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द्रोण पर्व
अध्याय ८
धृतराष्ट्र उवाच
ननु रुक्मरथं दृष्ट्वा प्रद्रवन्ति स्म पाण्डवाः |
२३ क
सभा पर्व
अध्याय १४
कृष्ण उवाच
ननु स्म मागधं सर्वे प्रतिवाधेम यद्वय़म् ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय १७२
वैशम्पाय़न उवाच
ननृतुः सङ्घशश्चैव राजन्नप्सरसां गणाः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
ननृतुर्देवगन्धर्वाः षट्सहस्राणि सप्तधा ||
६८ ख
आदि पर्व
अध्याय २११
वैशम्पाय़न उवाच
ननृतुर्नर्तकाश्चैव जगुर्गानानि गाय़नाः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१६
शक्र उवाच
ननृतुर्यत्र गन्धर्वाः षट्सहस्राणि सप्तधा ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
ननृतुर्वै महाभागा जगुश्चाय़तलोचनाः ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
ननृतुश्चाप्सरःसङ्घास्तत्र तत्र समन्ततः ||
१३ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
नन्दकं च त्रिभिर्वाणैः प्रत्यविध्यत्स्तनान्तरे ||
११ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
नन्दकस्तव पुत्रस्तु भीमसेनं महावलम् |
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १७७
धृष्टद्युम्न उवाच
नन्दको वाहुशाली च कुण्डजो विकटस्तथा ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
नन्दनं कौरवेन्द्राणां द्रौणेर्लक्षणमुच्छ्रितम् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
नन्दनं च वनं दिव्यमप्सरोगणसेवितम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय १६४
अर्जुन उवाच
नन्दनादीनि देवानां वनानि वहुलान्युत |
४१ क
वन पर्व
अध्याय २४७
देवदूत उवाच
नन्दनादीनि पुण्यानि विहाराः पुण्यकर्मणाम् |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
अङ्गिरा उवाच
नन्दने सेव्यते दान्तस्त्वप्सरोभिरहिंसकः ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६३
भीष्म उवाच
नन्दनोद्देशसदृशं यक्षकिंनरसेवितम् ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
नन्दा चापरनन्दा च तथा तीर्थं महाह्रदम् |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय २०७
वैशम्पाय़न उवाच
नन्दामपरनन्दां च कौशिकीं च यशस्विनीम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय १०९
वैशम्पाय़न उवाच
नन्दामपरनन्दां च नद्यौ पापभय़ापहे ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय १०९
लोमश उवाच
नन्दामभिगतान्देवान्पुरा राजन्निति श्रुतिः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८८
भीष्म उवाच
नन्दामि वः प्रभावेन पुत्राणामिव चोदय़े |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
नन्दामि सौम्य भद्रं ते यो मां जीवन्तमिच्छसि |
६६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
नन्दाश्रमे महाराज ततोलूकाश्रमे शुभे |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
नन्दिकः कर्णवेष्टश्च सिद्धार्थः कीटकस्तथा |
५५ क
वन पर्व
अध्याय २६१
मार्कण्डेय़ उवाच
नन्दिग्रामेऽकरोद्राज्यं पुरस्कृत्यास्य पादुके ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
नन्दिनीं सम्प्रय़च्छस्व भुङ्क्ष्व राज्यं महामुने ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
नन्दिन्यां च समासाद्य कूपं त्रिदशसेवितम् |
१३४ क
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
नन्दिषेणं लोहिताक्षं घण्टाकर्णं च संमतम् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
नन्दी च भगवांस्तत्र देवस्यानुमते स्थितः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
नन्दी तु भार्या हर्षस्य यत्र लोकाः प्रतिष्ठिताः ||
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
नन्दीश्वरश्च नन्दी च नन्दनो नन्दिवर्धनः |
७३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
नन्दोपनन्दौ समरे प्रापय़द्यमसादनम् ||
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
नन्दय़न्पाण्डवान्सर्वान्व्यथय़ंश्चापि तावकान् ||
४४ ख
वन पर्व
अध्याय २३८
वैशम्पाय़न उवाच
नन्दय़न्सुहृदः सर्वाञ्शात्रवांश्चावभर्त्सय़न् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
नन्दय़न्सुहृदः सर्वान्राजानं च युधिष्ठिरम् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
नन्दय़ामास सुहृदो मय़ं जित्वेव वासवः ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
नन्दय़िष्यत्यमित्राणि फल्गुनेन निपातितः ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
नन्दय़िष्यामि दाशार्ह कुरुराजं सुय़ोधनम् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
नन्दय़ैतान्महाराज मत्तानिव महाद्विपान् |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
नन्वहं कृष्ण भीष्मस्य धृतराष्ट्रस्य चोभय़ोः |
३० क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
नन्वहं कृष्ण भीष्मस्य धृतराष्ट्रस्य चोभय़ोः |
५७ क
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
नन्वहं परिरभ्यैकः प्रीतिपूर्वमिदं वचः |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय ७८
शुक्र उवाच
नन्वहं प्रत्यवेक्ष्यस्ते मदधीनोऽसि पार्थिव |
३५ क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
नन्विमे धनुषि श्रेष्ठा अजेय़ा युधि शात्रवैः |
६७ क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
नन्विमे शरणं प्राप्तान्न त्यजन्ति कदाचन |
६३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४५
भीष्म उवाच
नप्ता विदेहराजस्य जनकस्य महात्मनः ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
नभः पफालाथ ननाद चोर्वी; ववुश्च वाताः परुषातिवेलम् |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
नभः सचन्द्रतारं च नक्षत्राणि ग्रहांस्तथा |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३३
अर्जुन उवाच
नभःस्पृशं दीप्तमनेकवर्णं; व्यात्ताननं दीप्तविशालनेत्रम् |
२४ क