आदि पर्व
अध्याय
२८
सूत उवाच
ननाद चोच्चैर्वलवान्महामेघरवः खगः |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
ननाद नादं सुमहानुभावो; विद्ध्वेव शक्रं नमुचिः पुरा वै ||
५७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
ननाद भैरवं नादं भीषय़न्सर्वपार्थिवान् ||
७७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
ननाद मुदितो द्रौणिर्महामेघौघनिस्वनः ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवन्नादं कम्पय़न्निव रोदसी ||
३४ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवन्नादं कर्णस्य भय़मादधत् ||
५७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवन्नादं जिघांसुस्तान्सुदुर्जय़ान् ||
४७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवन्नादं तिष्ठ तिष्ठेति चाव्रवीत् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवन्नादं नादय़न्वै नभस्तलम् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवन्नादं नादय़ानो नभस्तलम् ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवन्नादं पुनर्विव्याध चोरसि ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवन्नादं भगदत्तः प्रतापवान् ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवन्नादं विव्याध च शितैः शरैः ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवन्नादं विव्याध दशभिः शरैः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवन्नादं सौभद्रः परवीरहा ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवान्कर्णः पार्थाय़ विसृजञ्शरान् ||
५७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
ननाद वलवान्कार्ष्णिर्भीष्माय़ विसृजञ्शरान् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
ननाद विविधान्नादान्वाहिन्याः प्रमुखे स्थितः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
ननाद शकुनी राजंस्तपान्ते जलदो यथा ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१८
वासुदेव उवाच
ननाद सिंहनादं वै नादेनापूरय़न्महीम् ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५५
सञ्जय़ उवाच
ननाद सिंहवन्नादं व्यथय़न्निव भारत |
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
ननाद सुमहन्नादं तत्सैन्यं प्रत्यपूरय़त् ||
६७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
ननाद सुमहन्नादं भीषय़न्वै ननर्द च ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३५
सञ्जय़ उवाच
ननाद सुमहानादं तपान्ते जलदो यथा ||
५२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
ननाद सुमहानादं द्रोणपुत्रो महावलः ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
ननाद सुमहानादं पर्जन्यनिनदोपमम् ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
ननाद सुमहानादं वलवान्सूतनन्दनः |
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
ननाद सुमहानादं विस्फोटमशनेरिव ||
६५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
ननादार्जुनदाय़ादः प्रेक्षमाणो जय़द्रथम् ||
७० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
ननु तत्रापि पार्थेन भीमेन च महात्मना |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५७
सञ्जय़ उवाच
ननु तव वसुधा नरेन्द्र सर्वा; सगिरिसमुद्रवना वशं व्रजेत ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
५५
वृहदश्व उवाच
ननु तस्या भवेन्न्याय़्यं विपुलं दण्डधारणम् ||
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
ननु त्वं पुण्डरीकाक्ष सत्यवाग्भुवि विश्रुतः |
७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७९
वैशम्पाय़न उवाच
ननु त्वमार्ये धर्मज्ञा त्रैलोक्यविदिता शुभे |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७९
वैशम्पाय़न उवाच
ननु त्वमार्ये धर्मज्ञा ननु चासि पतिव्रता |
४ क
सभा पर्व
अध्याय
३४
शिशुपाल उवाच
ननु त्वय़ापि वोद्धव्यं यां पूजां माधवोऽर्हति ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१९१
वैशम्पाय़न उवाच
ननु देवकीपुत्रेणापि कृष्णेन नरके मज्जमानो राजर्षिर्नृगस्तस्मात्कृच्छ्रात्समुद्धृत्य पुनः स्वर्गं प्रतिपादित इति ||
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३४८
नाग उवाच
ननु नागा महावीर्याः सौरसेय़ास्तरस्विनः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
ननु नाम त्वय़ा कार्या दय़ा भूतेषु जानता |
७५ क
आदि पर्व
अध्याय
११६
वैशम्पाय़न उवाच
ननु नाम त्वय़ा माद्रि रक्षितव्यो जनाधिपः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
ननु नाम त्वय़ा मोक्षः कृत्स्नः पञ्चशिखाच्छ्रुतः |
१६३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
ननु नाम त्वय़ा वीर दीर्यमाणा भय़ार्दिता |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७९
वैशम्पाय़न उवाच
ननु नाम त्वय़ा वीर धर्मराजस्य यज्ञिय़ः |
१० क
वन पर्व
अध्याय
६०
वृहदश्व उवाच
ननु नाम महाराज धर्मज्ञः सत्यवागसि |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
ननु नाम रणे शत्रुमजित्वा न निवर्तसे ||
३२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
ननु नाम स वैराटि श्रुत्वा मम गिरं पुरा |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११८
सञ्जय़ उवाच
ननु नाम स्वधर्मज्ञस्त्वं लोकेऽभ्यधिकः परैः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
ननु नामाङ्कमारोप्य स्नेहाद्ग्रामान्तरं गताः |
६० क
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
ननु नामाहमश्रौषं वचनं तव पुत्रक |
१५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
ननु रामोऽव्रवीद्राजंस्त्वां सदा यदुनन्दनः |
२६ क