आदि पर्व
अध्याय
१७५
व्राह्मणा ऊचुः
नटा वैतालिकाश्चैव नर्तकाः सूतमागधाः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
नटाश्च नर्तकाश्चैव मल्ला माय़ाविनस्तथा |
५८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
नदतः पाञ्चजन्यस्य रसतो गाण्डिवस्य च |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
नदतः सीदतश्चान्यान्विमुखान्समरे गजान् |
४८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
नदतस्तस्य शव्देन पृथिवी सागराम्वरा |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
नदतां काननान्तेषु श्रूय़न्ते विविधाः स्वनाः |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
नदतोऽर्जुन सङ्ग्रामे वीरस्य जितकाशिनः ||
६९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
नदत्सु धार्तराष्ट्रेषु विजय़स्य रथं प्रति ||
३६ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
नदद्भिश्च महानागैर्हेषमाणैश्च वाजिभिः |
४ क
विराट पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
नदद्भिश्च महानागैर्हेषमाणैश्च वाजिभिः |
३ क
मौसल पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
नदन्तं पाञ्चजन्यं च वृष्ण्यन्धकनिवेशने |
१५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
नदन्तं विस्फुरन्तं च पशुमारममारय़त् ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९७
वैशम्पाय़न उवाच
नदन्तः प्रय़युस्तेषामनीकानि सहस्रशः ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
नदन्तः सिंहनादांश्च धमन्तश्चापि वारिजान् |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
नदन्तश्चाह्वय़न्तश्च प्रवल्गन्तश्च मारिष ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
गृध्र उवाच
नदन्ति परुषं श्येनाः शिवाः क्रोशन्ति दारुणाः |
९४ क
वन पर्व
अध्याय
२१
वासुदेव उवाच
नदन्तो भैरवान्नादन्निपतन्ति स्म दानवाः ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
नदन्तो भैरवान्नादांस्त्रासय़न्तश्च भूमिमाम् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
नदन्तो भैरवान्नादाञ्जलदोपमनिस्वनान् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
नदन्तो विविधान्नादांस्तूर्यस्वनविमिश्रितान् |
७६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
नदन्तो विविधान्नादान्मेघा इव सविद्युतः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
नदन्नादान्विविधान्भैरवांश्च; प्राणानिष्टांस्त्याजितः शक्रशक्त्या ||
५८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
नदन्नार्तस्वरं प्राणानुत्ससर्ज महाद्विपः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
नदन्यथा वज्रधरस्तपान्ते; ज्वलन्यथा जलदान्ते च सूर्यः |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
नदी च राजन्वत्सेषु कन्या चैवाभवत्तदा ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
नदी ते च नगा हृद्याः फलपुष्पोपशोभिताः ||
९४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
नदी भविष्यसि शुभे कुटिला वार्षिकोदका ||
३४ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
नदी भीमरथी चैव वाहुदा च महानदी |
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
मुनिरु उवाच
नदी मधुरपानीय़ा यथा राजंस्तथा भवान् |
४६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९९
इन्द्र उवाच
नदी योधमहाय़ज्ञे तदस्यावभृथं स्मृतम् ||
३४ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
नदी वैतरणी चैव कूटशाल्मलिना सह ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
नदी सुघोरा नरदेहफेना; प्रवर्तिता तत्र रणाजिरे वै ||
१२१ ख
वन पर्व
अध्याय
१८५
मार्कण्डेय़ उवाच
नदीं गङ्गां तत्र चैनं स्वय़ं प्राक्षिपदच्युतः ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
नदीं गोदावरीं रम्यामाश्रित्य न्यवसत्तदा ||
४० ख
आदि पर्व
अध्याय
२०७
वैशम्पाय़न उवाच
नदीं चोत्पलिनीं रम्यामरण्यं नैमिषं प्रति ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
नदीं ताम्रां च वेण्णां च पुण्यतोय़ां शुभावहाम् |
९५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
नदीं दुर्गह्रदां तीर्णः कामक्रोधावुभौ जय़ेत् ||
५७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
नदीं प्रवर्तय़ामास रक्षोगणसमाकुलाम् |
३० क
विराट पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
नदीं प्रस्यन्दय़िष्यामि परलोकप्रवाहिनीम् ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
नदीं प्रावर्तय़द्राजन्भीरूणां भय़वर्धिनीम् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
नदीं प्रावर्तय़न्वीराः परलोकप्रवाहिनीम् ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
नदीं वेत्रवतीं चैव कृष्णवेणां च निम्नगाम् |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
नदीः पिवन्ति वहुला गङ्गां सिन्धुं सरस्वतीम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
२८०
मार्कण्डेय़ उवाच
नदीः पुण्यवहाश्चैव पुष्पितांश्च नगोत्तमान् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
नदीः पुष्करिणीश्चैव ददृशुः समलङ्कृताः ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
नदीः प्रवर्तय़ामासुर्यमराष्ट्रविवर्धनीः ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२८
सूत उवाच
नदीः समापीय़ मुखैस्ततस्तैः; सुशीघ्रमागम्य पुनर्जवेन ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
वृहदश्व उवाच
नदीः सरांसि वापीश्च विविधांश्च मृगद्विजान् ||
६ ग
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
नदीकच्छोद्भवं कान्तमुच्छ्रितध्वजसंनिभम् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
१०७
लोमश उवाच
नदीकुञ्जनितम्वैश्च सोदकैरुपशोभितम् |
६ क