chevron_left  नृगस्यarrow_drop_down
वन पर्व
अध्याय ८६
धौम्य उवाच
नृगस्य यजमानस्य प्रत्यक्षमिति नः श्रुतम् |
६ क
आदि पर्व
अध्याय ५०
आस्तीक उवाच
नृगस्य यज्ञस्त्वजमीढस्य चासी; द्यथा यज्ञो दाशरथेश्च राज्ञः |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७१
युधिष्ठिर उवाच
नृगेण च यथा दुःखमनुभूतं महात्मना |
२ क
वन पर्व
अध्याय १२१
लोमश उवाच
नृगेण यजमानेन सोमेनेह पुरन्दरः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
नृगेण विष्वगश्वेन तथैव शशविन्दुना |
६६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
नृगेण सुमहत्कृच्छ्रं यदवाप्तं कुरूद्वह ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
नृगो यय़ातिर्नहुषो यदुः पूरुश्च वीर्यवान् |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११८
कीट उवाच
नृणां च संवाहय़तां श्रूय़ते विविधः स्वनः ||
११ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
नृणां शतसहस्रे द्वे द्वे शते चैव भारत ||
३७ ख
सभा पर्व
अध्याय ३५
भीष्म उवाच
नृणां हि लोके कस्यास्ति विशिष्टं केशवादृते ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३३
महेश्वर उवाच
नृणां हितार्थाय़ तव मय़ा वै समुदाहृतः ||
५६ ख
वन पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
नृत्तं गीतं च कौन्तेय़ चित्रसेनादवाप्नुहि ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
नृत्तवादित्रगीतं च कुर्वन्ति सुमनोरमम् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
नृत्तवादित्रगीतानां दिव्यानां पारमेय़िवान् ||
३२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३७
व्रह्मो उवाच
नृत्तवादित्रगीतानि प्रसङ्गा ये च केचन |
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९
शल्य उवाच
नृत्यं सन्दर्शय़न्त्यश्च तथैवाङ्गेषु सौष्ठवम् ||
१५ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
नृत्यगीतपरा नार्यो दिव्यमाल्यविभूषिताः |
८३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६१
धृतराष्ट्र उवाच
नृत्यतां श्रूय़ते तात गणानां सोऽद्य न ध्वनिः ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
नृत्यतीव महाव्यूहः परेषामादधद्भय़म् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
नृत्यतीव रथोपस्थे श्वसनेन समीरितः ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
नृत्यतो रथमार्गेषु धनुर्व्याय़च्छतस्तथा |
४९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
नृत्यतो रथमार्गेषु भीष्मस्य भरतर्षभ |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८१
भीष्म उवाच
नृत्यद्भिरिव कौरव्य मारुतप्रतिमैर्गतौ ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
भीष्म उवाच
नृत्यद्भिर्भूतसङ्घैश्च वर्हिणैश्च समन्ततः ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
नृत्यद्भिर्भय़दैर्व्याप्ता दिशस्तत्राभवन्नृप ||
५३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
नृत्यन्तं रथमार्गेषु धनुर्ज्यातलनिस्वनैः ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
नृत्यन्तमिव चोर्मीभिर्वल्गन्तमिव वाय़ुना ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
नृत्यन्तश्च हसन्तश्च यथा स्वर्गजितस्तथा ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
नृत्यन्ति परिगाय़न्ति वेदय़न्तो महद्भय़म् ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
नृत्यन्ति वै भूतगणाः सन्तृप्ता मांसशोणितैः ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
नृत्यन्निव गदापाणिर्युगान्तं दर्शय़िष्यति ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३९
धृतराष्ट्र उवाच
नृत्यन्निव नरव्याघ्रो रथमार्गेषु वीर्यवान् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
नृत्यन्निव महाराज चापहस्तः प्रतापवान् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
नृत्यन्निव रणे वीर आर्तिं नः समजीजनत् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
नृत्यन्निव रथोपस्थे तद्रक्षः समुपाद्रवत् ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
नृत्यन्निव हि राधेय़श्चापहस्तः प्रतापवान् |
७७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
नृत्यन्निवाचरच्छूरो यथा रथशतं तथा ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
धृतराष्ट्र उवाच
नृत्यन्स रथमार्गेषु सर्वशस्त्रभृतां वरः |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
नृत्यप्रिय़ा च राजेन्द्र शतोलूखलमेखला ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
नृत्यप्रिय़ो नित्यनर्तो नर्तकः सर्वलासकः ||
४९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
नृत्यमान इवाभाति रथचर्यासु मारिष ||
४३ ग
शल्य पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
नृत्यमानं च वहुशो धर्मराजोऽव्रवीदिदम् ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
नृत्यमानमपश्याम नृत्यन्तमिव शङ्करम् ||
५६ ख
वन पर्व
अध्याय १८५
मार्कण्डेय़ उवाच
नृत्यमानमिवोर्मीभिर्गर्जमानमिवाम्भसा ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
नृत्यमानाः व्यदृश्यन्त रङ्गमध्ये विलासिकाः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
नृत्यमानाविव रणे मण्डलीकृतकार्मुकौ |
४१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
नृत्यमाने तु ते सेने समेय़ातां परस्परम् |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
नृत्यवादित्रगीतानामज्ञानाच्छ्रद्दधानता |
२७ ख
सभा पर्व
अध्याय ७
नारद उवाच
नृत्यवादित्रगीतैश्च हास्यैश्च विविधैरपि |
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
नृत्ये गीते च कुशलो देवव्राह्मणपूजितः ||
१७ ख