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द्रोण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
नराणां पदशव्दैश्च कम्पतीव स्म मेदिनी ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५९
वसुदेव उवाच
नराणां वदतां पुत्र कथोद्घातेषु नित्यशः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
नराणामपि पञ्चाशच्छतानि त्रीणि चानघाः ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
नराणामृद्धसत्त्वानां कुले कन्याप्ररोहणम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
श्रीभगवानु उवाच
नराणामय़नं ख्यातमहमेकः सनातनः |
३५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
नराणामय़नाच्चापि तेन नाराय़णः स्मृतः |
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
नराधिपः प्राय़जत वाजिमेधं महाक्रतुम् ||
१७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
नराधिपश्चाप्यनुशिष्य मेदिनीं; दमेन सत्येन च सौहृदेन |
६० क
उद्योग पर्व
अध्याय ६९
धृतराष्ट्र उवाच
नराधिपानां विदुषां प्रधान; मिन्द्रानुजं तं शरणं प्रपद्ये ||
७ ख
विराट पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
नराधिपो राष्ट्रपतिं यशस्विनं; महाय़शाः कौरववंशवर्धनः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
नरानेव नरा जघ्नुरुदग्राश्च हय़ा हय़ान् |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
नरान्त्रैः केचिदपरे विषाणालग्नसंस्रवैः |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
नरान्नागान्समाहत्य हय़ांश्चापि विशां पते |
५६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
नरान्नागान्हय़ांश्चैव निजघ्नुः सर्वतो रणे ||
४६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
भीष्म उवाच
नरामराः किंनरय़क्षराक्षसाः; समृद्धिमन्तः सुखिनो यशस्विनः ||
९१ ख
वन पर्व
अध्याय २२८
वैशम्पाय़न उवाच
नराश्च मृगय़ाशीलाः शतशोऽथ सहस्रशः ||
२७ ख
विराट पर्व
अध्याय ७
विराट उवाच
नराश्च ये तत्र ममोचिताः पुरा; भवस्व तेषामधिपो मय़ा कृतः ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
नराश्चैव नरैः सार्धं दन्तिनो दन्तिभिस्तथा |
३६ क
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
नराश्वकाय़सञ्छन्ना भूमिरासीद्विशां पते |
७६ क
विराट पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
नराश्वकाय़ान्निर्भिद्य लोहानि कवचानि च |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
नराश्वकाय़ान्निर्भिद्य लौहानि कवचानि च ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
नराश्वकाय़ैः पतितैर्दन्तिभिश्च महाहवे |
२१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
नराश्वकुञ्जरान्पाशैर्वद्ध्वा घोरैः प्रतस्थुषीम् |
६५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
नराश्वगजदेहान्सा वहन्ती भीरुभीषणी ||
६२ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
नराश्वगजदेहान्सा व्युवाह पतितान्वहून् ||
६१ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
नराश्वगजदेहेभ्यः प्रसृता लोहितापगा |
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७२
सञ्जय़ उवाच
नराश्वगजसङ्घानां शिरांसि च ततस्ततः ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
नराश्वगजसम्वाधे नराश्वगजसादिनाम् |
६२ क
कर्ण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
नराश्वनागा नाराचैः संस्यूताः सव्यसाचिना |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
नराश्वनागानमितौ निजघ्नतुः; परस्परं जघ्नतुरुत्तमेषुभिः ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
नराश्वनागासुहरं त्र्यरत्निं; षड्वाजमञ्जोगतिमुग्रवेगम् ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
नराश्वनागास्थिनिकृत्तशर्करा; विनाशपातालवती भय़ावहा |
१२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
नराश्वनागैश्च रथैश्च मर्दितै; र्मही महावैतरणीव दुर्दृशा ||
१८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
नराश्वमातङ्गशरीरजेन; रक्तेन सिक्ता रुधिरेण भूमिः |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
नराश्वमातङ्गसहस्रनादितै; रथोत्तमेनाभ्यपतद्द्विपोत्तमम् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
नराश्वरथनागानां यमराष्ट्रविवर्धनम् ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
नराश्वरथनागानां व्यतिषक्तं परस्परम् ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
नराश्वरथनागानां हन्तारं परवीरहन् |
६२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
नरास्तमुपजीवन्ति नृपं सर्वार्थसाधकम् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
नरास्तु निहता भूमौ कूजन्तस्तत्र मारिष |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
नरास्तु वहवस्तत्र समाजग्मुः परस्परम् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८
जनक उवाच
नरेण प्रतिपत्तव्यं कल्याणं कथमिच्छता ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
नरेण सहितं देवं वदर्यां सुचिरोषितम् ||
४२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १९
वासुदेव उवाच
नरेणाकृतसञ्ज्ञेन विदग्धेनाकृतात्मना ||
५१ ख
विराट पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
नरेन्द्र वहुशोऽन्विष्टा नैव विद्मश्च पाण्डवान् |
१३ क
विराट पर्व
अध्याय ७
भीम उवाच
नरेन्द्र सूदः परिचारकोऽस्मि ते; जानामि सूपान्प्रथमेन केवलान् |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५
जनमेजय़ उवाच
नरेन्द्रः किञ्चिदाश्वस्तो द्विजश्रेष्ठ किमव्रवीत् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
नरेन्द्रचूडामणिभिर्विचित्रैश्च महाधनैः |
७३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
नरेन्द्रधर्मो लोकस्य तथा प्रग्रहणं स्मृतम् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
नरेन्द्रनागाश्वरथाकुलाना; मभ्याय़तीनामशिवे मुहूर्ते |
७ क