भीष्म पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
नाराय़ण सुदुष्पार जय़ शार्ङ्गधनुर्धर ||
४५ ख
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
नाराय़णं चाभिगम्य पद्मनाभमरिन्दमम् |
१५० क
वन पर्व
अध्याय
९८
लोमश उवाच
नाराय़णं पुरस्कृत्य दधीचस्याश्रमं यय़ुः ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
१००
लोमश उवाच
नाराय़णं पुरस्कृत्य वैकुण्ठमपराजितम् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
भीष्म उवाच
नाराय़णं संनिरीक्ष्य प्रसन्नेनान्तरात्मना |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
युधिष्ठिर उवाच
नाराय़णं हृषीकेशं गोविन्दमपराजितम् |
२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३९
व्यास उवाच
नाराय़णं हृषीकेशमश्विनौ यमजावुभौ ||
११ ग
वन पर्व
अध्याय
८८
धौम्य उवाच
नाराय़णः प्रभुर्विष्णुः शाश्वतः पुरुषोत्तमः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
नाराय़णः स विश्वात्मा तेनास्य शितिकण्ठता ||
४७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
नाराय़णकृतौ विन्दू अपामास्तां गुणोत्तरौ ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
नाराय़णपरं सत्यमृतं नाराय़णात्मकम् |
७६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
नाराय़णपरं साङ्ख्यं योगो नाराय़णात्मकः ||
८१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
नाराय़णपरः कालो ज्योतिषामय़नं च यत् ||
८० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
नाराय़णपरा कीर्तिः श्रीश्च लक्ष्मीश्च देवताः |
८१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
नाराय़णपरा वेदा यज्ञा नाराय़णात्मकाः |
७५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
नाराय़णपरो धर्मः पुनरावृत्तिदुर्लभः ||
७६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
भीष्म उवाच
नाराय़णपरो भूत्वा नाराय़णपदं जगौ ||
५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
नाराय़णपरो मोक्षस्ततो वै सात्त्विकः स्मृतः ||
६५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
वैशम्पाय़न उवाच
नाराय़णप्रसादेन क्षीरोदस्यानुकूलतः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
व्यास उवाच
नाराय़णप्रसादेन तथा नाराय़णांशजम् ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय
२९४
इन्द्र उवाच
नाराय़णमचिन्त्यं च तेन कृष्णेन रक्ष्यते ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
नाराय़णममित्रघ्नं वैकुण्ठमुपचक्रमुः ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
नाराय़णमुखोद्गीतं नारदोऽश्रावय़त्पुनः |
१०१ क
आदि पर्व
अध्याय
१६
सूत उवाच
नाराय़णवचः श्रुत्वा वलिनस्ते महोदधेः |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
नाराय़णवलैर्युक्तो गोपालैर्युद्धदुर्मदः ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
नाराय़णस्तथैवात्र भूय़सोऽन्याञ्जघान ह ||
१७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
वैशम्पाय़न उवाच
नाराय़णस्यांशजमेकपुत्रं; द्वैपाय़नं वेदमहानिधानम् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११
भीष्म उवाच
नाराय़णस्याङ्कगतां ज्वलन्तीं; दृष्ट्वा श्रिय़ं पद्मसमानवक्त्राम् |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७
कृष्ण उवाच
नाराय़णा इति ख्याताः सर्वे सङ्ग्रामय़ोधिनः ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
नाराय़णा हता यत्र गोपाला युद्धदुर्मदाः |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
नाराय़णात्मकं राजन्रुद्राय़ प्रददौ च सः ||
१५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
नाराय़णात्मकश्चापि शव्द आकाशसम्भवः ||
७९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
नाराय़णात्मकश्चापि स्पर्शो वाय़ुगुणः स्मृतः |
७९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
नाराय़णात्मके मोक्षे ततो यान्ति परां गतिम् ||
६९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
नाराय़णात्मको गन्धो भूमौ श्रेष्ठतमः स्मृतः ||
७७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
नाराय़णात्मको ज्ञेय़ः पाण्डवेय़ युगे युगे ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
वैशम्पाय़न उवाच
नाराय़णादिदं जन्म व्याहर्तुमुपचक्रमे ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
गुरुरु उवाच
नाराय़णादृषिगणास्तथा मुख्याः सुरासुराः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
नाराय़णाद्वरं लव्ध्वा प्राप्य योगमनुत्तमम् |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
नाराय़णानुशास्ता हि तदा देवी सरस्वती |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
नाराय़णाश्च गोपालाः काम्वोजानां च ये गणाः ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
नाराय़णाश्च गोपालाः कृत्वा मृत्युं निवर्तनम् ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
धृतराष्ट्र उवाच
नाराय़णास्त्रनिर्मुक्तांश्चरतः पृतनामुखे ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
नाराय़णास्त्रशान्त्यर्थं नरनाराय़णौ वलात् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
नाराय़णास्त्रे निहते द्रोणपुत्रस्य धीमतः |
४२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२५
व्राह्मण उवाच
नाराय़णाय़ देवाय़ यदवध्नन्पशून्पुरा ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
सञ्जय़ उवाच
नाराय़णाय़ मे पित्रा प्रणम्य विधिपूर्वकम् |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
नाराय़णाय़ विश्वाय़ निर्गुणाय़ गुणात्मने ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
नाराय़णाय़ साध्याय़ मनुरिष्टाय़ धीमते |
१६७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३४
वैशम्पाय़न उवाच
नाराय़णीय़माख्यानमेतत्ते कथितं मय़ा |
१२ क