आदि पर्व
अध्याय
८४
यय़ातिरु उवाच
नानाभावा वहवो जीवलोके; दैवाधीना नष्टचेष्टाधिकाराः |
६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४२
सूत उवाच
नानाभावास्तथैकत्वं शरीरं प्राप्य संहताः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
नानाभूतस्य दैत्येन्द्र तस्यैकत्वं वदत्ययम् |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
नानामधुरभाषाभिर्नानारतिभिरेव च ||
१२५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७३
गन्धर्व उवाच
नानामृगगणाकीर्णं नानासत्त्वसमाकुलम् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
नानामृगगणाकीर्णं सिद्धचारणसेवितम् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
नानामृगगणैर्जुष्टं कौन्तेय़ः सत्यविक्रमः |
२६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
नानामृगगणैर्जुष्टं नानापक्षिसमाकुलम् |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
नानारङ्गाः समरे तत्र राज; न्मेघैर्युक्ता विद्युतः खे यथैव ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
नानारञ्जनरक्ताः स्युः पताकाः केतवश्च ते ||
७ ख
विराट पर्व
अध्याय
६६
अर्जुन उवाच
नानारथसहस्राणां समर्थौ पुरुषर्षभौ ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
नानारागैः कम्वलैश्च परिस्तोमैश्च दन्तिनाम् |
६७ क
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
नानाराज्येषु च सुतान्स सम्राडभ्यषेचय़त् ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
नानारूपगुणोद्देशं पश्य विप्रस्थितं पृथक् |
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५१
सञ्जय़ उवाच
नानारूपधरैर्वीरैः पूर्ववैरमनुस्मरन् ||
२ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
नानारूपविकाराश्च नानाकवचशस्त्रिणः |
१८ क
स्त्री पर्व
अध्याय
५
विदुर उवाच
नानारूपा मधुकरा घोररूपा भय़ावहाः |
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
नानारूपाः प्रहरणाः शरा गाण्डीवचोदिताः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
नानारूपाः सप्त विभो कन्याः सर्वा मनोहराः ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
नानारूपाणि विभ्राणास्तेषां भेदाश्चतुर्दश |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
नानारूपाणि शस्त्राणि विसृजन्तो महारथाः |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
नानारूपाणि शस्त्राणि विसृजन्तो महारथाः |
४५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
नानारूपाणि शस्त्राणि विसृजन्तो विशां पते |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९
युधिष्ठिर उवाच
नानारूपान्वने पश्यन्रमणीय़ान्वनौकसः ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८२
भीष्म उवाच
नानारूपास्तेजसोग्रेण दीप्ता; यथादित्या द्वादश लोकसङ्क्षय़े ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
नानारूपेण वर्णेन नानाकृतिमुखा हय़ाः |
६० क
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
नानारूपै रत्नचित्रैर्वरूथध्वजकार्मुकैः |
५६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
नानारूपैरलङ्कारैः प्रमदेवाभ्यलङ्कृता ||
६५ ख
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
नानारूपैरिव कृता सुविचित्रैः सुभास्वरैः |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२७
भीष्म उवाच
नानारूपैर्विरूपैश्च दिव्यैरद्भुतदर्शनैः ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३३
व्राह्मण उवाच
नानालिङ्गाश्रमस्थानां येषां वुद्धिः शमात्मिका |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
नानालिङ्गैः शरव्रातैः पार्षतं सममोहय़त् ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
नानालिङ्गैस्तदामित्रान्क्रुद्धे निघ्नति फल्गुने ||
२६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
नानावक्त्रास्तथा रौद्राः क्रव्यादाः पिशिताशिनः ||
१३३ ख
वन पर्व
अध्याय
२२६
वैशम्पाय़न उवाच
नानावनोद्देशवती पत्तनैरुपशोभिता ||
८ ग
आदि पर्व
अध्याय
१६५
गन्धर्व उवाच
नानावरणसञ्छन्नैर्नानाय़ुधधरैस्तथा |
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
नानावर्णत्वमनय़न्मेघानिव दिवाकरः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
नानावर्णधरैश्चित्रं धातुद्रुममृगाण्डजैः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२७
भीष्म उवाच
नानावर्णमृगप्रख्यैः सर्वजातिसमन्वय़ैः |
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
नानावर्णविचित्राभिः पताकाभिरलङ्कृतान् |
११४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
नानावर्णविचित्राभिः पताकाभिरलङ्कृतैः ||
५३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
नानावर्णविरागाभिर्विवभुः सर्वतो वृताः ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
नानावर्णा रथे भान्ति श्वसनेन प्रकम्पिताः ||
४९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
व्यास उवाच
नानावर्णाः शृङ्गवन्त्यस्ता व्यरोचन्त पुत्रक ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
नानावर्णाः सवर्णाश्च मय़ूरसदृशप्रभाः ||
१०१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
नानावर्णाश्च चित्राश्च पताकाः पवनेरिताः |
७६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
नानावर्णैर्हता वाणैः पाञ्चालैरपलाय़िभिः ||
५९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
नानावर्णैर्हय़श्रेष्ठैर्हेमचित्ररथध्वजाः ||
३६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
नानावर्मभिराच्छन्ना नानाभाषाश्च भारत ||
९७ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
नानावस्थाश्च योधानां वभूवुस्तत्र युध्यताम् ||
१०७ ख