वन पर्व
अध्याय
१४७
भीम उवाच
निर्गुणः परमात्मेति देहं ते व्याप्य तिष्ठति |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९६
वसिष्ठ उवाच
निर्गुणः प्रकृतिं वेद गुणय़ुक्तामचेतनाम् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९५
वसिष्ठ उवाच
निर्गुणत्वं च वैदेह गुणेषु प्रतिवर्तनात् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
निर्गुणास्त्वेव भूय़िष्ठमात्मसम्भाविनो नराः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
निर्गुणो गुणभुक्चैव गुणस्रष्टा गुणाधिकः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
निर्गुणो निष्कलश्चैव निर्द्वन्द्वो निष्परिग्रहः |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८३
पराशर उवाच
निर्गुणो यो हि दुर्वुद्धिरात्मनः सोऽरिरुच्यते ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
१८८
मार्कण्डेय़ उवाच
निर्घातवाय़सा नागाः शकुनाः समृगद्विजाः |
८१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
निर्घातशव्दैश्च गिरिर्हिमवान्दीर्यतीव ह ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
निर्घातश्चाभवद्भीमो भीमे विक्रममास्थिते |
४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
निर्घाता वहवश्चासन्पेतुरुल्काः सहस्रशः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
निर्घाता वहवो राजन्दिक्षु सर्वासु चाभवन् |
४० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
निर्घाताः पृथिवीकम्पा गजवृंहितनिस्वनाः |
२९ क
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
निर्घाताश्च महाघोरा वभूवू रोमहर्षणाः |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
निर्जगाम नरव्याघ्र राज्ञा सह परन्तप ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
निर्जगाम पुनस्तस्मात्क्षय़ान्नाराय़णस्य ह ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७३
गन्धर्व उवाच
निर्जगाम पुराद्राजा सहदारः परन्तपः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
निर्जगाम महासैन्याद्भ्रातृभिः परिवारितः ||
८३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६७
गन्धर्व उवाच
निर्जगाम सुदुःखार्तः पुनरेवाश्रमात्ततः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
१४३
वैशम्पाय़न उवाच
निर्जग्मुस्ते शनैः सर्वे समाजग्मुश्च भारत |
२१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
निर्जनानसहाय़स्त्वं देशान्प्रविचरिष्यसि |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
६६
शकुन्तलो उवाच
निर्जने च वने यस्माच्छकुन्तैः परिरक्षिता |
१४ क
विराट पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
निर्जने मृगसङ्कीर्णे नानाद्रुमलतावृते |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
६६
शकुन्तलो उवाच
निर्जने विपिनेऽरण्ये शकुन्तैः परिवारिताम् |
१२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
निर्जनेय़ं वसुमती शून्या सम्प्रति केवला ||
६ ग
आदि पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
निर्जलं निर्मनुष्यं च वहुय़ोजनमाय़तम् |
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३१
कुन्त्यु उवाच
निर्जितं सिन्धुराजेन शय़ानं दीनचेतसम् |
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
निर्जितश्च त्वय़ा मृत्युरैश्वर्यं च तवोत्तमम् ||
८५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
निर्जिता धनुषैकेन शतशः क्षत्रिय़र्षभाः |
७२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
निर्जिता रथिनैकेन दिष्ट्या पार्थः स जीवति ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
१२६
लोमश उवाच
निर्जिता शासनादेव सरत्नाकरपत्तना ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७८
भीष्म उवाच
निर्जिताः क्षत्रिय़ा लोके मय़ैकेनेति तच्छृणु ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
निर्जितान्पाण्डवांश्चैव मेनिरे तव कौरवाः ||
३९ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
निर्जिताश्च तदा दैत्या दैवतैरिति नः श्रुतम् ||
३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
निर्जिताश्च महीपाला विक्रमेण त्वय़ानघ ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
निर्जिताश्चारय़ो ह्येते शस्त्रोत्सर्गान्मृतोपमाः ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
निर्जिते मय़ि युद्धे तु ध्रुवं जेष्यथ कौरवान् |
६६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७०
भीष्म उवाच
निर्जितेनासहाय़ेन हृतराज्येन भारत |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
निर्जितेषु च दैत्येषु तारकस्य सुतास्त्रय़ः |
४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
निर्जितैरप्रमत्तैर्हि विजिता जितकाशिनः ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
राम उवाच
निर्जितो ह्यस्मि भीष्मेण महास्त्राणि प्रमुञ्चता ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७७
भीष्म उवाच
निर्जितोऽस्मीति वा व्रूय़ात्कुर्याद्वा वचनं तव ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
निर्जित्य च रणे शत्रून्नकुलः शत्रुतापनः |
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
निर्जित्य तु रणे कर्णं भीमसेनः प्रतापवान् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
निर्जित्य दुर्धरं द्रोणं सपदानुगमाहवे ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
निर्जित्य धार्तराष्ट्रांस्तु पाण्डवेय़ा महारथाः |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
निर्जित्य नरकं भौममाहृत्य मणिकुण्डले ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
सञ्जय़ उवाच
निर्जित्य पार्थिवान्सर्वान्रथमारोपय़च्छिनिः ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७५
होत्रवाहन उवाच
निर्जित्य पृथिवीपालानथ भीष्मो गजाह्वय़म् |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
निर्जित्य पृथिवीपालानवहत्पुष्करेक्षणः ||
१० ख