द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
निहते तु तदा भीष्मे राजन्सत्यपराक्रमे |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
निहते भीमसेने तु यदि वा विरथीकृते |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
धृतराष्ट्र उवाच
निहते मामके सैन्ये निःशेषे शिविरे कृते |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
निहते राक्षसे तस्मिन्पुनर्नाराय़णाश्रमम् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६७
सञ्जय़ उवाच
निहते वज्रहस्तेन यथा वृत्रे महासुरे ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
युय़ुत्सुरु उवाच
निहते शकुनौ तात सज्ञातिसुतवान्धवे |
८६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५९
वासुदेव उवाच
निहते शकुनौ राजा धार्तराष्ट्रः सुदुर्मनाः |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
निहते सूतपुत्रे तु पाण्डवेन महात्मना |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
निहते सैन्धवे पापे पाण्डवेन महात्मना |
७२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३०
धृतराष्ट्र उवाच
निहते सैन्धवे वीरे भूरिश्रवसि चैव हि |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
निहते सौवले शूरे गान्धारेषु च सर्वशः ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
निहतेषु च शूरेषु मद्रराजानुगेषु च |
३५ क
शल्य पर्व
अध्याय
६२
जनमेजय़ उवाच
निहतेषु तु योधेषु हते दुर्योधने तथा |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२४३
वैशम्पाय़न उवाच
निहतेषु नरश्रेष्ठ प्राप्ते चापि महाक्रतौ |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
निहतै राजपुत्रैश्च क्षत्रिय़ैश्च महावलैः |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
निहतैः क्षत्रिय़ैः शूरैर्नानाजनपदेश्वरैः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
निहतैः क्षत्रिय़ैरश्वैर्वारणैश्च विशां पते |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
निहतैः सादिभिश्चैव शूरैराहवशोभिभिः |
१०८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
निहतैर्मत्तमातङ्गैः शोणितौघपरिप्लुतैः |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
निहतैर्वारणैरश्वैः क्षत्रिय़ैश्च निपातितैः |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
निहतो गदय़ा राजन्भीमसेनेन संय़ुगे ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५६
वासुदेव उवाच
निहतो भीमसेनेन पश्यतस्ते धनञ्जय़ ||
१५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१८
गान्धार्यु उवाच
निहतो भीमसेनेन सिंहेनेव महर्षभः ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६७
गान्धार्यु उवाच
निहतो भीमसेनेन स्मर्तासि वचनं पितुः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
निहतो युधि विक्रम्य ततोऽहं द्रोणमव्रुवम् |
१०२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
निहतो राक्षसः कृष्ण भैमसेनिर्महावलः ||
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
निहतो वा रणेऽस्माभिर्वीरलोकमवाप्स्यसि ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
युधिष्ठिर उवाच
निहतो वासवेनेह वज्रेणेति ममानघ ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
निहतो विजय़ेनाजौ वासुदेवस्य पश्यतः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२८७
वैशम्पाय़न उवाच
निहतो व्रह्मदण्डेन तालजङ्घस्तथैव च ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
निहतौ भ्रातरौ दृष्ट्वा माय़ाशतविशारदः |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
निहत्य गदय़ा पापमद्य राजन्सुखी भव ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
निहत्य गदय़ा पापमिमं कुरुकुलाधमम् ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२६३
मार्कण्डेय़ उवाच
निहत्य गृध्रराजं स छिन्नाभ्रशिखरोपमम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
निहत्य च मुदा युक्तः सोऽनुवन्धं न दृष्टवान् ||
३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
निहत्य चैव पाञ्चालाञ्शान्तिं लव्धास्मि सत्तम ||
२८ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
निहत्य जलसन्धं च क्षिप्रमाय़ाति सात्यकिः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
निहत्य तं नरपतिमिन्द्रविक्रमं; सखाय़मिन्द्रस्य तथैन्द्रिराहवे |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
निहत्य तं पार्थिवपुत्रपौत्रं; रणे यदूनामृषभस्तरस्वी |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
निहत्य तं पार्थिवपुत्रपौत्रं; सङ्ख्ये मधूनामृषभः प्रमाथी |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
निहत्य तांश्चापि शरैः सुतीक्ष्णै; र्न विव्यथे समरे चित्रय़ोधी ||
४१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
निहत्य ताञ्शरान्राजा राक्षसस्य धनुश्च्युतान् |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२५
दुर्योधन उवाच
निहत्य तान्रणे सर्वान्पाञ्चालान्पाण्डवैः सह |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
निहत्य तान्वाणगणान्द्रोणो राजन्समन्ततः |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६९
सञ्जय़ उवाच
निहत्य त्वां यदा भूमौ स विक्रामति वीर्यवान् |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
पितामह उवाच
निहत्य दानवपतीन्महावर्ष्मा महावलः |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
निहत्य दुःशासनमुक्तवान्वहु; प्रसह्य शार्दूलवदेष दुर्मतिः |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
१३
अर्जुन उवाच
निहत्य नरकं भौममाहृत्य मणिकुण्डले |
१६ क
विराट पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
निहत्य नागं तु शरेण तेन; वज्रोपमेनाद्रिवराम्वुदाभम् |
१२ क