सभा पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
नारदं प्रत्युवाचेदं धर्मराजो महामनाः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३२
भीष्म उवाच
नारदं प्राञ्जलिं दृष्ट्वा पूजय़ानं द्विजर्षभान् |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
नारदं प्रेषय़ामासुः श्वसनं च महावलम् ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय
४९
दुर्योधन उवाच
नारदं वै पुरस्कृत्य देवलं चासितं मुनिम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
नारदं समभिप्रेक्ष्य सर्वं जानन्पुरातनम् ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
नारदं स्वस्थमासीनमुपासीनो युधिष्ठिरः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
नारदं हृच्छय़स्तूर्णं सहसैवान्वपद्यत ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
भीष्म उवाच
नारदः परिपप्रच्छ भूतानां प्रभवाप्ययम् ||
२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
नारदः पर्वतश्चैव देवलश्च महातपाः ||
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
नारदः पर्वतश्चैव देवलश्च महातपाः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
नारदः पर्वतश्चैव प्रागृषी लोकपूजितौ ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
५१
वृहदश्व उवाच
नारदः पर्वतश्चैव महात्मानौ महाव्रतौ |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
नारदः पर्वतश्चैव विश्वावसुर्हहा हुहूः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
नारदः पर्वतश्चैव विश्वावसुर्हहाहुहूः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
नारदः पर्वतश्चैव विश्वावसुहहाहुहू |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
नारदः पर्वतश्चैव सुधन्वाथैकतो द्वितः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
नारदः पवने सर्वं शल्मलेर्वाक्यमव्रवीत् ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
नारदः पुण्डरीकाक्षं सस्मार मनसा हरिम् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३२
वैशम्पाय़न उवाच
नारदः प्राञ्जलिर्भूत्वा नाराय़णपराय़णः ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
नारदः प्राह धर्मात्मा निय़तं सोऽवसीदति ||
१४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
नारदः स च धर्मात्मा भरतानां पितामहः |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९६
कण्व उवाच
नारदः सर्वभूतानामन्तर्भूमिनिवासिनाम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
भीष्म उवाच
नारदः सुमहद्भूतं लोकान्सर्वानचीचरत् |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
नारदः सुमहातेजा ऋषिभिः सहितस्तदा ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५९
गन्धर्व उवाच
नारदप्रभृतीनां च देवर्षीणां मय़ा श्रुतम् |
४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
नारदप्रमुखांश्चापि सर्वान्देवऋषींस्तथा ||
२० ग
शल्य पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
नारदप्रमुखाश्चापि देवगन्धर्वसत्तमाः ||
३१ ख
सभा पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
नारदप्रमुखास्तस्यामन्तर्वेद्यां महात्मनः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
भीष्म उवाच
नारदश्च त्रिलोकर्षिर्वृत्रहन्ता च वासवः ||
८४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
नारदश्च वभूवात्र तुम्वुरुश्च महाद्युतिः |
३८ क
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
नारदश्च सभामध्ये कुरूणामग्रतः स्थितः |
२९ क
सभा पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
नारदस्तं तदा पश्यन्सर्वक्षत्रसमागमम् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
नारदस्तमृषिर्वेद भीष्मद्रोणौ च पाण्डव ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२००
वैशम्पाय़न उवाच
नारदस्त्वथ देवर्षिराजगाम यदृच्छय़ा |
९ ख
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
नारदस्त्वथ देवर्षिर्ज्ञात्वा तांस्तु कृतक्षणान् |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
नारदस्त्वव्रवीत्काले धर्मात्मानं युधिष्ठिरम् |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०२
कण्व उवाच
नारदस्त्वार्यकश्चैव कृतकार्यौ मुदा युतौ |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२३
वासुदेव उवाच
नारदस्य गुणान्साधून्सङ्क्षेपेण नराधिप ||
४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१
धृतराष्ट्र उवाच
नारदस्य च देवर्षेः कृष्णद्वैपाय़नस्य च ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
नारदस्य च देवर्षेः कृष्णद्वैपाय़नस्य च ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
नारदस्य च राजेन्द्र देवर्षेः पर्वतस्य च ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
भीष्म उवाच
नारदस्य च संवादं देवलस्यासितस्य च ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३८
भीष्म उवाच
नारदस्य च संवादं पुंश्चल्या पञ्चचूडय़ा ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३२
भीष्म उवाच
नारदस्य च संवादं वासुदेवस्य चोभय़ोः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७५
भीष्म उवाच
नारदस्य च संवादं समङ्गस्य च भारत ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२४
व्राह्मण उवाच
नारदस्य च संवादमृषेर्देवमतस्य च ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
भीष्म उवाच
नारदस्य च संवादमृषेर्नाराय़णस्य च ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
नारदस्य तु तद्वाक्यं प्रशशंसुर्द्विजोत्तमाः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१५
भीष्म उवाच
नारदस्य वचः श्रुत्वा कृष्णद्वैपाय़नोऽव्रवीत् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३९
वाय़ुरु उवाच
नारदस्य वचः श्रुत्वा क्रुद्धः प्राज्वलदङ्गिराः |
२२ क