chevron_left  दुर्योधनश्चarrow_drop_down
वन पर्व
अध्याय २३०
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनश्च कर्णश्च शकुनिश्चापि सौवलः |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय १९७
विदुर उवाच
दुर्योधनश्च कर्णश्च शकुनिश्चापि सौवलः |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३९
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनश्च किं कृत्यं प्राप्तकालममन्यत ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३०
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनश्च किं कृत्यं प्राप्तकालममन्यत ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्च द्रोणश्च शकुनिर्दुर्मुखो जय़ः |
५४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्च नृपतिर्धृतराष्ट्रसुतोऽभवत् ||
२ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनश्च नृपतिर्भ्रातृभिः परिवारितः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्च पुत्रस्ते दुर्मुखो दुःसहः शलः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनश्च भीमश्च कुरूणामभ्यगच्छताम् ||
४० ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ५
अश्वत्थामो उवाच
दुर्योधनश्च भीमेन समेत्य गदय़ा मृधे |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनश्च मन्दात्मा राजा किमकरोत्तदा ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्च महता शरवर्षेण माधवम् |
५ क
विराट पर्व
अध्याय ६३
युधिष्ठिर उवाच
दुर्योधनश्च राजेन्द्र तथान्ये च महारथाः ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्च विंशत्या कर्णशल्यौ त्रिभिस्त्रिभिः ||
५२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्च विंशत्या शकुनिश्चापि पञ्चभिः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्च संमूढो भ्रातृव्यसनदुःखितः ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्च सङ्क्रुद्धः शरवर्षैरवाकिरन् ||
२५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्चतुःषष्ट्या शल्यश्च नवभिः शरैः ||
२४ ख
विराट पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनश्चापि तमुग्रतेजाः; पार्थश्च दुर्योधनमेकवीरः |
६ क
वन पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनश्चापि महीं प्रशास्ति; न चास्य भूमिर्विवरं ददाति |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्चित्रसेनो दुःशासनविविंशती |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनसमादिष्टा मदर्थे त्यक्तजीविताः |
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनसमादिष्टाः कुञ्जरैः पर्वतोपमैः |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनसमादिष्टाः के वीराः पर्यवारय़न् ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनसमादिष्टाः सोदर्याः सप्त मारिष |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनसमादिष्टान्राज्ञः सर्वान्समभ्ययुः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनसमादिष्टौ तं देशमुपजग्मतुः ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनसमादेशं श्रुत्वा न क्रोद्धुमर्हसि ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनसमीपे तानासनस्थान्ददर्श सः ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५४
दुर्योधन उवाच
दुर्योधनसमो नास्ति गदाय़ामिति निश्चय़ः |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५४
दुर्योधन उवाच
दुर्योधनसमो नास्ति गदाय़ामिति निश्चय़ः ||
३९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनसमो नास्ति गदय़ा इति वीर्यवान् ||
२६ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनसहाय़ाश्च राक्षसाः परिकीर्तिताः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनसहाय़ास्ते पौलस्त्या भरतर्षभ ||
८३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
दुर्योधनसुता यादृगभवद्वरवर्णिनी ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनसुताः सर्वे तथा दुःशासनस्य च |
१९ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
जनमेजय़ उवाच
दुर्योधनसुताश्चैव शकुनिश्चैव सौवलः ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
दुर्योधनस्तं च वेद पीडितं पाण्डवं रणे |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्ततो भीष्ममव्रवीद्भृशपीडितः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्ततो राजन्नभ्यभाषत दुर्मुखम् ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्ततोऽभ्येत्य तावुभावभ्यवारय़त् ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनस्तथा वीरो राजा च रथिनां वरः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्तदा राजा आर्श्यशृङ्गिमभाषत ||
२१ ग
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्तदा सूतमव्रवीदुत्स्मय़न्निव ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
भीष्म उवाच
दुर्योधनस्तदासीनः सर्वं पित्रे न्यवेदय़त् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्तव क्रोधाद्देवि त्यक्ष्यति जीवितम् |
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनस्तव सुतः प्रविष्टो ह्रदमित्युत ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय १०
व्यास उवाच
दुर्योधनस्तव सुतः शमं गच्छतु पाण्डवैः ||
२३ ख
विराट पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनस्तस्य तु तन्निशम्य; पितामहस्यात्महितं वचोऽथ |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४
नारद उवाच
दुर्योधनस्तु कर्णेन पाल्यमानोऽभ्ययात्तदा |
२१ क