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उद्योग पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
पाणौ गृहीत्वा विदुरं सात्यकिं च महाय़शाः |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय १८२
वैशम्पाय़न उवाच
पाणौ गृहीत्वोपजगाम कुन्ती; युधिष्ठिरं वाक्यमुवाच चेदम् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
पाणौ पृषत्का लिखिता ममेमे; धनुश्च सङ्ख्ये विततं सवाणम् |
९५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
पाणौ पृषत्का लिखिता ममैते; धनुश्च सव्ये निहितं सवाणम् |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
पाण्डरैश्चन्द्ररश्म्याभैर्हेमदण्डैश्च चामरैः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवं च विचेष्टन्तं किरातोऽप्यहनद्वलात् ||
४७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवं चित्रसंनाहा विचित्रकवचध्वजाः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवं चित्रसंनाहास्तं प्रतीपमुपाद्रवन् ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवं छादय़ामास समन्ताच्छरवृष्टिभिः ||
८० ख
सभा पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवं प्रत्युवाचेदं स्मय़न्मधुरय़ा गिरा ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवं भृशसङ्क्रुद्धावर्दय़ामासतुः शरैः ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवं रभसं युद्धे वारय़ामासुरर्जुनम् ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवं विशिखैस्तीक्ष्णै राजन्विव्याध सप्तभिः ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवः परवीरघ्नः सहदेवः प्रतापवान् |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवः सुमहावीर्यो वलेन वलिनां वरः ||
५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवप्रिय़कामार्थं शार्दूल इव कुञ्जरम् ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६
द्रुपद उवाच
पाण्डवश्च यथावृत्तः कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवश्रीप्रतप्तस्य ध्यानग्लानस्य गच्छतः |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवस्तर्कय़ामास कर्मभिर्देवसंमितैः ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवस्तवसंय़ुक्ताः पुत्राणां ते सुदारुणाः ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवस्तु भृशं विद्धस्तेन राज्ञा महात्मना |
५ क
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवस्त्वव्रवीद्भ्रातॄन्सत्कारेण महीपतिम् |
३० क
वन पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवस्य च मुष्टीनां किरातस्य च युध्यतः ||
४५ ख
विराट पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवस्य तु शीघ्रास्त्रं मघवान्समपूजय़त् |
६४ क
विराट पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवस्य रथात्तूर्णं शलभानामिवाय़तिम् |
१६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवा अपि दीनास्ते दुःखशोकपराय़णाः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवा अभ्यधावन्त नदन्तो भैरवान्रवान् ||
४१ ग
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
पाण्डवा एत इत्युक्त्वा मुनय़ोऽन्तर्हितास्ततः ||
७२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवा दीनमनसः सर्वे वाष्पाकुलेक्षणाः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवा द्रौपदेय़ाश्च विराटश्च समीक्ष्य तम् |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवा धार्तराष्ट्राश्च अभिजग्मुः पितामहम् ||
१ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय १
जनमेजय़ उवाच
पाण्डवा धार्तराष्ट्राश्च कानि स्थानानि भेजिरे ||
१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
पाण्डवा धार्तराष्ट्राश्च द्रुग्धाः कृष्ण परस्परम् |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवा धार्तराष्ट्राश्च परस्परजिघांसवः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवा धार्तराष्ट्राश्च राजन्दुर्मन्त्रिते तव |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १३२
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवा धृतराष्ट्रेण प्रेषिता वारणावतम् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवा भरतश्रेष्ठ करिष्यन्ति कुरुक्षय़म् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवा भृशसंविग्नाः प्रापश्यंस्तत्स्य विक्रमम् ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४५
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवा भ्रातरः पञ्च भानावस्तङ्गते सति ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय २४८
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवा मृगय़ाशीलाश्चरन्तस्तन्महावनम् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवा लव्धलक्षाश्च धनञ्जय़पुरोगमाः |
१२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवा लव्धसञ्ज्ञास्ते मात्रा चाश्वासिताः पुनः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११७
कर्ण उवाच
पाण्डवा वासुदेवश्च विदिता मम सर्वशः |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५०
जनमेजय़ उवाच
पाण्डवा वासुदेवश्च विराटद्रुपदौ तथा ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवा विगतानन्दा वनाय़ैव प्रवव्रजुः ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
धृतराष्ट्र उवाच
पाण्डवा विजय़न्त्येव जीय़न्ते चैव मामकाः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवा वृषपर्वाणमवन्दन्त गतक्लमाः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवा हि यथास्माकं तथा दुर्योधनो नृपः |
२८ क
विराट पर्व
अध्याय ६६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवांश्च ततः सर्वान्मत्स्यराजः प्रतापवान् |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
पाण्डवांश्च सहामात्यान्न विमोक्ष्यामि दंशनम् ||
१८० ग