सभा पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
स तद्राज्यमवस्थाप्य कुलूतसहितो यय़ौ |
९ क
वन पर्व
अध्याय
५९
वृहदश्व उवाच
स तद्राज्यापहरणं सुहृत्त्यागं च सर्वशः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२६६
मार्कण्डेय़ उवाच
स तद्रामाय़ मेधावी शशंस प्लवगर्षभः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
स तद्रूपं भैरवं भीमकर्मा; भीमं कृत्वा भैमसेनिः पपात |
६१ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स तद्रूपं विहाय़ तक्षकरूपं कृत्वा सहसा धरण्यां विवृतं महाविलं विवेश ||
१३७ ग
वन पर्व
अध्याय
११३
लोमश उवाच
स तद्वचः कृतवानृश्यशृङ्गो; यय़ौ च यत्रास्य पिता वभूव |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०४
भीष्म उवाच
स तद्वचः शत्रुनिवर्हणे रत; स्तथा चकारावितथं वृहस्पतेः |
५२ क
शल्य पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
स तद्वचनमाज्ञाय़ राज्ञो व्राह्मणसत्तमः |
३७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
५
विदुर उवाच
स तद्वनं व्यनुसरन्विप्रधावनितस्ततः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
स तद्वाक्यं तु विज्ञाय़ नारदः पर्वतात्तदा |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
स तद्वाणमय़ं वर्षं शरैरावार्य सर्वतः |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
व्रह्मो उवाच
स तद्विकृष्य भगवान्दिव्यं लोकेश्वरो धनुः |
१२० क
आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
स तद्विनाशसन्त्रासादनुपत्य खगाधिपः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१८९
व्यास उवाच
स तद्विवृत्य शिखरं महागिरे; स्तुल्यद्युतींश्चतुरोऽन्यान्ददर्श |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स तद्वृत्तं तस्याशेषमुपलभ्य प्रीतिमानभूत् ||
९१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४१
भीष्म उवाच
स तद्वैकृतमालक्ष्य देवराजो विशां पते |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
स तद्व्रह्म शुभं याति यस्माद्भूय़ो न विद्यते ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
स तद्व्रह्म शुभं वेत्ति यस्माद्भूय़ो न विद्यते ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
स तन्न ममृषे द्रोणः पाञ्चाल्येनार्दनं मृधे |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
स तन्न ममृषे भीमः शत्रुभिर्वधमाहवे ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
स तन्न ममृषे राजन्पाण्डवेय़स्य विक्रमम् |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
स तन्न ममृषे वीरः शत्रोर्विजय़माहवे |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
व्यास उवाच
स तन्निष्ठस्तपसा धर्ममीड्यं; तद्भक्त्या वै विश्वरूपं ददर्श |
६२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
व्यास उवाच
स तपस्तीव्रमातस्थे मैनाकं गिरिमास्थितः |
५२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९
शल्य उवाच
स तपस्वी मृदुर्दान्तो धर्मे तपसि चोद्यतः |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
स तपोऽतप्यत महन्महावीर्यपराक्रमः ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
स तप्त्वा विपुलं राजंस्तपो वै तपतां वरः |
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
स तप्यमानः पुत्रार्थे लपितामिदमव्रवीत् |
२ क
वन पर्व
अध्याय
१०४
लोमश उवाच
स तप्यमानः सुमहत्तपो योगसमन्वितः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
स तप्यमानो दुष्टात्मा तेषां वाचो न चक्षमे |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
व्यास उवाच
स तप्यमानो वैवर्ण्यं कृशत्वं चागमत्परम् |
३४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
स तमभ्यर्च्य राजानं नाम संश्राव्य चात्मनः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स तमश्वमपानेऽधमत् |
१५७ क
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
स तमाजौ विनिर्जित्य दक्षिणाभिमुखो यय़ौ ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०८
वैशम्पाय़न उवाच
स तमादाय़ कौन्तेय़ो विस्फुरन्तं जलेचरम् |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१९४
मार्कण्डेय़ उवाच
स तमादिश्य तनय़मुत्तङ्काय़ महात्मने |
५ ख
वन पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
स तमानर्च राजेन्द्रो भ्रातृभिः सहितः प्रभुः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
३७
सूत उवाच
स तमालक्ष्य पितरं शृङ्गी स्कन्धगतेन वै |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२९
समुद्र उवाच
स तमाश्रममागम्य राममेवान्वपद्यत ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
स तमाश्वास्य विधिवद्विधानज्ञो महातपाः |
१० क
मौसल पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
स तमासाद्य धर्मज्ञमुपतस्थे महाव्रतम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
स तमास्थाय़ भगवान्राजराजो महारथम् |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
नारद उवाच
स तमुत्सङ्गमारोप्य परिपीडितवक्षसम् |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
स तमुन्माथमारुह्य तदामिषमभक्षय़त् |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स तमुपेत्याशीर्भिरभिनन्द्योवाच |
१०६ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
स तमुवाच |
१५५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
स तमेव ततो हन्ति विषं ग्रस्तमिवातुरम् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६८
भीष्म उवाच
स तमेवाभिजानाति नान्यं भरतसत्तम ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४०
भीष्म उवाच
स तमेवाभिजानाति नान्यं भरतसत्तम ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
स तमोनुद इत्युक्तस्तत्त्वज्ञैर्वेदपारगैः |
२४ क