द्रोण पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
अनागतानेव तु तान्पृषत्कां; श्चिच्छेद वाणैः शिनिपुङ्गवोऽपि ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
अनागतानेव तु तान्पृषत्कां; श्चिच्छेद वाणैः शिनिपुङ्गवोऽपि ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
अनागतान्यतीतानि कस्य ते कस्य वा वय़म् ||
८४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
अनागतान्येव शरैश्चिच्छेदाशुपराक्रमः ||
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
श्वशुर उवाच
अनागताश्च वहवः सुवहूनि युगानि च ||
६१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
अनागताय़ां सन्ध्याय़ां पश्चिमाय़ां गृहे वसेत् ||
१३६ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
सत्यवानु उवाच
अनागताय़ां सन्ध्याय़ां माता मे प्ररुणद्धि माम् ||
८१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९९
मनुरु उवाच
अनागतिं सुकृतिमतां परां गतिं; स्वय़म्भुवं प्रभवनिधानमव्ययम् |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
अनागतेन दुष्प्रज्ञं प्रत्युत्पन्नेन पण्डितम् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
१०५
लोमश उवाच
अनागमाय़ गच्छध्वं भूय़ो मार्गत वाजिनम् |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
२०
जरासन्ध उवाच
अनागसं प्रजानानाः प्रमादादिव जल्पथ ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
७४
वृहदश्व उवाच
अनागसं प्रिय़ां भार्यां विजने श्रममोहिताम् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
अनागसं सदा द्वेषादेवमेव पदे पदे |
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२९१
वैशम्पाय़न उवाच
अनागसः पितुः शापो व्राह्मणस्य तथैव च |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१३६
पौरा ऊचुः
अनागसः सुविश्वस्तान्यो ददाह नरोत्तमान् ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
४६
मन्त्रिण ऊचुः
अनागसि गुरौ यो मे मृतं सर्पमवासृजत् |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१३९
लोमश उवाच
अनागस्त्वं तथा भ्रातुः पितुश्चास्मरणं वधे |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
६३
वृहदश्व उवाच
अनागा येन निकृतस्त्वमनर्हो जनाधिप |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१३८
लोमश उवाच
अनागाः सर्वभूतेषु कर्कशत्वमुपेय़िवान् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
भीष्म उवाच
अनाचरन्तस्तद्धर्मं सङ्करे निरताः प्रभो ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२५
शल्य उवाच
अनाचरितमार्याणां वृत्तमेतच्चतुर्विधम् ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय
४१
शिशुपाल उवाच
अनाचरितमार्याणां वृत्तमेतच्चतुर्विधम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
अनाचारस्त्वधर्मेति एतच्छिष्टानुशासनम् ||
७२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४२
सनत्सुजात उवाच
अनाढ्या मानुषे वित्ते आढ्या वेदेषु ये द्विजाः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०५
भीष्म उवाच
अनाढ्याश्चापि जीवन्ति राज्यं चाप्यनुशासते |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
अनातुरत्वाद्भद्रं ते मृतकल्पा हि रोगिणः ||
६५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२८
श्रीभगवानु उवाच
अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
अनात्मा ह्यात्मनो मृत्युः क्लेशो मृत्युर्जरामय़ः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
अनात्मेति च यद्दृष्टं तेनाहं न ममेत्यपि |
१५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
अनाथवत्कथं दग्धा इति मुह्यामि चिन्तय़न् ||
१० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
अनाथस्येव निधनं तिष्ठत्स्वस्मासु वन्धुषु ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४७
वैशम्पाय़न उवाच
अनाथा कृपणा वाला यत्रक्वचनगामिनी |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
अनाथा नाथमिच्छन्तो मृगाः सिंहार्दिता इव ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
अनाथा विनशिष्यामि वालकैः पुत्रकैः सह ||
८० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
अनाथां प्रमदां वालां वृद्धां भीतां तपस्विनीम् |
६४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
अनाथाः पाल्यमाना वै दस्युभिः परिपीडिताः ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३
पितर ऊचुः
अनाथास्तेन नाथेन यथा दुष्कृतिनस्तथा |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
१४६
व्राह्मण्यु उवाच
अनाथे सर्वतो लुप्ते यथा त्वं धर्मदर्शिवान् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
८६
यय़ातिरु उवाच
अनाददानश्च परैरदत्तं; सैषा गृहस्थोपनिषत्पुराणी ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
युधिष्ठिर उवाच
अनादरो विरोधश्च प्रणिपाती हि दुर्वलः ||
७३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९९
मनुरु उवाच
अनादित्वादनन्तत्वात्तदनन्तमथाव्ययम् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९९
मनुरु उवाच
अनादित्वादमध्यत्वादनन्तत्वाच्च सोऽव्ययः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३५
श्रीभगवानु उवाच
अनादित्वान्निर्गुणत्वात्परमात्माय़मव्ययः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
अनादिनिधनं चाहुरक्षरं परमेव च ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
अनादिनिधनं जन्तुमात्मनि स्थितमव्ययम् |
५३ क
वन पर्व
अध्याय
२०२
व्याध उवाच
अनादिनिधनं जन्तुमात्मय़ोनिं सदाव्ययम् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
अनादिनिधनं देवं प्रभुं नाराय़णं परम् ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२४
सञ्जय़ उवाच
अनादिनिधनं देवं लोककर्तारमव्ययम् |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४१
व्यास उवाच
अनादिनिधनं नित्यमासाद्य विचरेन्नरः |
५ क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
अनादिनिधनं भूतं विश्वमक्षय़मव्ययम् ||
१५ ख