शान्ति पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
नामित्रो विनिकर्तव्यो नातिच्छेद्यः कथञ्चन |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५२
भीष्म उवाच
नामिषेषु प्रसङ्गोऽस्ति न प्रिय़ेष्वप्रिय़ेषु च |
२१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
नामुच्यत तय़ोः कश्चिन्निष्क्रान्तः शिविराद्वहिः |
१०२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
नामुह्यत प्राप्य स राजपुत्रः; किरीटमाली विसृजन्पृषत्कान् ||
८४ ख
विराट पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
नामृतस्य हि पापीय़ान्भार्यामालभ्य जीवति ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२७
युधिष्ठिर उवाच
नामृतस्येव पर्याप्तिर्ममास्ति व्रुवति त्वय़ि |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
नामृतेनामृतं पीतं वत्सपीता न वत्सला ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यत तदा भीष्मः सैन्यघातं रणे परैः ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
नामृष्यत पुरा योऽसौ स्ववाहुवलदर्पितः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यत महातेजाः सोमदत्तः शिनेर्नृप ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
नामृष्यत महावाहुः प्रहारमिव सद्गवः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यत महावाहुर्माधवः परवीरहा ||
५२ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
नामृष्यत महावाहुस्तत्राक्रुध्यद्वृकोदरः ||
९५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यत महेष्वासः क्रोधादुद्वृत्य चक्षुषी ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यत महेष्वासो भगदत्तः प्रतापवान् ||
६५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यत यथा नागस्तलशव्दं समीरितम् ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यत यथा नागस्तलशव्दं समीरितम् ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यत यथा मत्तो गजः प्रतिगजस्वनम् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यत युधां श्रेष्ठो याज्ञसेनिर्महारथः ||
१४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यत रणे राजा शत्रोर्विजय़लक्षणम् ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यत्तं तु शैनेय़ः शत्रोर्विजय़माहवे ||
२४ ग
आदि पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
नामृष्यन्कुरवो दृष्ट्वा पाण्डवाञ्श्रीय़शोभृतः ||
७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यन्त महेष्वासाः क्रोधामर्षवशं गताः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यन्त महेष्वासाः पाण्डवानां महारथाः ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यन्त महेष्वासाः फल्गुनं पुरुषर्षभाः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यन्त महेष्वासाः सोदर्याः पञ्च मारिष ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यन्त रणे शूराः सोदर्याः सप्त संय़ुगे ||
१३ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यन्त सुसंरव्धाः पुनर्द्रोणमुखा रथाः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
नामृष्यन्त सुसंरव्धाः शिखण्डिप्रमुखा रथाः |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४३
सनत्सुजात उवाच
नामैतद्धातुनिर्वृत्तं सत्यमेव सतां परम् |
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
नाम्ना कच इति ख्यातं शिष्यं गृह्णातु मां भवान् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
नाम्ना कुम्भीनसी नाम पतित्राणमभीप्सती ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
नाम्ना ख्यातास्तु तस्येमे पुत्राः पञ्च महात्मनः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
नाम्ना च गुणसंय़ुक्तस्तदा प्रभृति सोऽभवत् ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
नाम्ना च गोत्रेण च कर्मणा च; सङ्कीर्तय़ंस्तान्नृपतीन्समेतान् ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
नाम्ना च द्युतिमान्नाम शाल्वराजः प्रतापवान् |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
नाम्ना चानन्तरुद्रेति उपस्थानं महात्मनः ||
७९ ख
आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
नाम्ना जिनवती नाम रूपय़ौवनशालिनी ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
नाम्ना भद्रवटं नाम त्रिषु लोकेषु विश्रुतम् ||
६९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
नाम्ना संवर्तको नाम कालाग्निर्भरतर्षभ ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
नाम्ना सत्यवती नाम रूपेणाप्रतिमा भुवि ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
नाम्ना सुदर्शना राजन्रूपेण च सुदर्शना ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
नाम्नां कञ्चित्समुद्देशं वक्ष्ये ह्यव्यक्तय़ोनिनः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
नाम्नां सहस्रं दिव्यानामशेषेण प्रकीर्तितम् ||
१२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
भीष्म उवाच
नाम्नां सहस्रं देवस्य तण्डिना व्रह्मय़ोनिना |
३ क
वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
नाम्नामष्टशतं पुण्यं तच्छृणुष्व महामते ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
नाम्नामष्टशतं पुण्यं शक्रेणोक्तं महात्मना ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४५
भीष्म उवाच
नाम्व शन्तनुना जातः कौरवं वंशमुद्वहन् |
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३३
भीष्म उवाच
नारण्येभ्यः स भूतेभ्यो भय़मार्छेत्कदाचन ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
नारण्यैर्नेष्टविषय़ैर्न सुतैर्न धनागमैः |
७५ क