chevron_left  पूर्ववृत्तव्यपेतानिarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
भीष्म उवाच
पूर्ववृत्तव्यपेतानि कथय़न्तौ समाहितौ ||
९ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
पूर्ववृत्तानि चाप्येनं रूक्षाण्यश्रावय़द्भृशम् ||
७६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९
युधिष्ठिर उवाच
पूर्वशास्त्रविदो ह्येवं जनाः पश्यन्ति भारत |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५४
भीष्म उवाच
पूर्वसम्वन्धिसंय़ोगान्नैतद्दान्तो निषेवते ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
पूर्वसर्गे तु कौन्तेय़ साध्व्यो नार्य इहाभवन् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
पूर्वस्यां दिशि तं दृष्ट्वा प्रतीच्यां ददृशुर्जनाः ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २१
भीष्म उवाच
पूर्वस्यां दिशि सूर्यं च सोऽपश्यदुदितं दिवि ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
पूर्वा दिग्लोहिताकारा शस्त्रवर्णा च दक्षिणा |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १००
नारद उवाच
पूर्वां दिशं धारय़ते सुरूपा नाम सौरभी |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०६
सुपर्ण उवाच
पूर्वां वा दक्षिणां वाहमथ वा पश्चिमां दिशम् |
२ क
विराट पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वागतं ततस्तत्र भीममप्रतिमौजसम् |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
श्रीभगवानु उवाच
पूर्वागतोऽहं वरद नार्हस्यम्वां प्रवाधितुम् |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वाचार्यं च खड्गस्य प्रव्रूहि प्रपितामह ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६२
भीष्म उवाच
पूर्वान्स्मर द्विजाग्र्यांस्तान्प्रख्यातान्वेदपारगान् |
४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
पूर्वापकारिणो हन्याल्लोकद्विष्टांश्च सर्वशः ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
पूर्वापदानैः प्रथितैः प्रशंस; न्स्थिरांश्चकारात्मरथाननीके ||
५६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४
द्रुपद उवाच
पूर्वाभिपन्नाः सन्तश्च भजन्ते पूर्वचोदकम् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
पूर्वाभिभाषी सुश्लक्ष्णं स्मय़मानोऽभ्यभाषत ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
पूर्वाभिरामां वीरां च भीमामोघवतीं तथा |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय २८
श्रीभगवानु उवाच
पूर्वाभ्यासेन तेनैव ह्रिय़ते ह्यवशोऽपि सः |
४४ क
आदि पर्व
अध्याय १४
सूत उवाच
पूर्वार्धकाय़सम्पन्नमितरेणाप्रकाशता |
१६ क
सभा पर्व
अध्याय ५०
दुर्योधन उवाच
पूर्वावाप्तं हरन्त्यन्ये राजधर्मं हि तं विदुः ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४६
भीष्म उवाच
पूर्वाशी वा कुले ह्यस्मिन्देवतातिथिवन्धुषु ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय १७३
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वाश्च षट्ता दश पाण्डवानां; शिवा वभूवुर्वसतां वनेषु ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
पूर्वाह्ण एव कुर्वीत देवतानां च पूजनम् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २००
भीष्म उवाच
पूर्वाह्णं चापराह्णं च सर्वमेवान्वकल्पय़त् ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१७
वलिरु उवाच
पूर्वाह्णमपराह्णं च मध्याह्नमपि चापरे |
५३ क
शल्य पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
पूर्वाह्णे चैव सम्प्राप्ते भास्करोदय़नं प्रति ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
पूर्वाह्णे तन्महारौद्रं राज्ञां युद्धमवर्तत |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
पूर्वाह्णे तस्य रौद्रस्य युद्धमह्नो विशां पते |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
पूर्वाह्णे तु तथा राजन्पराजित्य महारथान् |
१२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
पूर्वाह्णे तु महाराज प्रावर्तत जनक्षय़ः |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
पूर्वाह्णे मां कृतजप्यं कदा चि; द्विप्रः प्रोवाचोदकान्ते मनोज्ञम् |
६१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
पूर्वाह्णे व्राह्मणो वाक्यं क्षेमदर्शिनमव्रवीत् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२९
श्रीभगवानु उवाच
पूर्वे च मन्वन्तरे स्वाय़म्भुवे नाराय़णहस्तवन्धग्रहणान्नीलकण्ठत्वमेव वा ||
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८८
भीष्म उवाच
पूर्वे ध्यानपथे धीरः समादध्यान्मनोऽन्तरम् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५९
द्युमत्सेन उवाच
पूर्वे पूर्वतरे चैव सुशास्या अभवञ्जनाः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५५
जाजलिरु उवाच
पूर्वे पूर्वे चास्य नावेक्षमाणा; नातः परं तमृषय़ः स्थापय़न्ति ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वे प्रजानिसर्गे त्वामाहुरेकं प्रजापतिम् |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६४
भीष्म उवाच
पूर्वे प्रजानिसर्गेषु दक्षमाहुः प्रजापतिम् |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
सिद्ध उवाच
पूर्वे वय़सि कर्माणि कृत्वा पापानि ये नराः |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३५
विदुर उवाच
पूर्वे वय़सि तत्कुर्याद्येन वृद्धः सुखं वसेत् |
५८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८
अश्मो उवाच
पूर्वे वय़सि मध्ये वाप्युत्तमे वा नराधिप |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६६
भीष्म उवाच
पूर्वे समुद्रे यः पन्था न स गच्छति पश्चिमम् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वेण तु महामेरोर्दण्डेन मृदितस्त्वय़ा ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
महेश्वर उवाच
पूर्वेण वदनेनाहमिन्द्रत्वमनुशास्मि ह |
५ क
आदि पर्व
अध्याय १४०
वैशम्पाय़न उवाच
पूर्वेषां राक्षसेन्द्राणां सर्वेषामय़शस्करि ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय १८७
युधिष्ठिर उवाच
पूर्वेषामानुपूर्व्येण यातं वर्त्मानुय़ामहे ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३२
विदुरो उवाच
पूर्वैः पूर्वतरैः प्रोक्तं परैः परतरैरपि ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२०
युधिष्ठिर उवाच
पूर्वैः पूर्वनिय़ुक्तानि राजधर्मार्थवेदिभिः ||
१ ख