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शान्ति पर्व
अध्याय ८७
भीष्म उवाच
पूजय़ेद्धार्मिकान्राजा निगृह्णीय़ादधार्मिकान् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
पूजय़ेद्विग्रहं यस्तु लिङ्गं वापि समर्चय़ेत् |
९४ क
वन पर्व
अध्याय २१९
मार्कण्डेय़ उवाच
पूतनां राक्षसीं प्राहुस्तं विद्यात्पूतनाग्रहम् ||
२६ ख
सभा पर्व
अध्याय ३८
शिशुपाल उवाच
पूतनाघातपूर्वाणि कर्माण्यस्य विशेषतः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
पूतपाप्मा जितस्वर्गो लोकान्प्राप्य सुखोदय़ान् |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
पूतात्मानश्च राजेन्द्र प्रय़ान्ति परमां गतिम् |
५२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
व्यास उवाच
पूताभिरद्भिराचम्य शुचिर्भवति निर्मलः ||
४० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
पूताभिश्च तथैवाद्भिः सदा दैवततर्पणम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय ३६
भीमसेन उवाच
पूतिकानिव सोमस्य तथेदं क्रिय़तामिति ||
३२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
पूतेन चाम्भसा नित्यं कार्यं कुर्वीत मोक्षवित् |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २३
भीष्म उवाच
पूतो भवति सर्वत्र किं पुनस्त्वं महीपते ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२९
व्यास उवाच
पूत्वा तृणवुसीकां वै ते लभन्ते न किञ्चन ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
पूरणात्सदनाच्चैव ततोऽसौ पुरुषोत्तमः ||
१० ग
वन पर्व
अध्याय १०८
लोमश उवाच
पूरणार्थं समुद्रस्य पृथिवीमवतारिता ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय १०३
लोमश उवाच
पूरणार्थं समुद्रस्य भवद्भिर्यत्नमास्थितैः ||
१६ ग
वन पर्व
अध्याय १०३
लोमश उवाच
पूरणार्थं समुद्रस्य मन्त्रय़ित्वा पुनः पुनः |
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
पूरितो वासुदेवेन शङ्खराट्स्वनते भृशम् |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
पूरितो हि जलौघेन मार्गस्तस्य वनस्य वै ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पूरुं राज्येऽभिषिच्य स्वे सदारः प्रस्थितो वनम् ||
९१ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
पूरुः कुरुर्यदुः शूरो विष्वगश्वो महाधृतिः |
१७२ क
आदि पर्व
अध्याय ८०
यय़ातिरु उवाच
पूरुणा मे कृतं वाक्यं मानितश्च विशेषतः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ११८
नारद उवाच
पूरुर्यदुश्च द्वौ वंशौ वर्धमानौ नरोत्तमौ |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११८
नारद उवाच
पूरुर्यदुश्च भगिनीमाश्रमे पर्यधावताम् ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
वासुदेव उवाच
पूरुर्यवीय़ांश्च ततो योऽस्माकं वंशवर्धनः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय ७९
यय़ातिरु उवाच
पूरो त्वं प्रतिपद्यस्व पाप्मानं जरय़ा सह |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय ७९
यय़ातिरु उवाच
पूरो त्वं मे प्रिय़ः पुत्रस्त्वं वरीय़ान्भविष्यसि |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय ७९
यय़ातिरु उवाच
पूरो प्रीतोऽस्मि ते वत्स प्रीतश्चेदं ददामि ते |
३० क
आदि पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
पूरो प्रीतोऽस्मि भद्रं ते गृहाणेदं स्वय़ौवनम् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
पूरोः पौरवाः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
पूरोः पौष्ट्यामजाय़न्त प्रवीरस्तत्र वंशकृत् ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
पूरोर्भार्या कौसल्या नाम |
११ क
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
पूरोर्वंशधरान्वीराञ्शक्रप्रतिमतेजसः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
पूरोर्वंशमिमं श्रुत्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते ||
९६ ख
आदि पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
पूरोस्तु पौरवो वंशो यत्र जातोऽसि पार्थिव |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्णं पद्मदलाक्षीणां स्त्रीणां शय़नसङ्कुलम् ||
१२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्णं पद्मदलाक्षीणां स्त्रीणां शय़नसङ्कुलम् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्णं मत्वा ततः कालं पूरुं पुत्रमुवाच ह ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
पूर्णं वर्षसहस्रं तु व्रह्मलोके महीय़ते |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्णं वर्षसहस्रं स एवंवृत्तिरभून्नृपः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
पूर्णः पूरय़िता पुण्यः पुण्यकीर्तिरनामय़ः ||
८६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्णकुम्भाः सुमनसो लाजा वर्हींषि गोरसाः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्णकोशा वलोपेताः प्रय़तिष्यन्ति रक्षणे ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
पूर्णचन्द्रनिकाशेन मूर्ध्नि छत्रेण भारत |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०३
भृगुरु उवाच
पूर्णचन्द्रप्रतीकाशा दीपदाश्च भवन्त्युत ||
३६ ग
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
पूर्णचन्द्रमिव व्योम्नि तुषारावृतमण्डलम् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय ६५
सुदेव उवाच
पूर्णचन्द्राननां श्यामां चारुवृत्तपय़ोधराम् |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
पूर्णचन्द्राभवक्त्रं च क्षुरेणाभ्यहनच्छिरः ||
१०४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
पूर्णचन्द्राभवक्त्राणि स्वक्षिभ्रूदशनानि च |
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
पूर्णचन्द्राभवदनं काकपक्षवृताक्षकम् ||
१७ ख