भीष्म पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
नानादेशसमुत्थांश्च तुरगान्हेमभूषितान् |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
नानादेशसमुत्थांश्च नानाजात्यांश्च पत्तिनः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
नानादेशसमुत्थानां गीतानां योऽभवत्स्वनः |
२० क
सभा पर्व
अध्याय
४८
दुर्योधन उवाच
नानादेशसमुत्थैश्च नानाजातिभिरागतैः |
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
नानादेशसमुत्थैश्च पदातिभिरधिष्ठितम् ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
नानादेशसमुत्पन्नास्त्वदर्थे योद्धुमुद्यताः ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
नानादेशसमुद्भूता नानारञ्जितवाससः |
३८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
नानादेशेषु सन्तश्च प्राय़ो वाह्या लय़ादृते ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
नानादेश्या महीपालाः स्वसैन्यपरिरक्षिणः ||
१६ ग
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
नानाद्रुमनिरोधेषु वसन्तः शैलसानुषु |
२७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
नानाद्रुमलताच्छन्नं नानाव्यालनिषेवितम् ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
नानाद्रुमलतोपेतो नानारत्नविभूषितः ||
२८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१४५
भीष्म उवाच
नानाद्विजगणाकीर्णं सरः शीतजलं शुभम् |
४ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
वृहदश्व उवाच
नानाधातुशतैर्नद्धान्विविधानपि चाचलान् |
६ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
नानाधातुसमाकीर्णं विविधोपलभूषितम् |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१९
युधिष्ठिर उवाच
नानानिरय़निष्ठान्ता मानुषा वहवो यदा ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
नानानिय़मविख्यातैरृषिभिश्च महात्मभिः |
४४ क
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
नानानिय़मय़ुक्ताश्च तथा स्थण्डिलशाय़िनः ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
नानानृपतिभिर्वीरैर्विविधाय़ुधभूषणैः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
नानानृपतिभिर्वीरैस्तत्र तत्र व्यवस्थितैः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
नानानृपान्नृपसुतान्सैन्यानि विविधानि च |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैश्रवण उवाच
नानापक्षिगणाकीर्णं पुष्पितद्रुमशोभितम् ||
५२ ग
वन पर्व
अध्याय
६१
वृहदश्व उवाच
नानापक्षिगणाकीर्णं म्लेच्छतस्करसेवितम् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२३
सूत उवाच
नानापक्षिरुतं रम्यं कद्रूपुत्रप्रहर्षणम् ||
५ ग
आदि पर्व
अध्याय
१५
सूत उवाच
नानापतगसङ्घैश्च नादितं सुमनोहरैः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
६७
दुःषन्त उवाच
नानापत्तनजे शुभ्रे मणिरत्ने च शोभने ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
नानापादौष्ठदंष्ट्राश्च नानाहस्तशिरोधराः |
९७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११८
नारद उवाच
नानापुरुषदेशानामीश्वरैश्च समाकुलम् |
४ क
वन पर्व
अध्याय
१११
लोमश उवाच
नानापुष्पफलैर्वृक्षैः कृत्रिमैरुपशोभितम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
नानापुष्पफलोपेतं नानापक्षिनिषेवितम् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
नानापुष्परजोमिश्रो गजदानाधिवासितः |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
नानापुष्पसमाकीर्णं यथा चैत्ररथं वनम् ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
नानापुष्पस्रजोपेता नानाकुण्डलधारिणः |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
७८
राजो उवाच
नानाप्तदक्षिणैर्यज्ञैर्यजन्ते विषय़े मम |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
७१
भीष्म उवाच
नानाप्तैः कारय़ेच्चारं कुर्यात्कार्यमपीडय़ा ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
नानाप्रस्रवणेभ्यश्च वारिधाराः पतन्त्यमूः ||
७८ ख
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
नानाप्रहरणं घोरमदृश्यत महद्वलम् ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
नानाप्रहरणा भीमास्त्वत्सुतानां जय़ैषिणः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
नानाप्रहरणा वीराः शोभय़ां चक्रिरे वलम् ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
नानाप्रहरणैर्घोरैः परस्परवधैषिभिः |
५४ ख
सभा पर्व
अध्याय
१०
नारद उवाच
नानाप्रहरणैर्घोरैर्वातैरिव महाजवैः |
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
नानाप्रहरणैर्घोरैर्वृतो राक्षसपुङ्गवैः |
७ क
वन पर्व
अध्याय
२७१
मार्कण्डेय़ उवाच
नानाप्रहरणैर्भीमं राक्षसेन्द्रमताडय़न् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७
सूत उवाच
नानाप्रहरणैर्भीमैर्दानवान्समकम्पय़त् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
नानाप्रहरणैश्चान्ये विचित्रस्रगलङ्कृताः |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
नानाप्रहरणैश्चोग्रै रथहस्त्यश्वसादिनः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
नानाप्रीतिमहारत्नं दुःखज्वरसमीरणम् |
६४ क
वन पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
नानाप्लुताङ्गैस्तीर्थेषु यज्ञदानवहिष्कृतैः ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
नानाभरणधारिण्यो नानामाल्याम्वरास्तथा |
३९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
नानाभरणवान्राजन्मृष्टजाम्वूनदाङ्गदः |
४२ क