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द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
नमस्तस्मै सुपूज्याय़ गौतमाय़ापलाय़िने |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
नमस्तस्मै सुरेशाय़ यस्य वैश्रवणः सखा |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१७
वलिरु उवाच
नमस्तस्यै दिशेऽप्यस्तु यस्यां वैरोचनो वलिः |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
नमस्ते कृष्णवासाय़ कृष्णकुञ्चितमूर्धजे |
१५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
नमस्ते त्रिषु लोकेषु नमस्ते परतस्त्रिषु |
५६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
नमस्ते त्रिषु लोकेषु नमस्ते परतस्त्रिषु |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
नमस्ते दिक्षु सर्वासु त्वं हि सर्वपराय़णम् ||
५६ ख
आदि पर्व
अध्याय २१
सूत उवाच
नमस्ते देवदेवेश नमस्ते वलसूदन |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ७६
देवय़ान्यु उवाच
नमस्ते देहि मामस्मै नान्यं लोके पतिं वृणे ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
नमस्ते पुण्डरीकाक्ष पुनः पुनररिन्दम ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
नमस्ते भगवन्देव नमस्ते भक्तवत्सल |
१६३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
नमस्ते भगवन्विष्णो लोकानां निधनोद्भव |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
नमस्ते भगवन्विष्णो लोकानां प्रभवाप्यय |
५७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
नमस्ते वज्रहस्ताय़ पिङ्गलाय़ारुणाय़ च |
१५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
नमस्ते व्रह्महृदय़ नमस्ते मम पूर्वज |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११९
कीट उवाच
नमस्तेऽस्तु महाप्राज्ञ किं करोमि प्रशाधि माम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
नमस्तेऽस्तु हृषीकेश महापुरुषपूर्वज |
४० क
उद्योग पर्व
अध्याय १३
शल्य उवाच
नमस्य सा तु व्रह्माणं कृत्वा शिरसि चाञ्जलिम् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१३
भीष्म उवाच
नमस्यः सर्वभूतानां दान्तो भवति ज्ञानवान् ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३५
भीष्म उवाच
नमस्यः सर्वभूतानामतिथिः प्रसृताग्रभुक् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३१
श्रीभगवानु उवाच
नमस्यन्तश्च मां भक्त्या नित्ययुक्ता उपासते ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
नमस्यन्ति प्रभुं शान्तं पर्वताः सागरा दिशः ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
नमस्यन्ति महाराज वाङ्मनःकर्मभिर्विभुम् |
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
नमस्यश्चैव मान्यश्च सर्वप्राणिभिरीश्वरः ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६७
भीष्म उवाच
नमस्येय़ुश्च तं भक्त्या शिष्या इव गुरुं सदा |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
नमस्व देवं प्रय़तो विश्वेशं हरमव्ययम् ||
७१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
श्रीभगवानु उवाच
नमस्व हव्यदं विष्णुं तथा शरणदं नम |
२९ क
वन पर्व
अध्याय १६५
अर्जुन उवाच
नमुचिं वलवृत्रौ च प्रह्लादनरकावपि ||
१८ ग
आदि पर्व
अध्याय २१
सूत उवाच
नमुचिघ्न नमस्तेऽस्तु सहस्राक्ष शचीपते ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
नमुचिर्वासवाद्भीतः सूर्यरश्मिं समाविशत् |
२९ क
वन पर्व
अध्याय २७६
मार्कण्डेय़ उवाच
नमुचिश्चैव दुर्धर्षो दीर्घजिह्वा च राक्षसी ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५
व्यास उवाच
नमुचेर्विश्वरूपस्य निहन्ता त्वं वलस्य च ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
नमो देवातिदेवाय़ धन्विने चातिमन्यवे |
४५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
नमो देवाधिदेवाय़ महादेवाय़ वै नमः |
१५० क
उद्योग पर्व
अध्याय १३५
कुन्त्यु उवाच
नमो धर्माय़ महते धर्मो धारय़ति प्रजाः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५६
भीष्म उवाच
नमो धर्माय़ महते नमः कृष्णाय़ वेधसे |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
नमो धर्माय़ महते नमः कृष्णाय़ वेधसे |
६ क
वन पर्व
अध्याय ३१
द्रौपद्यु उवाच
नमो धात्रे विधात्रे च यौ मोहं चक्रतुस्तव |
१ क
वन पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
नमो धात्रे विधात्रे च स्वस्ति गच्छ ह्यनामय़म् |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
नमो नमस्ते सेव्याय़ भूतानां प्रभवे सदा |
५५ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
नमो नमस्तेऽस्तु विभो तत इत्यव्रुवन्भवम् ||
४४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३३
अर्जुन उवाच
नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः; पुनश्च भूय़ोऽपि नमो नमस्ते ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
नमो भगवते कृत्वा समाहितमना नरः ||
१०२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
वैशम्पाय़न उवाच
नमो भगवते तस्मै व्यासाय़ामिततेजसे |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
नमो भवाय़ शर्वाय़ रुद्राय़ वरदाय़ च |
४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
नमो विश्वस्य पतय़े महतां पतय़े नमः ||
५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५५
तुलाधार उवाच
नमो व्राह्मणय़ज्ञाय़ ये च यज्ञविदो जनाः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
नमो हिरण्यवर्णाय़ हिरण्यकवचाय़ च |
५८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
श्रीभगवानु उवाच
नमोऽतिय़शसे तस्मै देहिनां परमात्मने |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
नमोऽस्तु ते शाश्वत सर्वय़ोने; व्रह्माधिपं त्वामृषय़ो वदन्ति |
३० क