chevron_left  नाशक्नुवन्वारय़ितुंarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
नाशक्नुवन्वारय़ितुं पार्थं क्षत्रिय़पुङ्गवाः ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
नाशक्नुवन्वारय़ितुं भीष्मवाणप्रपीडिताः ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
नाशक्नुवन्वारय़ितुं भीष्मवाणप्रपीडितान् ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
नाशक्नुवन्वारय़ितुं योधाः क्रुद्धमिवान्तकम् ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
नाशक्नुवन्वारय़ितुं वरिष्ठं; मध्यन्दिने सूर्यमिवातपन्तम् |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६१
सञ्जय़ उवाच
नाशक्नुवन्वारय़ितुं वर्धमानमिवानलम् ||
११ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ९४
सञ्जय़ उवाच
नाशक्नुवन्वारय़ितुं समन्ता; दादित्यरश्मिप्रतिमं नराग्र्यम् ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
नाशक्नुवन्वारय़ितुं समस्तास्ते महारथाः ||
६९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
नाशक्नुवन्वारय़ितुं समेत्यापि महारथाः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
नाशक्नुवन्समुद्धर्तुं ततो जग्मुर्जनार्दनम् ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४
व्यास उवाच
नाशक्नोद्रक्षितुं राज्यं नान्वरज्यन्त तं प्रजाः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
नाशक्नोद्विनिहन्तुं तान्दैवभाव्यर्थरक्षितान् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३२
सञ्जय़ उवाच
नाशक्यन्त महाराज योधा वारय़ितुं तदा ||
४२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
नाशप्राय़ं सुखाद्धीनं नाशोत्तरमभावगम् |
५८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
नाशशंसुर्जय़ं तत्र तावकाः पुरुषर्षभ ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७६
सञ्जय़ उवाच
नाशशंसुर्महाराज सिन्धुराजस्य जीवितम् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
नाशाच्च व्रह्मणो राजन्धर्मो नाशमथागमत् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
नाशिष्ये सम्प्रदातव्यो नाव्रते नाकृतात्मनि ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
नाशीर्यत धनुस्तस्य रथभङ्गो न चाप्यभूत् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०५
गुरुरु उवाच
नाशुद्धमाचरेत्तस्मादभीप्सन्देहय़ापनम् |
५ क
वन पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
नाशुद्धवाहुवीर्येण नाकृतास्त्रेण वा रणे |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
नाशुभं प्राप्नुय़ात्किञ्चित्सोऽमुत्रेह च मानवः ||
१२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४५
भीष्म उवाच
नाशुभं विद्यते तस्य मनसापि प्रमाद्यतः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
नाशे दुःखं व्यये दुःखं घ्नन्ति चैवार्थकारणात् ||
४२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
नाश्रद्दधच्छाल्वपतिः कन्याय़ा भरतर्षभ ||
१८ ख
विराट पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
नाश्रद्दधत तां दासीमन्नहेतोरुपस्थिताम् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
नाश्रद्दधानरूपाय़ नास्तिकाय़ाजितात्मने ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
नाश्रमेऽरोचय़द्वासं वीरमार्गाभिकाङ्क्षय़ा ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५५
तुलाधार उवाच
नाश्रावय़न्न च यजन्न ददद्व्राह्मणेषु च |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१७
नारद उवाच
नाश्रु कुर्वन्ति ये वुद्ध्या दृष्ट्वा लोकेषु सन्ततिम् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय २६
युधिष्ठिर उवाच
नाश्रेय़सः प्रावरानध्यवस्ते; कथं त्वस्मान्सम्प्रणुदेत्कुरुभ्यः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय २६
युधिष्ठिर उवाच
नाश्रेय़सः सेवते माल्यगन्धा; न्न चाप्यश्रेय़ांस्यनुलेपनानि ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २६
युधिष्ठिर उवाच
नाश्रेय़सामीश्वरो विग्रहाणां; नाश्रेय़सां गीतशव्दं शृणोति |
६ क
आदि पर्व
अध्याय ९२
स्त्र्यु उवाच
नाश्रेय़स्यस्मि नागम्या न वक्तव्या च कर्हिचित् |
७ क
वन पर्व
अध्याय १८४
सरस्वत्यु उवाच
नाश्रोत्रिय़ं देवहव्ये निय़ुञ्ज्या; न्मोघं परा सिञ्चति तादृशो हि |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय १२२
द्रुपद उवाच
नाश्रोत्रिय़ः श्रोत्रिय़स्य नारथी रथिनः सखा |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
नाश्रोत्रिय़ः श्रोत्रिय़स्य नारथी रथिनः सखा |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय १५४
द्रुपद उवाच
नाश्रोत्रिय़ः श्रोत्रिय़स्य नारथी रथिनः सखा |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १२६
लोमश उवाच
नाश्रौषीत्कश्चन तदा शकुनेरिव वाशितम् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२०
भीष्म उवाच
नाश्रय़ेद्वालवर्हाणि सन्निवासानि वासय़ेत् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
नाश्लक्ष्णं न च सन्दिग्धं वक्ष्यामि परमं तव ||
८७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२५
दुर्योधन उवाच
नाश्वमेधसहस्रेण पातुमात्मानमुत्सहे ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९६
भीष्म उवाच
नाश्वेन रथिनं याय़ादुदिय़ाद्रथिनं रथी |
१० क
विराट पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
नाशय़ञ्शरवर्षाणि भारद्वाजस्य वीर्यवान् |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
नाशय़त्यर्जुनस्तावत्सन्धिस्ते तात युज्यताम् ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
नाशय़त्यशुभं चैव दुःस्वप्नं च व्यपोहति ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
नाशय़न्तीव मे प्राणान्यमदूता इवाहिताः |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
नाशय़ामास पाञ्चालान्भूय़िष्ठं ये व्यवस्थिताः ||
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
नाशय़ामास सेनां वै भीष्मस्तेषां महात्मनाम् |
५७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
नाशय़ाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता ||
११ ख