सर्वतस्तुमुलोऽभवत् |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
धनुषां कूजमानानां निस्त्रिंशानां च दीप्यताम् |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
धनुषां चैव निर्घोषो दारुणः समपद्यत ||
३८ ख
वन पर्व
अध्याय
१३६
भरद्वाज उवाच
धनुषाक्षस्तु तं दृष्ट्वा मेधाविनमनामय़म् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
भीष्म उवाच
धनुषाक्षोऽथ रैभ्यश्च अर्वावसुपरावसू |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
धनुषो यस्य कर्माणि दिव्यानि प्राह भार्गवः |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
धनुषोऽग्रेण तं कर्णस्त्वभिद्रुत्य परामृशत् |
६८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
धनुष्काशां शरावापां गदापरिघकेतनाम् |
४१ क
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
धनुष्कोट्या तदा दस्यूनवधीत्पाकशासनिः ||
६० ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
धनुष्कोट्या तुद्य कर्णेन वीरं; तदा नाशंसे विजय़ाय़ सञ्जय़ ||
१३९ ख
आदि पर्व
अध्याय
३६
सूत उवाच
धनुष्कोट्या समुत्क्षिप्य स चैनं समुदैक्षत |
१९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
धनुष्पाणिः शरैरन्यान्प्रेषय़द्वै यमक्षय़म् ||
७७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७६
भीष्म उवाच
धनुष्पाणिरदीनात्मा खड्गं विभ्रत्परश्वधी |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
धनुष्मतां वरं शूरं सत्यसन्धं महावलम् |
५५ क
वन पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
धनुष्मान्कवची खड्गी मुनिः सारसमन्वितः |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
धनुष्मान्कवची खड्गी रथमारुह्य दंशितः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
धनुष्यथ गदाय़ुद्धे त्सरुप्रहरणेषु च |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
सञ्जय़ उवाच
धनुष्यनवरः शूरः कार्तवीर्यसमो युधि |
८ क
विराट पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
धनुष्यनवरश्चासीत्तस्य शिष्यो महात्मनः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
धनुष्यस्त्रे च वीर्ये च प्राणे चैव तथोरसि |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
धनुस्त्यक्त्वा शरांश्चैव पितुरेव समीपतः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
धनूंषि कवचादीनि हृद्यभूवन्नृणां तदा ||
८१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१२
वैशम्पाय़न उवाच
धनूंषि च महार्हाणि कवचानि वृहन्ति च ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
धनूंषि च महार्हाणि वाणांश्च रुचिरान्वहून् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१८६
वैशम्पाय़न उवाच
धनूंषि चाग्र्याणि शराश्च मुख्याः; शक्त्यृष्टय़ः काञ्चनभूषिताश्च ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
धनूंषि चित्राणि निरीक्ष्य शल्य; ध्वजं गदां साय़कांश्चोग्ररूपान् |
५७ क