chevron_left  नानाशस्त्रप्रहरणाःarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे शस्त्रास्त्रवेदिनः ||
४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १४
ऋषी ऊचतुः
नानाशस्त्रविदः पूर्वे येऽप्यतीता महारथाः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय २८
सूत उवाच
नानाशस्त्रविसर्गैश्च वध्यमानः समन्ततः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
नानाशस्त्रसमावापे व्यतिषक्तरथद्विपे ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३९
सञ्जय़ उवाच
नानाशस्त्रसमावापैरन्योन्यं पर्यपीडय़न् ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
नानाशस्त्रसमावापैर्विविधाय़ुधय़ोधिभिः ||
४८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५२
सञ्जय़ उवाच
नानाशस्त्रैरभिहतान्पादपानिव दन्तिना ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
नानाशस्त्रौघवहुलां शस्त्रवृष्टिं समुत्थिताम् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
नानाशस्त्रौघसम्पन्नैर्नानादेश्यैर्नृपैर्वृतः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८९
भीष्म उवाच
नानाशास्त्रेषु निष्पन्नं योगेष्विदमुदाहृतम् |
५७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९५
मनुरु उवाच
नानाश्रय़ाः कर्मसु वर्तमानाः; श्रोत्रादय़ः पञ्च गुणाञ्श्रय़न्ते ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८९
युधिष्ठिर उवाच
नानाश्रय़ाश्च वहव इतिहासाः पृथग्विधाः ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
नानाश्वमातङ्गरथाय़ुताकुलं; वरासिशक्त्यृष्टिनिपातदुःसहम् |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
नानासंस्थानरूपाणि नानास्तम्भान्वितानि च ||
४५ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ७०
भीष्म उवाच
नानासंस्थानरूपाणि सर्वरत्नमय़ानि च ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
नानासंस्थानवर्णानि नानारूपफलानि च ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७८
राजो उवाच
नानाहिताग्निर्नाय़ज्वा मामकान्तरमाविशः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७८
राजो उवाच
नानाहिताग्निर्विषय़े मामकान्तरमाविशः ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८९
धृतराष्ट्र उवाच
नानाहूतो न ह्यभृतो मम सैन्ये वभूव ह ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय १२५
लोमश उवाच
नानाय़ज्ञचिता राजन्पुण्या पापभय़ापहा ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय १०५
वैशम्पाय़न उवाच
नानाय़ानसमानीतै रत्नैरुच्चावचैस्तथा |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
नानाय़ुधनिकृत्तानां चेष्टतामातुरः स्वनः ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
नानाय़ुधसहस्राणि प्रेषितान्यरिभिर्वृषः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
नानाय़ोधजलं भीमं वाहनोर्मितरङ्गिणम् |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
स्त्र्यु उवाच
नानिलोऽग्निर्न वरुणो न चान्ये त्रिदशा द्विज |
६४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४४
भीष्म उवाच
नानिष्टाय़ प्रदातव्या कन्या इत्यृषिचोदितम् |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
नानिहत्य वलादेनं विजय़स्ते भविष्यति ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय १७०
गन्धर्व उवाच
नानीशैर्हि तदा तात भृगुभिर्भावितात्मभिः |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७१
भगवानु उवाच
नानुक्रोशान्न कार्पण्यान्न च धर्मार्थकारणात् |
९ क
वन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
नानुग्रहभृतः कश्चिन्न चादृष्टपराक्रमः ||
२२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
नानुतप्यामि तच्चाहं क्षत्रधर्मं हि तं विदुः |
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
नानुतिष्ठसि धर्मार्थौ न कामे चापि वर्तसे |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
नानुरुध्ये विरुध्ये वा न द्वेष्मि न च कामय़े |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
नानुरूपमहं मन्ये त्वय़ि जीवति कौरव ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३७
सञ्जय़ उवाच
नानुरूपमहं मन्ये युद्धमस्य त्वय़ा सह |
४६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४५
भीष्म उवाच
नानुशुश्रुम जात्वेतामिमां पूर्वेषु जन्मसु ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०५
मुनिरु उवाच
नानुशोचसि कौसल्य सर्वार्थेषु तथा भव ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
नानुष्ठितं तमेवाजौ विशिखैरभिवर्षता ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय १९०
वामदेव उवाच
नानुय़ोगा व्राह्मणानां भवन्ति; वाचा राजन्मनसा कर्मणा वा |
६६ क
वन पर्व
अध्याय ९०
लोमश उवाच
नानृजुर्नाकृतात्मा च नावैद्यो न च पापकृत् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८३
पराशर उवाच
नानृतं चैव भवति तदा कल्याणमृच्छति ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
नानृतं तच्चिकीर्षामि युष्मान्क्रुद्धो यदव्रुवम् |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
नानृतं न त्रिवर्गेण विरुद्धं नाप्यसंस्कृतम् ||
८८ ख
आदि पर्व
अध्याय ११
डुण्डुभ उवाच
नानृतं वै मय़ा प्रोक्तं भवितेदं कथञ्चन ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय ३८
शमीक उवाच
नानृतं ह्युक्तपूर्वं ते नैतन्मिथ्या भविष्यति ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६८
सञ्जय़ उवाच
नानृतः पाण्डवो ज्येष्ठो नाहं वाधार्मिकोऽर्जुन |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
नानृतमूचतुर्भवन्तौ |
७२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०५
नारद उवाच
नानृतस्याधिपत्यं च कुत एव गतिः शुभा ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय २४७
देवदूत उवाच
नानृता नास्तिकाश्चैव तत्र गच्छन्ति मुद्गल ||
३ ख