chevron_left  पूजितांarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
पूजितां पादशौचेन वरान्नेनाप्यतर्पय़त् ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
पूजिताः कुरुभिर्जग्मुः पुनर्द्वारवतीं पुरीम् ||
५५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३२
नारद उवाच
पूजिताः पूजनार्हा हि सुखं दास्यन्ति तेऽनघ ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२३
भीष्म उवाच
पूजिताः पूजय़न्त्येतान्मानिता मानय़न्ति च |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
पूजिताः शुभकर्माणः पूर्वजित्या नराधिप ||
२०९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७८
राजो उवाच
पूजिताः संविभक्ताश्च मृदवः सत्यवादिनः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८१
भीष्म उवाच
पूजिताः संविभक्ताश्च सुसहाय़ाः स्वनुष्ठिताः ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
पूजिताश्च यय़ुर्विप्रा राजानमभिनन्द्य तम् |
३७ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
पूजिताश्चापि ते राज्ञा ततो जग्मुर्यथागतम् ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
पूजिताश्चावसंस्तत्र सप्तरात्रमरिन्दमाः ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४६
युधिष्ठिर उवाच
पूजितो धृतराष्ट्रेण सपुत्रेण विशां पते |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
पूजितो मुनिसङ्घैश्च प्रातरुत्थाय़ लाङ्गली ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६३
राजधर्मो उवाच
पूजितो यास्यसि प्रातर्विधिदृष्टेन कर्मणा ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६५
भीष्म उवाच
पूजितो राक्षसेन्द्रेण निषसादासनोत्तमे ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
राजो उवाच
पूजितो व्राह्मणश्रेष्ठ भूय़ो वस गृहे मम ||
५५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
पूजितो हि सुखाय़ स्यादसुखः स्यादपूजितः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
भीष्म उवाच
पूजितोऽहं त्वय़ा पूर्वं पश्चाच्चैव विमानितः |
७२ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
पूजोपहारवलिभिर्होममन्त्रपुरस्कृतैः ||
१३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
पूज्य तीर्थवरं तच्च स्पृष्ट्वा तोय़ं च लाङ्गली |
९४ ख
वन पर्व
अध्याय २११
मार्कण्डेय़ उवाच
पूज्यते हविषाग्र्येण चातुर्मास्येषु पावकः |
१६ क
विराट पर्व
अध्याय ६६
उत्तर उवाच
पूज्यन्तां पूजनार्हाश्च महाभागाश्च पाण्डवाः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३३
कापव्य उवाच
पूज्यन्ते यत्र देवाश्च पितरोऽतिथय़स्तथा ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय २१८
मार्कण्डेय़ उवाच
पूज्यमानं तु रुद्रेण दृष्ट्वा सर्वे दिवौकसः |
२८ क
सभा पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
पूज्यमानं मय़ा यो वः कृष्णं न सहते नृपाः ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
पूज्यमानस्तव सुतैर्वन्द्यमानश्च भारत ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
भीष्म उवाच
पूज्यमाना द्विजैर्नित्यं मोदमाना गृहे रताः |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
पूज्यमाना मुनिगणैर्वल्कलाजिनसंवृतैः |
२३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
पूज्यमानाः स्म ते वीरा व्यराजन्त विशां पते ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
पूज्यमानाश्च वर्धन्ते हव्यकव्यैर्यथाविधि ||
१० ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
पूज्यमाने ततस्तस्मिन्मोदते स महेश्वरः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
पूज्यमाने ततस्तस्मिन्मोदते स महेश्वरः |
८५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
पूज्यमाने पुरा धर्मे सर्वदेशेषु शाश्वते |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०
वासुदेव उवाच
पूज्यमानो यथान्याय़ं तेजसा स्वेन भारत ||
२८ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
पूज्यमानो यय़ौ तत्र यत्र ते कुरुपुङ्गवाः ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४६
भीष्म उवाच
पूज्या लालय़ितव्याश्च वहुकल्याणमीप्सुभिः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४६
भीष्म उवाच
पूज्या लालय़ितव्याश्च स्त्रिय़ो नित्यं जनाधिप |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
पूज्या हि ज्ञानविज्ञानतपोय़ोगसमन्विताः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५५
वासुदेव उवाच
पूज्यान्मान्यांश्च भक्तांश्च गुरून्सम्वन्धिवान्धवान् |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ८२
यय़ातिरु उवाच
पूज्यान्सम्पूजय़ेद्दद्यान्न च याचेत्कदाचन ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ७८
शर्मिष्ठो उवाच
पूज्यासि मम मान्या च ज्येष्ठा श्रेष्ठा च व्राह्मणी |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय ३५
भीष्म उवाच
पूज्ये ताविह गोविन्दे हेतू द्वावपि संस्थितौ ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ७२
कच उवाच
पूज्यो मान्यश्च भगवान्यथा तव पिता मम |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९२
उतथ्य उवाच
पूजय़त्यतिथीन्भृत्यान्स राज्ञो धर्म उच्यते ||
३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
पूजय़न्तस्तदान्योन्यं मुदा परमय़ा युताः ||
७५ ख
आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
पूजय़न्ति च यं नित्यं विश्वकर्माणमव्ययम् ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
पूजय़न्ति स्म कौन्तेय़ं निहते सूतनन्दने ||
३७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
पूजय़न्तो महाराज पाण्डवा भरतर्षभ |
५४ ख
आदि पर्व
अध्याय १९१
वैशम्पाय़न उवाच
पूजय़न्त्या यथान्याय़ं शश्वद्गच्छन्तु ते समाः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३०
शक्र उवाच
पूजय़न्सुखमाप्नोति दुःखमाप्नोत्यपूजय़न् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
वासुदेव उवाच
पूजय़स्व महाभागान्वाग्भिर्दानैश्च नित्यदा ||
५० ख