अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
यातुधान्यु उवाच
नाम तेऽव्यक्तमुक्तं वै वाक्यं सन्दिग्धय़ा गिरा |
४६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
नाम मे वसुषेणेति कारय़ामास वै द्विजैः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
नाम विश्राव्य तु वकः समभिद्रुत्य पाण्डवम् |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३२
विदुरो उवाच
नाम विश्राव्य वा सङ्ख्ये शत्रूनाहूय़ दंशितान् |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
१९१
वैशम्पाय़न उवाच
नाम सङ्कीर्तय़न्त्यस्ताः पादौ जग्मुः स्वमूर्धभिः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
नारद उवाच
नाम सङ्कीर्तय़ामास तस्मिन्व्रह्मर्षिसत्तमे ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
नाम सङ्कीर्तय़ेत्तस्या यथासङ्ख्योत्तरं स वै |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६८
धृतराष्ट्र उवाच
नामकर्मार्थवित्तात प्राप्नुय़ां पुरुषोत्तमम् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
नामतो धर्मपत्न्यस्ताः कीर्त्यमाना निवोध मे |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७१
भगवानु उवाच
नामधेय़ं च गोत्रं च तदप्येषां न शिष्यते ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०४
वैशम्पाय़न उवाच
नामधेय़ं च चक्राते तस्य वालस्य तावुभौ |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
१०९
जनमेजय़ उवाच
नामधेय़ानि चाप्येषां कथ्यमानानि भागशः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८५
पराशर उवाच
नामधेय़ानि तपसा तानि च ग्रहणं सताम् ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय
४६
दुर्योधन उवाच
नामधेय़ानि रत्नानां पुरस्तान्न श्रुतानि मे |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
नामधेय़ानि लोकेषु वहून्यत्र यथार्थवत् |
७८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४६
वासुदेव उवाच
नामधेय़ानि वेदेषु वहून्यस्य यथार्थतः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
१०८
वैशम्पाय़न उवाच
नामधेय़ानुपूर्व्येण विद्धि जन्मक्रमं नृप |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७५
भृगुरु उवाच
नामधेय़ानुरूपस्य मानसस्य महात्मनः ||
३२ ग
आदि पर्व
अध्याय
३१
शौनक उवाच
नामनी चैव ते प्रोक्ते पक्षिणोर्वैनतेय़योः ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
यातुधान्यु उवाच
नामनैरुक्तमेतत्ते दुःखव्याभाषिताक्षरम् |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
यातुधान्यु उवाच
नामनैरुक्तमेतत्ते दुःखव्याभाषिताक्षरम् |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
यातुधान्यु उवाच
नामनैरुक्तमेतत्ते दुःखव्याभाषिताक्षरम् |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
यातुधान्यु उवाच
नामनैरुक्तमेतत्ते दुःखव्याभाषिताक्षरम् |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
यातुधान्यु उवाच
नामनैरुक्तमेतत्ते दुःखव्याभाषिताक्षरम् |
४२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
यातुधान्यु उवाच
नामनैरुक्तमेतत्ते दुःखव्याभाषिताक्षरम् |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
वैशम्पाय़न उवाच
नामभिः कीर्तितैस्तस्य केशवस्य महात्मनः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
जनमेजय़ उवाच
नामभिर्विविधैरेषां निरुक्तं भगवन्मम ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
नामभिश्चास्तुवं देवं ततस्तुष्टोऽभवद्भवः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
नामभिस्त्वां वहुविधैः स्तुवन्ति परमर्षय़ः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
नामभेदस्तपःकर्मय़ज्ञाख्या लोकसिद्धय़ः |
५७ क
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
नामभ्यां हंसडिभकावित्यास्तां योधसत्तमौ ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३८
विदुर उवाच
नाममात्रेण तुष्येत छत्रेण च महीपतिः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
१३६
भरद्वाज उवाच
नामर्त्यो विद्यते मर्त्यो निमित्ताय़ुर्भविष्यति ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय
४६
दुर्योधन उवाच
नामर्षं कुरुते यस्तु पुरुषः सोऽधमः स्मृतः ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६९
धृतराष्ट्र उवाच
नामर्षं तत्र कुर्वन्ति धिक्क्षत्रं धिगमर्षितम् ||
४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
नामर्षय़त कौन्तेय़ो भीमसेनो महावलः ||
२६ ख
विराट पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
नामर्षय़त पाञ्चाली वीभत्सोः परिकीर्तनम् ||
१० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
नामर्षय़त राजेन्द्र सदैवातुष्टवद्धृदा ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
नामर्षय़त सङ्क्रुद्धः शाल्वः कुरुकुलोद्वह ||
९ ख
सभा पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
नामर्षय़त्ततस्तेषामवहासममर्षणः |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४४
व्रह्मो उवाच
नामलक्षणसंय़ुक्तं सर्वं वक्ष्यामि तत्त्वतः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८२
नारद उवाच
नामहापुरुषः कश्चिन्नानात्मा नासहाय़वान् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
नामात्यसमितौ कथ्यं न च श्रुतवतां श्रुतम् |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
११५
वैशम्पाय़न उवाच
नामानि चक्रिरे तेषां शतशृङ्गनिवासिनः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
नामानि चैव गुह्यानि निरुक्तानि च भारत |
६७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९९
नारद उवाच
नामानि चैषां वक्ष्यामि यथा प्राधान्यतः शृणु |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
नामानि मानवश्रेष्ठ तानि त्वं शृणु सिद्धय़े ||
७३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
नामान्येतानि दण्डस्य कीर्तितानि युधिष्ठिर ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२९३
वैशम्पाय़न उवाच
नामास्य वसुषेणेति ततश्चक्रुर्द्विजातय़ः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
नामास्याः प्रिय़दत्तेति गुह्यं देव्याः सनातनम् |
१२ क