वन पर्व
अध्याय
१४०
लोमश उवाच
नागाः सुपर्णा गन्धर्वाः कुवेरसदनं प्रति ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३१
नारद उवाच
नागाः सुपर्णा गन्धर्वाः सिद्धा राजर्षय़श्च ये |
४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
नागानश्वान्पदातींश्च रथिनो गजसादिनः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०६
मुनिरु उवाच
नागानश्वान्मनुष्यांश्च कृतकैरुपघातय़ ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
नागानां कल्पमानानां रथानां च वरूथिनाम् |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
नागानां दय़िता नित्यं पद्मोत्पलविमिश्रिताः |
६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
नागानां प्रस्फुटुः कुम्भा मर्माणि विविधानि च |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
नागानां भीमरूपाणां द्रवतां निस्वनो महान् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
नागानां भीमरूपाणां वर्मिणां रौद्रकर्मिणाम् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
नागानां शृणु शव्दं च पत्तीनां च सहस्रशः |
७७ क
वन पर्व
अध्याय
१९३
उत्तङ्क उवाच
नागानामथ यक्षाणां गन्धर्वाणां च सर्वशः |
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
नागानामथ सर्पाणां गन्धर्वाणां पतत्रिणाम् |
७७ क
आदि पर्व
अध्याय
२१
सूत उवाच
नागानामालय़ं भद्रे सुरम्यं रमणीय़कम् |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१९
सूत उवाच
नागानामालय़ं रम्यमुत्तमं सरितां पतिम् ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२
सूत उवाच
नागानामुत्तमो हर्शस्तदा वर्षति वासवे |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
नारद उवाच
नागानामेकवंशानां यथाश्रेष्ठांस्तु मे शृणु ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
नागानीकेन महता ग्रसन्निव महीमिमाम् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
नागान्नगान्यक्षगणान्दिशश्च; गन्धर्वसङ्घान्पुरुषान्स्त्रिय़श्च |
६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
नागान्सप्तशतान्राजन्नीषादन्तान्प्रहारिणः |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
नागान्हय़ान्वर्मिणश्चाददानां; स्तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत् ||
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
नागामिनमनर्थं हि प्रतिघातशतैरपि |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
नागाश्च समरे त्र्यङ्गं ममृदुः शीघ्रगा नृप ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
नागाश्वरथपत्त्यौघांस्तावकान्समभिघ्नतः |
५२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
नागाश्वरथय़ानेषु वहुशः सुपरीक्षितम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
गुरुरु उवाच
नागासुरमनुष्यांश्च सृजते परमोऽव्ययः ||
१३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
नागाय़ुतवलप्राणः स राजा भीममाय़सम् |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
नागाय़ुतवलो मानी तेजसा न स मानुषः ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
नागाय़ुतवलो राजा नागाय़ुतवलो महान् |
३५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
नागाय़ुतवलो राजा स दग्धो हि दवाग्निना ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
नागाय़ुतवलो वीरः कैलासशिखरोपमः |
३१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२३
कुन्त्यु उवाच
नागाय़ुतसमप्राणः ख्यातविक्रमपौरुषः |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
नागाय़ुतसमप्राणः साक्षाद्विष्णुरिवापरः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
१७५
वैशम्पाय़न उवाच
नागाय़ुतसमप्राणः सिंहस्कन्धो महाभुजः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
नागाय़ुतसमप्राणस्त्वय़ा नीतः कथं वशम् ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
२६०
मार्कण्डेय़ उवाच
नागाय़ुतसमप्राणा वाय़ुवेगसमा जवे |
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१००
वैशम्पाय़न उवाच
नागाय़ुतसमप्राणो विद्वान्राजर्षिसत्तमः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
नागाय़ुतसमप्राणो ह्यहमेको नरेष्विह |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
नागृह्णात्पावकः शुभ्रं मखेषु सुहुतं हविः |
५२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
नागे नागे रथशतं शतं चाश्वा रथे रथे ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
नागे नागे रथाः सप्त सप्त चाश्वा रथे रथे |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
नागेन्द्रदुहिता चेय़मुलूपी किमिहागता ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
नागेन्द्रहय़योधानां शरीरव्ययसम्भवाम् ||
१२२ ख
आदि पर्व
अध्याय
४२
सूत उवाच
नागेन्द्रो वासुकिर्व्रह्मन्न स तां प्रत्यगृह्णत ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२३
श्रीकृष्ण उवाच
नागेभ्यः पतितानन्यान्कल्पितेभ्यो द्विपैः सह |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८९
धृतराष्ट्र उवाच
नागेष्वश्वेषु वहुशो रथेषु च परीक्षितम् |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
नागैरभ्याहताः केचित्सरथा रथिनोऽपतन् |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
नागैरिव महानागा यथा स्युर्गिरिगह्वरे ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
नागैर्नदैर्नदीभिश्च दैत्यैः साध्यैश्च दैवतैः |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
नागो नागमभिद्रुत्य रथी च रथिनं रणे |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
नागो मणिमय़ो राज्ञो ध्वजः कनकसंवृतः |
२६ क