अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
प्रीतश्चापि महादेवश्चकार वृषभं तदा |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
भीष्म उवाच
प्रीतस्ततोऽस्य भगवान्देवदेवः पुरातनः |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
प्रीतस्तेऽहं महाभागे तपसानेन शोभने |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
४०
भगवानु उवाच
प्रीतस्तेऽहं महावाहो पश्य मां पुरुषर्षभ ||
५३ ख
वन पर्व
अध्याय
१९२
विष्णुरु उवाच
प्रीतस्तेऽहमलौल्येन भक्त्या च द्विजसत्तम |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
प्रीतस्त्वभिगमेनाहं जय़ं तव नराधिप |
७० क
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
प्रीता वय़ं मोक्षिताश्चैव सर्वे; कामं किं ते करवामोऽद्य वत्स ||
१९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीताः स्म तव वाक्येन न त्विच्छामस्तपोव्ययम् |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
प्रीताः स्मोऽनुगृहीताश्च समेत्य भवता सह |
२७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१६
व्राह्मण उवाच
प्रीतात्मा चोपपन्नश्च श्रुतचारित्रसंय़ुतः |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
प्रीतात्मा धर्मराजानं कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम् ||
९० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
प्रीतात्मा प्रय़तात्मा च संय़तात्मा प्रधानधृक् ||
१३५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
श्वशुर उवाच
प्रीतात्मा स तु तं वाक्यमिदमाह द्विजर्षभम् |
५६ क
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतात्मानो ददुस्तस्मै वरान्यान्मनसेच्छति ||
४४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतात्मानो महात्मानो मेनिरे निहतान्रिपून् ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
प्रीताश्च देवता नित्यमिन्द्रे परिददत्युत |
३७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतास्ततो भविष्यामो वय़ं द्विजवरोत्तम |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
१३९
लोमश उवाच
प्रीतास्तस्याभवन्देवाः कर्मणार्वावसोर्नृप |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतास्ते तस्य सत्कारं विधिना पावकोपमाः |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
मणिभद्र उवाच
प्रीतास्ते देवताः सर्वा द्विजस्यास्य तथैव च |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
२०४
वृद्धावू ऊचतुः
प्रीतास्ते सततं पुत्र दमेनावां च पूजय़ा ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
प्रीतिं करिष्यामि धनञ्जय़स्य; राज्ञश्च भीमस्य तथाश्विनोश्च ||
८४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
देव्यु उवाच
प्रीतिं चाग्र्यां वान्धवानां सकाशा; द्ददामि ते वपुषः काम्यतां च |
८ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२०
गान्धार्यु उवाच
प्रीतिं दास्यति पार्थानां त्वामृते पुष्करेक्षण ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
प्रीतिं दास्यामि भीमस्य यमय़ोः सात्यकेरपि ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
२२६
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतिं नृपतिशार्दूल याममित्राघदर्शनात् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
भीष्म उवाच
प्रीतिं प्राप्यातुलां पूर्वं लोकांश्चात्मवशे स्थितान् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
प्रीतिः सत्त्वं रजः शोकस्तमो मोहश्च ते त्रय़ः ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतिजैश्च तदा शव्दैः पुरमासीत्समाकुलम् ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६
भीष्म उवाच
प्रीतिदाय़ं परित्यज्य सुष्वाप स गिरिव्रजे ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०५
गुरुरु उवाच
प्रीतिदुःखनिवद्धांश्च समस्तांस्त्रीनथो गुणान् |
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतिपूर्वं च तस्यासौ प्रतिजग्राह शासनम् ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतिपूर्वं परिष्वज्य प्ररुरोद मुदा तदा ||
४४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतिपूर्वं महाराज प्राणैर्न व्यपरोपय़त् ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
प्रीतिपूर्वं महावाहुः स्वकार्यं प्रति भारत |
१४ ख
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतिपूर्वं महावाहुर्वासुदेवमवेक्ष्य च |
४२ क
सभा पर्व
अध्याय
१
मय़ उवाच
प्रीतिपूर्वमहं किञ्चित्कर्तुमिच्छामि भारत ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
प्रीतिप्रवृत्तौ विनिवर्तने तथा; सुहृत्सु विज्ञाय़ निवृत्य चोभय़ोः |
५३ क
सभा पर्व
अध्याय
४९
दुर्योधन उवाच
प्रीतिमन्त उपातिष्ठन्नभिषेकं महर्षय़ः |
११ क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतिमन्तो महाभागा मुनय़श्चारणास्तथा ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
प्रीतिमन्तौ मुदा युक्तौ समय़ं तत्र चक्रतुः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१५
भीष्म उवाच
प्रीतिमांश्च तदा राजंस्तद्वाक्यं प्रत्यपूजय़त् ||
३६ ख
आदि पर्व
अध्याय
५३
सूत उवाच
प्रीतिमांश्चाभवद्राजा भारतो जनमेजय़ः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
१९८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतिमांस्ते दृढं चापि सम्वन्धेन नराधिप ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
प्रीतिमात्रं पितुः पुत्रः सर्वं पुत्रस्य वै पिता |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
प्रीतिमानभवत्तत्र रुद्रेण सह सङ्गतः ||
६२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
प्रीतिमानभवत्पार्थो देवराजनिवेशने ||
१३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतिमानभवद्राजा धृतराष्ट्रोऽम्विकासुतः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
भीष्म उवाच
प्रीतिमानभवद्राजा मिथिलाधिपतिस्तदा ||
९१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
प्रीतिमानभवद्राजा राज्ञो जिष्णोश्च कर्मणा ||
१ ख