शान्ति पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
तत्स्वदेहे दय़ां त्यक्त्वा धर्मार्थौ परिगृह्य वै |
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
तत्स्वप्तुमिच्छे कल्याणि न स्थातुं शक्तिरस्ति मे ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
३३
द्रौपद्यु उवाच
तत्स्वभावात्मकं विद्धि फलं पुरुषसत्तम ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८६
पराशर उवाच
तत्स्वभावोऽपरो दृष्टो विसर्गः कर्मणस्तथा ||
१७ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
तत्स्वस्ति वोऽस्तु यास्यामि स्वगृहं जीवितेप्सय़ा ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२६
श्रीभगवानु उवाच
तत्स्वय़ं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
तथ काम्वोजराजस्य पुत्रः शूरः सुदक्षिणः |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
तथः शक्तिं गृहीत्वा तु रुक्मदण्डामय़स्मय़ीम् |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
तथा ऋषिगणाश्चैव संश्रय़न्ति महीरुहान् ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६६
गन्धर्व उवाच
तथा ऋषिरुवाचैनं सान्त्वय़ञ्श्लक्ष्णय़ा गिरा ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
तथा कंसो महातेजा जरासन्धेन पालितः |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१८९
वैशम्पाय़न उवाच
तथा कथां शुभां श्रुत्वा मार्कण्डेय़स्य धीमतः |
३१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८९
युधिष्ठिर उवाच
तथा कथय़तामेव तेषामर्जुनसङ्कथाः |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
तथा कथय़तामेव देवराजः पुरन्दरः |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
तथा कथय़तोरेव तय़ोर्वुद्धिमतोस्तदा |
१ क
वन पर्व
अध्याय
२२७
वैशम्पाय़न उवाच
तथा कथय़मानौ तौ घोषय़ात्राविनिश्चय़म् |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
तथा कनखले स्नात्वा धूतपाप्मा दिवं व्रजेत् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
१८९
युधिष्ठिर उवाच
तथा करिष्ये यत्नेन भवतः शासनं विभो ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
तथा करोति सैन्यानि यथा कुर्याद्धनञ्जय़ः ||
३७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
तथा कर्णं महेष्वासं पुत्रास्तव नराधिप |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
तथा कर्णं युधि वरं कीर्तय़न्तं पुनः पुनः |
४५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
तथा कर्णं समासाद्य तावका भरतर्षभ |
७३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
तथा कर्णमनुप्राप्य न जीवन्ति महारथाः ||
६० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१
काल उवाच
तथा कर्म च कर्ता च सम्वद्धावात्मकर्मभिः ||
६८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६
भीष्म उवाच
तथा कर्मक्षय़ाद्दैवं प्रम्लानिमुपगच्छति ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७०
भीष्म उवाच
तथा कर्मफलैर्देही रञ्जितस्तमसावृतः |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६
भीष्म उवाच
तथा कर्मसमाय़ुक्तं दैवं साधु विवर्धते ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५७
भीष्म उवाच
तथा कर्मसु वर्तेत समर्थो धर्ममाचरेत् ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४९
व्रह्मो उवाच
तथा कर्मसु विज्ञेय़ं फलं भवति वा न वा |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९९
मनुरु उवाच
तथा कर्मानुगा वुद्धिरन्तरात्मानुदर्शिनी ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५९
द्युमत्सेन उवाच
तथा कलिय़ुगे प्राप्ते राज्ञां दुश्चरितेन ह |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
तथा कलिय़ुगे राजन्द्वन्द्वमापेदिरे जनाः ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
१३८
लोमश उवाच
तथा कल्याणशीलस्त्वं व्राह्मणेषु महात्मसु |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
तथा कवचिनः शूराः शस्त्रेषु कृतनिश्रमाः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
जम्वुक उवाच
तथा कश्चिद्भवेत्सिद्धो मुनिर्वा देवतापि वा |
६४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८०
पराशर उवाच
तथा कामकृतं चास्य विहिंसैवापकर्षति |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
तथा कामाः प्ररोहन्ति भूमिदानसमार्जिताः ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
तथा कार्यं त्वय़ा कृष्ण कार्यं हि महदुद्यतम् ||
५६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
तथा काशिषु सुह्मेषु पुण्ड्रेषु भरतर्षभ |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१४०
लोमश उवाच
तथा किम्पुरुषा राजन्यक्षाश्चैव चतुर्गुणाः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
तथा किम्पुरुषैश्चैव गन्धर्वैश्च समन्ततः ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
तथा किलकिलाशव्दैर्भूरभूत्सुमनोहरा ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
तथा कीटपतङ्गानां सदृशास्या गणेश्वराः |
८६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
तथा कुरु कुरुश्रेष्ठ दिव्यमस्त्रमुपाश्रितः ||
२८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
तथा कुरु महाराज स हि नः परमो गुरुः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
तथा कुरु रणे यत्नं साधय़स्व पितामहम् ||
५३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
तथा कुरुत कौरव्या यथा वः सात्यको युधि |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
२०४
नारद उवाच
तथा कुरुत भद्रं वो मम चेत्प्रिय़मिच्छथ ||
२६ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
तथा कुरुत संय़त्ता वय़ं यास्याम पृष्ठतः |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
तथा कुरुष्व गान्धारे कथं वा भीष्म मन्यसे ||
१० ख