chevron_left  न्यवारय़न्नरश्रेष्ठंarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़न्नरश्रेष्ठं परिवार्य समन्ततः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़न्महाराज कृपश्च द्विपदां वरः ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८५
भीष्म उवाच
न्यवारय़महं तं च शरजालेन भारत ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़ेतां संरव्धौ दुर्योधनहितैषिणौ ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय २१८
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवारय़ेतां सङ्क्रुद्धौ वाणैर्वज्रोपमैस्तदा ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
न्यवारय़ेतामन्योन्यं कांस्ये निर्भिद्य वर्मणी ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
न्यविशत्कुरुभिः सार्धं हृष्टरूपैः समन्ततः |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
न्यविशत्परमप्रीतः पूज्यमानो महारथैः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
न्यविशन्त कुरुश्रेष्ठ सङ्ग्रामे क्षतविक्षताः ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७७
भीष्म उवाच
न्यविशन्त ततः सर्वे परिगृह्य सरस्वतीम् |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
न्यविशन्त भृशं श्रान्ताश्चिन्तय़न्तो नृपं प्रति ||
६३ ख
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
न्यविशन्त महात्मानः सामात्याः सपदानुगाः ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
न्यविशन्त महाराज पूजय़न्तः परस्परम् ||
५२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
न्यविशन्त यथाकालं गत्वा स्वशिविरं तदा ||
७९ ख
आदि पर्व
अध्याय २०३
नारद उवाच
न्यवेदय़ंस्ततः सर्वमखिलेन पितामहे ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवेदय़त चाभीक्ष्णं विश्वामित्राय़ तं मुनिम् ||
३२ ग
वन पर्व
अध्याय ५१
वृहदश्व उवाच
न्यवेदय़त नस्वस्थां दमय़न्तीं नरेश्वर ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
न्यवेदय़त्केशवाय़ विस्मितः श्वेतवाहनः ||
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवेदय़दमेय़ात्मा कृष्णद्वैपाय़नाय़ वै ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ५७
वृहदश्व उवाच
न्यवेदय़दशेषेण नलामात्येषु मुख्यशः ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
न्यवेदय़द्धृषीकेशमुपय़ातं महात्मने ||
३१ ग
वन पर्व
अध्याय ५७
वृहदश्व उवाच
न्यवेदय़द्भीमसुता न च तत्प्रत्यनन्दत ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
न्यवेदय़द्रथं युक्तं वासवस्येव मातलिः ||
५९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवेदय़द्रथं सज्जं केशवाय़ महात्मने ||
३० ख
स्त्री पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवेदय़न्त नामानि पाण्डवास्तेऽपि सर्वशः ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८२
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवेदय़न्त वेश्मानि रत्नवन्ति महात्मने ||
२७ ख
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
न्यवेदय़न्त सहिता धर्मराजस्य सैनिकाः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
न्यवेदय़न्भय़ं घोरं सज्वालकवलैर्मुखैः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय २८३
मार्कण्डेय़ उवाच
न्यवेदय़न्यथातत्त्वं विद्रुतं च द्विषद्वलम् ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १२४
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवेदय़ेतां तत्सर्वं कुमाराणां विचेष्टितम् ||
३३ ख
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवेशय़त कौरव्यस्तत्र तत्र धनञ्जय़ः ||
६६ ख
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवेशय़त धर्मात्मा वृद्धवालपुरस्कृतम् ||
६९ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
न्यवेशय़न्नामभिः स्वैस्ते देशांश्च पुराणि च |
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६५
भीष्म उवाच
न्यषीदच्च परिश्रान्तः क्लान्तश्च क्षुधितश्च ह ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
न्यषीदत्स रथोपस्थे शोणितेन परिप्लुतः ||
३२ ग
वन पर्व
अध्याय १५८
वैश्रवण उवाच
न्यष्ठीवदाकाशगतो महर्षेस्तस्य मूर्धनि ||
५४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
न्यसेत गुल्मान्दुर्गेषु सन्धौ च कुरुनन्दन |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
न्यसेदमात्यान्नृपतिः स्वाप्तान्वा पुरुषान्हितान् ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय २१४
मार्कण्डेय़ उवाच
न्यस्तं यत्त्रिपुरघ्नेन सुरारिविनिकृन्तनम् ||
२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २०
वासुदेव उवाच
न्यस्तकर्माणमासीनं कीनाशमविचक्षणम् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
न्यस्तदण्डो जितक्रोधः स प्रेत्य लभते सुखम् ||
३० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११४
वृहस्पतिरु उवाच
न्यस्तदण्डो जितक्रोधः स प्रेत्य सुखमेधते ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६८
सञ्जय़ उवाच
न्यस्तदण्डो यथा पार्थ व्राह्मणः संशितव्रतः ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
न्यस्तमात्रस्य तस्याङ्के भुजावभ्यधिकावुभौ |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
शुनःसख उवाच
न्यस्तमाद्यमपश्यद्भिर्यदुक्तं कृतकर्मभिः |
७७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
न्यस्तमानोऽस्मि भक्तोऽस्मि शिष्यस्त्वद्धितकृत्तथा |
६९ क
शल्य पर्व
अध्याय ३१
दुर्योधन उवाच
न्यस्तवर्मा विशेषेण श्रान्तश्चाप्सु परिप्लुतः |
५० क
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
न्यस्तशस्त्रं तु मां राजन्हन्युर्युधि महारथाः ||
७१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
न्यस्तशस्त्रमधर्मेण घातय़ित्वा गुरुं भवान् |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११८
सञ्जय़ उवाच
न्यस्तशस्त्रस्य वालस्य विरथस्य विवर्मणः |
२६ क