द्रोण पर्व
अध्याय
१२६
सञ्जय़ उवाच
नाहत्वा सर्वपाञ्चालान्कवचस्य विमोक्षणम् |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
नाहत्वा सर्वपाञ्चालान्विमोक्ष्ये कवचं विभो |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२८६
सूर्य उवाच
नाहत्वा हि महावाहो शत्रूनेति करं पुनः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७१
भीष्म उवाच
नाहमद्य समावेष्टुं शक्यः काम पुनस्त्वय़ा ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१५
वैशम्पाय़न उवाच
नाहमन्नं वुभुक्षे वै पावकं मां निवोधतम् |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
७८
शर्मिष्ठो उवाच
नाहमन्याय़तः काममाचरामि शुचिस्मिते |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३३
व्राह्मण उवाच
नाहमस्मि यथा मां त्वं पश्यसे चक्षुषा शुभे |
२ क
विराट पर्व
अध्याय
४
धौम्य उवाच
नाहमस्य प्रिय़ोऽस्मीति मत्वा सेवेत पण्डितः |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
नाहमात्मनि किञ्चिद्वै किल्विषं कर्ण संस्मरे |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३२
जनक उवाच
नाहमात्मार्थमिच्छामि गन्धान्घ्राणगतानपि |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३२
जनक उवाच
नाहमात्मार्थमिच्छामि मनो नित्यं मनोन्तरे |
२२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३२
जनक उवाच
नाहमात्मार्थमिच्छामि रसानास्येऽपि वर्ततः |
१८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३२
जनक उवाच
नाहमात्मार्थमिच्छामि रूपं ज्योतिश्च चक्षुषा |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३२
जनक उवाच
नाहमात्मार्थमिच्छामि शव्दाञ्श्रोत्रगतानपि |
२१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३२
जनक उवाच
नाहमात्मार्थमिच्छामि स्पर्शांस्त्वचि गताश्च ये |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१०२
लोमश उवाच
नाहमात्मेच्छय़ा शैल करोम्येनं प्रदक्षिणम् |
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
नाहमादातुमिच्छामि व्रह्मस्वं मुनिसत्तमाः |
१३ क
विराट पर्व
अध्याय
६२
अर्जुन उवाच
नाहमार्ताञ्जिघांसामि भृशमाश्वासय़ामि वः ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२
शल्य उवाच
नाहमिच्छामि नहुषं पतिमन्वास्य तं प्रभुम् |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
नाहमिच्छामि भीष्मेण गृहीतां त्वां प्रसह्य वै ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
नाहमिच्छेय़मवनिं त्वय़ा दत्तां प्रशासितुम् ||
५२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६१
तपत्यु उवाच
नाहमीशात्मनो राजन्कन्या पितृमती ह्यहम् |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२
वृहस्पतिरु उवाच
नाहमेतत्करिष्यामि गच्छध्वं वै सुरोत्तमाः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१४९
व्राह्मण उवाच
नाहमेतत्करिष्यामि जीवितार्थी कथञ्चन |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०७
राजपुत्र उवाच
नाहमेतदलं कर्तुं नैतन्मय़्युपपद्यते ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२८
भीष्म उवाच
नाहमेतादृशं धर्मं वुभूषे धर्मकारणात् |
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
नाहमेतादृशं वुद्धं हन्तुमिच्छामि वन्धने |
१०९ क
विराट पर्व
अध्याय
१५
द्रौपद्यु उवाच
नाहमेतेन युक्ता वै हन्तुं मत्स्य तवान्तिके |
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
नाहमेनं धनुष्पाणिं युय़ुत्सुं समुपस्थितम् |
६१ क
वन पर्व
अध्याय
१७७
सर्प उवाच
नाहमेनं विमोक्ष्यामि न चान्यमभिकामय़े ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७८
भीष्म उवाच
नाहमेनां पुनर्दद्यां भ्रात्रे व्रह्मन्कथञ्चन ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२४
मन्दपाल उवाच
नाहमेवं चरे लोके यथा त्वमभिमन्यसे |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
युधिष्ठिर उवाच
नाहास्म समय़ं कृष्ण तद्धि नो व्राह्मणा विदुः ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
नाहास्म समय़ं तात तच्च नो व्राह्मणा विदुः ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७
युधिष्ठिर उवाच
नाह्ना पूरय़ितुं शक्या न मासेन नरर्षभ |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
नाय़ं कलापि सम्पूर्णा पाण्डवानां महात्मनाम् ||
३३ ख
विराट पर्व
अध्याय
४६
भीष्म उवाच
नाय़ं कालो विरोधस्य कौन्तेय़े समुपस्थिते |
६ क
वन पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
नाय़ं केवलमर्त्यो वै क्षत्रिय़त्वमुपागतः ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
नाय़ं क्लीवय़ितुं कालः संय़ोद्धुं काल एव नः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
नाय़ं क्लीवय़ितुं कालो विद्यते माधव क्वचित् ||
११ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
नाय़ं धर्मकृतो धर्मो न हिंसा धर्म उच्यते ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
विरूप उवाच
नाय़ं धारय़ते किञ्चिज्जिज्ञासा त्वत्कृते कृता |
११५ क
वन पर्व
अध्याय
६९
वृहदश्व उवाच
नाय़ं नलो महावीर्यस्तद्विद्यस्तु भविष्यति ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
नाय़ं नृत्येद्यथा देव तथा त्वं कर्तुमर्हसि ||
१०१ ग
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
नाय़ं नृत्येद्यथा देव तथा त्वं कर्तुमर्हसि ||
३६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२७९
भीष्म उवाच
नाय़ं परस्य सुकृतं दुष्कृतं वापि सेवते |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
नाय़ं पापसमाचारो मत्तो जीवितुमर्हति |
७ क
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
नाय़ं पापो मय़ा कृष्ण युक्तः स्यादनुरोधितुम् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
१४०
भीम उवाच
नाय़ं प्रतिवलो भीरु राक्षसापसदो मम |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
नाय़ं प्रवेष्टा नगरं पुनर्वारणसाह्वय़म् ||
१९ ख