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शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
नास्ति रागसमं दुःखं नास्ति त्यागसमं सुखम् ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय २०
वासुदेव उवाच
नास्ति लोके पुमानन्यः क्षत्रिय़ेष्विति चैव यत् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
नास्ति लोके समः कश्चित्समूह इति मे मतिः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २१
अष्टावक्र उवाच
नास्ति लोके हि काचित्स्त्री या वै स्वातन्त्र्यमर्हति ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
नास्ति लोकेषु तद्भूतं भविता नो भविष्यति |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
नास्ति विद्यासमं चक्षुर्नास्ति विद्यासमं तपः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
पुत्र उवाच
नास्ति विद्यासमं चक्षुर्नास्ति विद्यासमं वलम् |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय २४
श्रीभगवानु उवाच
नास्ति वुद्धिरय़ुक्तस्य न चाय़ुक्तस्य भावना |
६६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७५
समङ्ग उवाच
नास्ति वुद्धिरय़ुक्तस्य नाय़ोगाद्विद्यते सुखम् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
नास्ति वेदात्परं शास्त्रं नास्ति मातृसमो गुरुः |
६२ क
सभा पर्व
अध्याय ५०
दुर्योधन उवाच
नास्ति वै जातितः शत्रुः पुरुषस्य विशां पते |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
पूजन्यु उवाच
नास्ति वैरमुपक्रान्तं सान्त्वितोऽस्मीति नाश्वसेत् |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
नास्ति व्याधिभय़ं तेषां परलोकभय़ं कुतः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
नास्ति शक्तिरपाणित्वात्पश्यावस्थामिमां मम ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय १४७
हनूमानु उवाच
नास्ति शक्तिर्ममोत्थातुं व्याधिना क्लेशितो ह्यहम् |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
नास्ति शर्वसमो दाने नास्ति शर्वसमो रणे |
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
नास्ति शर्वसमो देवो नास्ति शर्वसमा गतिः ||
११ ग
आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
नास्ति श्रेष्ठं ममापत्यमिति नित्यमचिन्तय़त् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
नास्ति सत्यसमो धर्मो नास्ति दानसमो निधिः ||
८९ ख
आदि पर्व
अध्याय ६९
शकुन्तलो उवाच
नास्ति सत्यात्परो धर्मो न सत्याद्विद्यते परम् |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
भीष्म उवाच
नास्ति सत्यात्परो धर्मो नानृतात्पातकं परम् |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२९
श्रीभगवानु उवाच
नास्ति सत्यात्परो धर्मो नास्ति मातृसमो गुरुः |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
नास्ति सर्वामरत्वं हि निवर्तध्वमतोऽसुराः |
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०४
याज्ञवल्क्य उवाच
नास्ति साङ्ख्यसमं ज्ञानं नास्ति योगसमं वलम् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २१
अष्टावक्र उवाच
नास्ति स्वतन्त्रता स्त्रीणामस्वतन्त्रा हि योषितः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
भीष्म उवाच
नास्तिकं भिन्नमर्यादं कूलपातमिवास्थिरम् |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
नास्तिकः सर्वशङ्की च मूर्खः पण्डितमानिकः |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
नास्तिकानां च ये लोका येऽग्निहोरापितृत्यजाम् |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
भीष्म उवाच
नास्तिकान्निरनुक्रोशान्नरान्पापमतौ स्थितान् |
७४ क
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
नास्तिकान्भिन्नमर्यादान्क्रूरान्पापमतौ स्थितान् |
६६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३६
व्यास उवाच
नास्तिकाश्रद्दधानेषु पुरुषेषु कदाचन |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
नास्तिक्यं वेदनिन्दां च देवतानां च कुत्सनम् |
६० क
सभा पर्व
अध्याय ५
नारद उवाच
नास्तिक्यमनृतं क्रोधं प्रमादं दीर्घसूत्रताम् |
९६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६१
स्यूमरश्मिरु उवाच
नास्तिक्यमन्यथा च स्याद्वेदानां पृष्ठतःक्रिय़ा |
६० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४७
भीष्म उवाच
नास्तीत्येवं व्यवस्यन्ति सत्यं संशय़मेव च |
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०५
नारद उवाच
नास्ते न शेते नाहारं कुरुते गालवस्तदा ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३८
वाय़ुरु उवाच
नास्त्यण्डमस्ति तु व्रह्मा स राजँल्लोकभावनः |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४७
भीष्म उवाच
नास्त्यत्र संशय़ः कश्चिदिति मे वर्तते मतिः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७०
भीष्म उवाच
नास्त्यनन्तं महाराज सर्वं सङ्ख्यानगोचरम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
नास्त्यसाधारणो राजा नास्ति राज्यमराजकम् |
१५९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३२
भीष्म उवाच
नास्त्यसाध्यं वलवतां सर्वं वलवतां शुचि ||
७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १६२
भीष्म उवाच
नास्थाने क्रोधवन्तश्च न चाकस्माद्विरागिणः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
नास्थिरा स्वप्रतिज्ञाय़ां नासमीक्ष्यप्रवादिनी |
१८६ क
आदि पर्व
अध्याय ८७
यय़ातिरु उवाच
नास्मद्विधोऽव्राह्मणो व्रह्मविच्च; प्रतिग्रहे वर्तते राजमुख्य |
११ क
सभा पर्व
अध्याय ३५
भीष्म उवाच
नास्मा अनुनय़ो देय़ो नाय़मर्हति सान्त्वनम् |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
नास्माकं निकृतिर्वह्निर्नाक्षद्यूतं न वञ्चना |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
नास्मासु दधिरे भावं व्रह्मभावमनुष्ठिताः ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय १८१
वैशम्पाय़न उवाच
नास्मि कर्ण धनुर्वेदो नास्मि रामः प्रतापवान् |
१९ ख
विराट पर्व
अध्याय ४०
अर्जुन उवाच
नास्मि क्लीवो महावाहो परवान्धर्मसंय़ुतः |
१३ क
विराट पर्व
अध्याय ८
द्रौपद्यु उवाच
नास्मि देवी न गन्धर्वी नासुरी न च राक्षसी |
१५ क