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वन पर्व
अध्याय ५३
नल उवाच
प्रविष्टः सुमहाकक्ष्यं दण्डिभिः स्थविरैर्वृतम् ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
वासुदेव उवाच
प्रविष्टमात्रश्च गृहे सर्वं पश्यामि तन्नवम् |
४७ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
प्रविष्टमात्रस्तु नरः सर्वपापैः प्रमुच्यते ||
५४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
प्रविष्टमाश्रमं चापि पूर्वमेव ददर्श सः ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रविष्टश्चापि कौन्तेय़ नेह द्रक्ष्यसि किञ्चन |
१२ क
वन पर्व
अध्याय १९७
मार्कण्डेय़ उवाच
प्रविष्टस्तत्कुलं यत्र पूर्वं चरितवांस्तु सः ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
प्रविष्टस्तावकं सैन्यं द्रावय़ित्वा चमूं भृशम् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय ११७
वैशम्पाय़न उवाच
प्रविष्टा पावकं माद्री हित्वा जीवितमात्मनः ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय १३०
लोमश उवाच
प्रविष्टा पृथिवीं वीर मा निषादा हि मां विदुः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
प्रविष्टावरिसेनां हि वीरौ माधवपाण्डवौ ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
प्रविष्टे तव सैन्यं तु शैनेय़े सत्यविक्रमे |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०५
द्रोण उवाच
प्रविष्टे त्वर्जुने राजंस्तव सैन्यं युय़ुत्सय़ा ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
प्रविष्टे युय़ुधाने तु सैनिकेषु द्रुतेषु च |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
प्रविष्टो धार्तराष्ट्राणामेतद्वलमहार्णवम् |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
प्रविष्टो भारतीं सेनां तव पाण्डव पृष्ठतः |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
प्रविष्टो भारतीं सेनां मकरः सागरं यथा ||
१६ ग
वन पर्व
अध्याय १८७
देव उवाच
प्रविष्टो मानुषं देहं सर्वं प्रशमय़ाम्यहम् ||
२८ ख
सभा पर्व
अध्याय ४७
दुर्योधन उवाच
प्रविष्टो यज्ञसदनं पाण्डवस्य महात्मनः ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय २८
युय़ुत्सुरु उवाच
प्रविष्टो हास्तिनपुरं रक्षँल्लोकाद्धि वाच्यताम् ||
८९ ख
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
प्रविष्टो हास्तिनपुरं वाष्पकण्ठोऽश्रुलोचनः ||
८२ ख
विराट पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
प्रविष्टौ महतीं सेनां त्रिगर्तानां महारथौ |
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८९
धृतराष्ट्र उवाच
प्रविष्टौ मामकं सैन्यं सात्वतेन सहाच्युतौ ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
प्रविष्टय़ोर्महाराज पार्थवार्ष्णेय़योस्तदा |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५९
वासुदेव उवाच
प्रवीरः कौरवेन्द्रस्य काव्यो दैत्यपतेरिव ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
प्रवीरांस्तव सैन्येषु प्रेषय़ामास मृत्यवे ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
प्रवीराः सर्वलोकस्य युवानः सिंहविक्रमाः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
प्रवीराणां महाशङ्खैर्विप्रकीर्णैश्च पाण्डुरैः ||
६४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
प्रवीरान्सर्वलोकस्य धार्तराष्ट्रान्महारथान् |
७ ख
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
प्रवीरेश्वररौद्राश्वास्त्रय़ः पुत्रा महारथाः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
श्रीभगवानु उवाच
प्रवुद्धवर्याः सेवन्ते मामेवैष्यन्ति यत्परम् |
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय १४२
वैशम्पाय़न उवाच
प्रवुद्धास्ते हिडिम्वाय़ा रूपं दृष्ट्वातिमानुषम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय २२
वासुदेव उवाच
प्रवुद्धोऽस्मि ततो भूय़ः शतशो विकिरञ्शरान् ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४६
भीष्म उवाच
प्रवुध्यसे प्रस्वपिषि वर्तसे चरसे सुखी ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
प्रवृत्तं च हितं चोक्त्वा भोजनाद्यन्तय़ोस्तथा ||
१०३ ख
सभा पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रवृत्तं धार्तराष्ट्रस्य चक्रं राज्ञो महात्मनः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०८
गुरुरु उवाच
प्रवृत्तं नोपरुन्धेत शनैरग्निमिवेन्धय़ेत् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१२
भीष्म उवाच
प्रवृत्तं रज इत्येव ततस्तदभिचिन्तय़ेत् ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
प्रवृत्तं रज इत्येव तन्नसंरभ्य चिन्तय़ेत् ||
३१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
प्रवृत्तं सर्वभूतेषु दृश्यतोत्पत्तिलक्षणम् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८
अश्मो उवाच
प्रवृत्तचक्रस्य यशोऽभिवर्धते; सर्वेषु लोकेषु चराचरेषु ||
५६ ख
वन पर्व
अध्याय २०५
मार्कण्डेय़ उवाच
प्रवृत्तचक्षुर्जातोऽस्मि सम्पश्य तपसो वलम् |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
प्रवृत्तमुदकं वाय़ुं सर्वं वानेय़मा तृणात् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
वृत्र उवाच
प्रवृत्तमेतद्भगवन्महर्षे; महाद्युतेश्चक्रमनन्तवीर्यम् |
५७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
प्रवृत्तवाक्चित्रकथ ऊहवान्प्रतिभानवान् |
२८ क
वन पर्व
अध्याय २०३
व्याध उवाच
प्रवृत्तवाक्यो मन्त्री च योऽनुराग्यभ्यसूय़कः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
व्राह्मण उवाच
प्रवृत्तश्च निवृत्तश्च निवृत्तोऽस्मि प्रतिग्रहात् ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६५
इन्द्र उवाच
प्रवृत्तस्य हि धर्मस्य वुद्ध्या यः स्मरते गतिम् |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७४
भीष्म उवाच
प्रवृत्ता विनिवर्तन्ते विधानान्ते पुनः पुनः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय २०३
व्याध उवाच
प्रवृत्ता हृदय़ात्सर्वास्तिर्यगूर्ध्वमधस्तथा |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३६
विदुर उवाच
प्रवृत्तानि महाप्राज्ञ धर्मिणां पुण्यकर्मणाम् ||
३३ ख