स्त्री पर्व
अध्याय
५
विदुर उवाच
नभःस्पृशैर्महावृक्षैः परिक्षिप्तं महावनम् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादय़त् ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादय़न् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
नभश्चन्द्रश्च सूर्यश्च त्वय़ि सर्वं प्रतिष्ठितम् ||
५० ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१७५
भीष्म उवाच
नभश्चोर्ध्वं शिरस्तस्य क्षितिः पादौ दिशो भुजौ |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
नभश्च्युतमिवादित्यं पतितं धरणीतले ||
४ ख
मौसल पर्व
अध्याय
९
अर्जुन उवाच
नभसः पतनं चैव शैत्यमग्नेस्तथैव च ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
१६८
अर्जुन उवाच
नभसः प्रच्युता धारास्तिग्मवीर्याः सहस्रशः |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४२
व्राह्मणा ऊचुः
नभसीव यथाभ्राणि व्यराजन्त नराधिप |
१७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
नभसीवान्वदृश्यन्त ग्रहास्तन्वभ्रसंवृताः ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
नभस्तलगताश्चैव देवगन्धर्वदानवाः |
५३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
नभस्यन्तर्दधे सूर्यः सैन्येन रजसावृतः ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
नभो जलधरैर्हीनं साङ्गारक इवांशुमान् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
नभो महति संय़ुक्तं महद्वुद्धौ च संश्रितम् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
नभो वहति लोकेश रजसः परमां गतिम् |
७३ क
वन पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
नभो वितिमिरं कुर्वञ्जलदान्पाटय़न्निव |
३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
नभोंऽशुकमिवाभाति प्रेक्षणीय़ं समन्ततः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
नभोगताः शक्तिविषक्तहस्ता; मेघा व्यमुञ्चन्निव वृष्टिमार्गम् ||
३५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
नभोगतौ यथा राजंश्चन्द्रसूर्यौ दिनक्षय़े ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
नम इत्येव कृष्णाय़ प्रणाममकरोत्तदा ||
६४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३३
अर्जुन उवाच
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते; नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व |
४० क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
नमः सदास्मै जगदीश्वराय़; लोकत्रय़ेशाय़ पुरन्दराय़ ||
१५३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
नमः सहस्रशिरसे सहस्रभुजमन्यवे |
५७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
नमः स्तुताय़ स्तुत्याय़ स्तूय़मानाय़ मृत्यवे |
४६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
नमः स्वधास्वरूपाय़ वहुरूपाय़ दंष्ट्रिणे ||
२४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३२५
नारद उवाच
नमः १७१ ||
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
नमश्चकार रुद्राय़ वहु मेने च केशवम् ||
९१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
नमश्चकार हृष्टात्मा परमं परमेश्वरम् ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
नमस्कारप्रय़ुक्तेन तेन प्रीय़न्ति देवताः |
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५५
तुलाधार उवाच
नमस्कारेण हविषा स्वाध्याय़ैरौषधैस्तथा |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२२०
मार्कण्डेय़ उवाच
नमस्कार्यं सदैवेह वालानां हितमिच्छता ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
नमस्कार्यास्त्वय़ा विप्रा वर्तमाना यथातथम् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
नमस्कुरुष्व कौन्तेय़ तस्मै शान्ताय़ वै सदा |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४४
कर्ण उवाच
नमस्कुर्वन्ति च सदा वसवो वासवं यथा ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
शल्य उवाच
नमस्कृतः सर्वभूतैः सर्वभूतानि सान्त्वय़न् |
४१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८०
भीष्म उवाच
नमस्कृत्य च देवेभ्यो व्राह्मणेभ्यश्च भारत |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
नमस्कृत्य वृषाङ्काय़ साधु साध्वित्यथाव्रुवन् ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
नमस्कृत्य हृषीकेशं चराचरगुरुं हरिम् ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
नमस्कृत्वा कुमाराय़ सेनान्ये शक्तिपाणय़े |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३८
वैशम्पाय़न उवाच
नमस्कृत्वा तु गुरवे व्यासाय़ामिततेजसे |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
नमस्कृत्वा तु स प्राह देवदेवाय़ सुव्रत |
११ क
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
नमस्कृत्वा त्रिनेत्राय़ शर्वाय़ामिततेजसे |
४१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
नमस्कृत्वा पितुस्तेऽहं पाराशर्याय़ धीमते |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
व्यास उवाच
नमस्कृत्वा भगवते जग्मुर्देशान्यथेप्सितान् ||
७९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
नमस्कृत्वा भूय़ एवाह कृष्णं; सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
भीष्म उवाच
नमस्कृत्वा महादेवमिदं वचनमव्रवीत् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
२०१
व्याध उवाच
नमस्कृत्वा व्राह्मणेभ्यो व्राह्मीं विद्यां निवोध मे ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
नमस्कृत्वा शान्तनवाय़ राज्ञे; द्रोणाय़ाथो सहपुत्राय़ चैव |
८४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
नमस्कृत्वोपजग्मुस्ते लोकवृद्धं पितामहम् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
उशनो उवाच
नमस्तस्मै भगवते देवाय़ प्रभविष्णवे |
१ क