द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
ततः सुदर्शनं वीरं पुत्रं ते भरतर्षभ |
९९ क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः सुदीर्घं गत्वा तु प्लवमानो नराधिप |
८० क
वन पर्व
अध्याय
६५
वृहदश्व उवाच
ततः सुदेवमानाय़्य राजमाता विशां पते |
३४ क
विराट पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सुदेष्णामनुमन्त्र्य कीचक; स्ततः समभ्येत्य नराधिपात्मजाम् |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
ततः सुनाभं वसुदेवपुत्रः; सूर्यप्रभं वज्रसमप्रभावम् |
८६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
ततः सुनिशितं भल्लं शैनेय़ः कृतवर्मणे |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
ततः सुनिशितान्पीतान्समादत्त शिलीमुखान् |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
ततः सुनिशितैर्वाणै राज्ञस्तस्य महच्छिरः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
ततः सुनिशितैर्वाणैः पार्थं विव्याध सप्तभिः |
३८ क
शल्य पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
ततः सुनिशितैर्वाणैर्दशभिः शिनिपुङ्गवः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
२०१
नारद उवाच
ततः सुन्दोपसुन्दौ तौ भ्रातरौ दृढविक्रमौ |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२७४
मातलिरु उवाच
ततः सुपत्रं सुमुखं हेमपुङ्खं शरोत्तमम् |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
३०
सूत उवाच
ततः सुपर्णः परमप्रहृष्टवा; न्विहृत्य मात्रा सह तत्र कानने |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
२१
सूत उवाच
ततः सुपर्णमाता तामवहत्सर्पमातरम् |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
ततः सुपर्णाः सम्पेतुर्भक्षय़न्तो भुजङ्गमान् |
२६ क
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सुपार्श्वमभितस्तथा राजपतिं क्रथम् |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
ततः सुपुङ्खैर्निशितै रथश्रेष्ठो रथेषुभिः |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सुभद्रा सौभद्रं केशवस्य प्रिय़ा स्वसा |
५८ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
ततः सुमनसः पार्था भीमसेनमपूजय़न् |
५६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
ततः सुमनसः पार्था हते तस्मिन्निशाचरे |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
२७७
मार्कण्डेय़ उवाच
ततः सुमनसः शेषाः प्रतिगृह्य महात्मनः |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
ततः सुमुक्तैर्दशभिर्जघान; सभापतिं काञ्चनवर्मनद्धम् ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सुराः सगन्धर्वा यक्षराक्षसपन्नगाः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
९८
लोमश उवाच
ततः सुरास्ते जगृहुः परासो; रस्थीनि तस्याथ यथोपदेशम् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६४
भीष्म उवाच
ततः सुरुचिरं दृष्ट्वा स्पृहालग्नेन चक्षुषा |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
१७
सूत उवाच
ततः सुरैर्विजय़मवाप्य मन्दरः; स्वमेव देशं गमितः सुपूजितः |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
ततः सुलोचनं भीमः क्षुरप्रेण महामृधे |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
ततः सुवर्णपृष्ठानां धनुषां कूजतां रणे |
९१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
ततः सुवलदाय़ादं कालकेय़मपोथय़त् |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
ततः सुवलपुत्रस्य नागानतिवलान्पुनः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
ततः सुवाहुस्त्रिंशद्भिरद्रिसारमय़ैर्दृढैः |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सुशर्मा त्रैगर्तः सह भ्रात्रा यवीय़सा |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
ततः सुशर्मा दशभिः सुरथश्च किरीटिनम् |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
ततः सुशर्मा राजेन्द्र गृहीतां वीक्ष्य वाहिनीम् |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सुषुविरे राजन्क्षत्रिय़ान्वीर्यसंमतान् |
७ ख
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सुसम्भ्रान्तमना वभूव कुरुनन्दनः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०६
मुनिरु उवाच
ततः सुहृद्वलं लव्ध्वा मन्त्रय़ित्वा सुमन्त्रितम् |
१० क
सभा पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सुह्मांश्च चोलांश्च किरीटी पाण्डवर्षभः |
२० क
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सुह्मान्प्राच्यसुह्मान्समक्षांश्चैव वीर्यवान् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
ततः सुय़ोधनो दृष्ट्वा हतमाधिरथिं त्वय़ा |
९० क
वन पर्व
अध्याय
५६
वृहदश्व उवाच
ततः सूत उपागम्य दमय़न्त्यै न्यवेदय़त् |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
ततः सूतः स मेऽत्यर्थं कश्मलं प्राविशन्महत् |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
ततः सूतव्यसनिनं विप्लुतं मां स भार्गवः |
७ क
सभा पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सूतस्तस्य वशानुगामी; भीतश्च कोपाद्द्रुपदात्मजाय़ाः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
ततः सूते हते राजन्क्षिपतस्तस्य मे शरान् |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
ततः सूतोऽजहात्प्राणान्रामवाणप्रपीडितः |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सूर्यान्निश्चरितां कर्णः शुश्राव भारतीम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
२८६
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सूर्याय़ जप्यान्ते कर्णः स्वप्नं न्यवेदय़त् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
ततः सूर्यो मधुरय़ा वाचा तमिदमव्रवीत् |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सूर्योदय़े धौम्यः कृत्वाह्निकमरिन्दम |
१ क