आदि पर्व
अध्याय
२०२
नारद उवाच
तय़ोरागमनं ज्ञात्वा वरदानं च तत्प्रभोः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४
व्यास उवाच
तय़ोरावसथावास्तां रमणीय़ौ पृथक्पृथक् |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१९६
मार्कण्डेय़ उवाच
तय़ोराशां तु सफलां यः करोति स धर्मवित् |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
तय़ोरासन्भुजाघाता निग्रहप्रग्रहौ तथा |
३९ क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
तय़ोरासन्महाराज शरधाराः सहस्रशः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
तय़ोरासीत्प्रतिभ्राजः सूर्यपावकय़ोरिव ||
३३ ख
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोरासीत्सम्प्रहारः क्रुद्धय़ोर्नरसिंहय़ोः |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
तय़ोरासीत्सम्प्रहारः क्रुद्धय़ोर्नरसिंहय़ोः |
६१ क
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोरासीत्सम्प्रहारः क्रुद्धय़ोर्भीमरक्षसोः |
४६ क
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
तय़ोरासीत्सुतुमुलः सम्प्रहारः सुदारुणः |
५४ क
शल्य पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
तय़ोरासीन्महाराज वाणवर्षं सुदारुणम् |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
तय़ोरासीन्महाराज शस्त्रवृष्टिः सुदारुणा |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
तय़ोरासीन्महाराज सङ्ग्रामो लोमहर्षणः ||
६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
भीष्म उवाच
तय़ोराह्निकवेलाय़ां तस्य कौतूहलं त्वभूत् |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
९७
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोरुत्पादय़ापत्यं सन्तानाय़ कुलस्य नः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
९९
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोरुत्पादय़ापत्यं समर्थो ह्यसि पुत्रक |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
२५
कश्यप उवाच
तय़ोरेकतरः श्रीमान्समुपैति महागजः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७०
भीष्म उवाच
तय़ोरेकतरे मार्गे यद्येनमभिसंनय़ेत् |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
१८९
व्यास उवाच
तय़ोरेको वलदेवो वभूव; कृष्णो द्वितीय़ः केशवः सम्वभूव ||
३१ ग
आदि पर्व
अध्याय
२९
सूत उवाच
तय़ोरेकोऽपि यं पश्येत्स तूर्णं भस्मसाद्भवेत् ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोरेव स्वसा देवी लक्ष्मीः पद्मगृहा शुभा |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्ज्यातलनिर्घोषो व्यश्रूय़त सुदारुणः |
१६ क
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोर्दिव्यास्त्रविदुषोरस्यतोरनिशं शरान् |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
१४७
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोर्दुःखितय़ोर्वाक्यमतिमात्रं निशम्य तत् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्दृष्ट्वा महाराज कर्म संमूढचेतनम् ||
५० ख
सभा पर्व
अध्याय
६१
विदुर उवाच
तय़ोर्देवनमत्रासीत्प्राणय़ोरिति नः श्रुतम् ||
६० ख
विराट पर्व
अध्याय
५४
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोर्देवासुरसमः संनिपातो महानभूत् |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्देहौ रथाद्भूमिं गतौ वन्धुजनप्रिय़ौ |
१३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
२
कृप उवाच
तय़ोर्दैवं विनिश्चित्य स्ववशेनैव वर्तते |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोर्द्वे दिवसे युद्धं कुरुपाण्डवसेनय़ोः |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्धनुर्ज्यातलनिस्वनो महा; न्महेन्द्रवज्राशनितुल्यनिस्वनः |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
तय़ोर्धात्र्यौ सुसंवीते कृत्वा ते गर्भसम्प्लवे |
३७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्ध्वजौ वीतमालौ शुशुभाते रथस्थितौ |
६४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
तय़ोर्न दर्शनं तात मिथ्या भवितुमर्हति |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२५
श्रीभगवानु उवाच
तय़ोर्न वशमागच्छेत्तौ ह्यस्य परिपन्थिनौ ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्नृवरय़ो राजन्दृश्य तादृक्पराक्रमम् |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्नृवरय़ो राजन्समरे युध्यमानय़ोः |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्नृवरय़ो राजन्सारथ्यं दारुकस्य च ||
५१ ख
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
तय़ोर्भुजविनिष्पेषात्सङ्घर्षेणोरसोस्तथा |
४८ क
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
तय़ोर्भुजविनिष्पेषादुभय़ोर्वलिनोस्तदा |
५८ क
आदि पर्व
अध्याय
२०२
नारद उवाच
तय़ोर्भय़ाद्दुद्रुवुस्ते वैनतेय़ादिवोरगाः ||
१७ ख
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
तय़ोर्मध्यगतश्चापि रराज वसुधाधिपः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्महात्मनोस्तूर्णं रथान्तरमवापतत् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्युद्धं महच्चासीत्सङ्ग्रामे भरतर्षभ |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्युद्धं महाराज चित्ररूपमिवाभवत् |
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्युद्धं महाराज चित्ररूपमिवाभवत् |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्युद्धं महाराज चिरं सममिवाभवत् |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्युद्धं समभवद्घोररूपं भय़ावहम् ||
३१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्युद्धं समभवद्घोररूपं विशां पते |
७६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
तय़ोर्युद्धं समभवद्भीष्महेतोः परन्तप |
३४ क