कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
निश्चेष्टो यद्रणे राजञ्शिखण्डी समतिष्ठत ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
निश्चेष्टोऽतिष्ठत तदा वीज्यमानः समन्ततः ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
निश्चेष्टौ तावुभौ चक्रे युद्धे माधवपाण्डवौ ||
११३ ख
विराट पर्व
अध्याय
४०
उत्तर उवाच
निश्चय़ं चापि दुर्मेधा न गच्छामि कथञ्चन ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
निश्चय़ं तमभिज्ञाय़ मुनेस्तस्य महात्मनः |
२९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४८
ऋषय़ ऊचुः
निश्चय़ं नाधिगच्छामः संमूढाः सुरसत्तम ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०४
चण्डाल उवाच
निश्चय़ं नाधिगच्छामि कथं मुच्येय़मित्युत ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
२२
वासुदेव उवाच
निश्चय़ं नाधिगच्छामि कर्तव्यस्येतरस्य वा ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
५४
वृहदश्व उवाच
निश्चय़ं परमं तथ्यमनुरागं च नैषधे ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
निश्चय़ं मनसा कृत्वा निग्रहीतुं प्रचक्रमुः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
निश्चय़ं शृणु मे तत्र त्यागे भरतसत्तम |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
निश्चय़ज्ञः स पार्थाय़ कथय़ामास केशवः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९
युधिष्ठिर उवाच
निश्चय़श्चैव यन्मात्रो वेदाहं तं यथाविधि ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
युधिष्ठिर उवाच
निश्चय़ेन चिकीर्षामि धर्ममेतं सनातनम् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
निश्चय़ो वापि कस्तेषां तदा ह्यासीन्महात्मनाम् |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
निषङ्गी कवची पाशी तथा नन्दोपनन्दकौ ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
निषण्णं पाणिना पृष्ठे संस्पृशन्नम्विकासुतः ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
निषण्णश्चापि खादेत न तु गच्छन्कथञ्चन ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
मार्कण्डेय़ उवाच
निषण्णो दृश्यते भूतैः पौर्णमास्यां यथा शशी ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
निषधं चापि पश्यामि श्वेतं च रजताचितम् |
१०२ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
निषधश्च महातेजास्तथा जाम्वूनदो वली |
५० क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
निषधाधिपतिर्धीमान्नलो नाम महाय़शाः |
७३ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
निषधाधिपतेर्भार्यां नलस्यामित्रघातिनः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
निषधानामधिपतिं दृष्टवानसि मे प्रिय़म् ||
१०० ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
निषधानामधिपतिं नलं रिपुनिघातिनम् |
८८ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
निषधानामधिपतिः कच्चिद्दृष्टस्त्वय़ा नलः ||
५१ ग
वन पर्व
अध्याय
५६
वृहदश्व उवाच
निषधान्प्रतिपद्यस्व जित्वा राजन्नलं नृपम् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
निषधेषु महाशैल श्वशुरो मे नृपोत्तमः |
४५ क
वन पर्व
अध्याय
४९
वृहदश्व उवाच
निषधेषु महीपालो वीरसेन इति स्म ह |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
निषसाद गिरिप्रस्थे पुत्रमेवानुचिन्तय़न् ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
निषसाद द्विजश्रेष्ठः पूज्यमानो महर्षिभिः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
निषसाद महाराज कश्मलं च जगाम ह ||
५१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
निषसाद रथोपस्थे कश्मलं च जगाम ह ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
निषसाद रथोपस्थे कश्मलं च जगाम ह ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
निषसाद रथोपस्थे कश्मलं चैनमाविशत् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
निषसाद रथोपस्थे द्रोणो भरतसत्तम ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
निषसाद रथोपस्थे ध्वजय़ष्टिमुपाश्रितः ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
निषसाद रथोपस्थे मूर्छय़ाभिपरिप्लुतः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
निषसाद रथोपस्थे राजा दुर्योधनस्तदा ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
निषसाद रथोपस्थे विसञ्ज्ञः पृतनापतिः ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
निषसाद रथोपस्थे वैक्लव्यं च परं यय़ौ ||
५१ ख
आदि पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
निषसाद समा वह्वीर्गङ्गातीरगतो जपन् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२००
वैशम्पाय़न उवाच
निषसादाभ्यनुज्ञातस्ततो राजा युधिष्ठिरः |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
निषसादासने कृष्णो राजानश्च यथासनम् ||
४६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
मनुरु उवाच
निषसादासने पश्चाद्विधिवद्भूरिदक्षिणः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
निषसादासने पुण्ये तमेवार्थं विचिन्तय़न् ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय
२४३
वैशम्पाय़न उवाच
निषसादासने मुख्ये भ्रातृभिः परिवारितः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
निषसादासने राजन्महार्हे मुनिपुङ्गवः ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
निषसादासने राजा सहपुत्रो विशां पते ||
४९ ख
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
निषादभूमिं गोशृङ्गं पर्वतप्रवरं तथा |
५ क