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शान्ति पर्व
अध्याय २८४
पराशर उवाच
प्रजापतिः प्रजाः पूर्वमसृजत्तपसा विभुः |
१५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
प्रजापतिः प्रजाः सृष्ट्वा कर्म तासु विधाय़ च |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
प्रजापतिः प्रजाः सृष्ट्वा यथा संहरते तथा ||
२२ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
प्रजापतिपते देव पद्मनाभ महावल |
५३ क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
प्रजापतिपतेर्विष्णोर्लोकनाथस्य धीमतः ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
प्रजापतिमखघ्नाय़ प्रजापतिभिरीड्यसे ||
४५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २१
अष्टावक्र उवाच
प्रजापतिमतं ह्येतन्न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५४
जनमेजय़ उवाच
प्रजापतिमिवौदार्ये तेजसा भास्करोपमम् |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २१
व्राह्मण उवाच
प्रजापतिमुपाधावत्प्रसीद भगवन्निति ||
१४ ग
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
प्रजापतिमुपासन्ते ऋषय़श्च महाव्रताः |
७३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
प्रजापतिमुपासीनः प्रजानां विदधे सुखम् ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय २१६
वैशम्पाय़न उवाच
प्रजापतिरनिर्देश्यं यस्य रूपं रवेरिव ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५५
भीष्म उवाच
प्रजापतिरिदं सर्वं तपसैवासृजत्प्रभुः |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
व्रह्मो उवाच
प्रजापतिरिदं सर्वं तपसैवासृजत्प्रभुः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२८
व्यास उवाच
प्रजापतिरिवाक्षोभ्यः शरीरात्सृजति प्रजाः |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
प्रजापतिर्दिशावाहुर्विभागः सर्वतोमुखः ||
५७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४३
भीष्म उवाच
प्रजापतिर्देवमातादितिश्च; सर्वे कृष्णादृषय़श्चैव सप्त ||
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
प्रजापतिर्वलाधानममृतं प्रापिवत्तदा ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय १८३
सनत्कुमार उवाच
प्रजापतिर्विराट्सम्राट्क्षत्रिय़ो भूपतिर्नृपः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६५
इन्द्र उवाच
प्रजापतिर्हि भगवान्यः सर्वमसृजज्जगत् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
प्रजापतिर्हि वर्णानां दासं शूद्रमकल्पय़त् ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
प्रजापतिर्हि वैश्याय़ सृष्ट्वा परिददे पशून् |
२३ क
वन पर्व
अध्याय २६५
मार्कण्डेय़ उवाच
प्रजापतिसमो विप्रो व्रह्मय़ोनिः पिता तव |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
भीष्म उवाच
प्रजापतिसुताश्चात्र सदस्यास्त्वभवंस्त्रय़ः |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
प्रजापतिसुतेनाथ भृगुणा लोकभावनः ||
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
प्रजापतिस्तत्ससृजे तपसोऽन्ते महातपाः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५६
भीष्म उवाच
प्रजापतिस्तानुवाच विषमं कृतमित्युत |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
प्रजापतीनां प्रथमं तैजसं पुरुषं विभुम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
प्रजापतीनृषींश्चैव मार्गांश्च सुवहून्वरान् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८९
भीष्म उवाच
प्रजापतीनृषीन्देवान्महाभूतानि चेश्वराः ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
वसिष्ठ उवाच
प्रजापतेः कथय़तो मनोः स्वाय़म्भुवस्य वै ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
प्रजापतेः कर्दमस्य अनङ्गो नाम वै सुतः |
९७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
प्रजापतेः कर्म यथार्धनिष्ठितं; तदा दृष्ट्वा तप्स्यते मन्दवुद्धिः ||
५७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
भीष्म उवाच
प्रजापतेः सलोकतां वृहस्पतेः शतक्रतोः |
६० क
शल्य पर्व
अध्याय ५२
ऋषय़ ऊचुः
प्रजापतेरुत्तरवेदिरुच्यते; सनातना राम समन्तपञ्चकम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २००
भीष्म उवाच
प्रजापतेर्दुहितरस्तासां ज्येष्ठाभवद्दितिः ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
प्रजापतेश्च दक्षस्य यजतो वितते क्रतौ |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
वसुहोम उवाच
प्रजापतेस्ततो धर्मो जागर्ति विनय़ात्मकः ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
प्रजापतेस्तु दक्षस्य मनोर्वैवस्वतस्य च |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २६
व्राह्मण उवाच
प्रजापतौ पन्नगानां देवर्षीणां च संविदम् ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
अग्निरु उवाच
प्रजापतय़ एते हि प्रजानां यैरिमाः प्रजाः ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२०
भीष्म उवाच
प्रजापालनधर्मेण प्रेत्य विप्रत्वमागतः ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३०
कुन्त्यु उवाच
प्रजापालनसम्भूतं किञ्चित्प्राप फलं नृपः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
प्रजापालनसम्भूतं प्राप्ता धर्मफलं ह्यसि ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
प्रजापालनसम्भूतं फलं तव न गर्हितम् |
५३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
प्रजापालनय़ुक्तश्च न क्षतिं लभते क्वचित् ||
१३९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११३
नारद उवाच
प्रजाभिकामं शाम्यन्तं कुर्वाणं तप उत्तमम् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०१
भीष्म उवाच
प्रजामाचक्षते विप्राः पौराणीं शाशविन्दवीम् |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय ११
नारद उवाच
प्रजावतां च पञ्चाशदृषीणामपि पाण्डव ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
प्रजावतो भरेथाश्च व्राह्मणान्वहुभारिणः |
१० क