कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
नमोऽस्तु ते ससैन्याय़ त्र्यम्वकाय़ोग्रतेजसे |
५१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
नमोऽस्तु त्रिपुरघ्नाय़ भगघ्नाय़ च वै नमः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
नमोऽस्तु वहुरूपाय़ नमश्च वहुधन्विने ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
नमोऽस्तु वाचस्पतय़े प्रजानां पतय़े नमः |
५६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
नमोऽस्तु स्थाणवे नित्यं सुव्रताय़ सुधन्विने |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
नर इन्द्रस्य सङ्ग्रामे हत्वा शत्रून्परन्तपः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
च्यवन उवाच
नरं समूलं दहति कक्षमग्निरिव ज्वलन् ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
नरः करोत्यकार्याणि परार्थे लोभमोहितः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८९
भीष्म उवाच
नरः कुरुकुलश्रेष्ठ श्रद्धादमपुरःसरः ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११३
वृहस्पतिरु उवाच
नरः कृत्वाप्यकार्याणि तदा धर्मेण युज्यते ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
नरः प्रजापतिर्वीरः पूर्वदेवः सनातनः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
नरः प्रतिग्राह्य महीं न याति यमसादनम् ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
नरकं घोररूपं च भ्रातुर्ज्येष्ठस्य वै वधात् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०४
चण्डाल उवाच
नरकं त्रिंशतं प्राप्य श्वविष्ठामुपजीवति ||
१४ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
नरकं पतिताः पार्थाः सर्वे षण्ढतिलोपमाः ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
नरकं पातिताः पार्था दीर्घकालमनन्तकम् |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
नरकं प्रतिपत्स्यामि ध्रुवं गुरुवधार्दितः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४८
भीष्म उवाच
नरकं प्रतिपद्यन्ते धर्मविद्वेषिणो नराः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
नरकं भजमानास्ते प्रत्यपद्यन्त किल्विषम् ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
नरकं शम्वरं चैव कंसं चैद्यं च माधवः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
४१
पितर ऊचुः
नरकप्रतिष्ठान्पश्यास्मान्यथा दुष्कृतिनस्तथा ||
२६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१००
भीष्म उवाच
नरकस्याप्रतिष्ठस्य मा भूत वशवर्तिनः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
नरकस्याभिरक्षार्थं नैनं कश्चिद्वधिष्यति ||
३० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६३
नारद उवाच
नरकादींश्च सङ्क्लेशान्नाप्नोतीति विनिश्चय़ः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
नरकिंनररक्षांसि वय़ःपशुमृगोरगान् |
४६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४३
व्रह्मो उवाच
नरकिंनरय़क्षाणां गन्धर्वोरगरक्षसाम् |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४४
व्रह्मो उवाच
नरकिंनरय़क्षाणां सर्वेषामीश्वरः प्रभुः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८३
भृगुरु उवाच
नरके दुःखमेवाहुः समं तु परमं पदम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
नरके निपतन्त्येते जुह्वानाः स च यस्य तत् ||
२० ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३३
युधिष्ठिर उवाच
नरके निपतिष्यामो ह्यधःशिरस एव च ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
नरके निय़तं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ||
४४ ख
वन पर्व
अध्याय
१२८
सोमक उवाच
नरके वा धर्मराज कर्मणास्य समो ह्यहम् |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
नरकोट्यस्तथा तिस्रो वलमेतत्तवाभवत् ||
३८ ख
विराट पर्व
अध्याय
१
अर्जुन उवाच
नरदेव कथं कर्म राष्ट्रे तस्य करिष्यसि |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
नरनागरथेष्वेवं व्यवकीर्णेषु सर्वशः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
नरनागाश्वकाय़ेषु वहुत्वाल्लघुवेधिनः ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
अर्जुन उवाच
नरनागाश्वदेहेभ्यो विस्रविष्यति शोणितम् |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३८
सञ्जय़ उवाच
नरनागाश्वमथनं परमं लोमहर्षणम् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
नरनागाश्वसम्भूतां शरवेगौघवाहिनीम् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
नरनाराय़णस्थानं गङ्गय़ेवोपशोभितम् |
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
नरनाराय़णस्थानं भागीरथ्योपशोभितम् ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
भीष्म उवाच
नरनाराय़णाभ्यां च कृष्णेन हरिणा तथा ||
१७ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
नरनाराय़णावेतौ पुराणावृषिसत्तमौ |
५४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
व्रह्मो उवाच
नरनाराय़णावेतौ लोकाल्लोकं समास्थितौ |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
नरनाराय़णावेतौ सम्भूतौ मनुजेष्विति ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
नरनाराय़णौ क्रुद्धौ ज्ञात्वा देवाः सवासवाः |
२ क
वन पर्व
अध्याय
१२५
लोमश उवाच
नरनाराय़णौ चोभौ स्थानं प्राप्ताः सनातनम् ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
नरनाराय़णौ देवाववज्ञाय़ नशिष्यसि ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
नरनाराय़णौ देवौ कथितौ नारदेन ह |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
२१९
वैशम्पाय़न उवाच
नरनाराय़णौ देवौ तावेतौ विश्रुतौ दिवि |
१५ क