शान्ति पर्व
अध्याय
११५
भीष्म उवाच
प्रत्युच्यमानस्तु हि भूय़ एभि; र्निशाम्य मा भूस्त्वमथार्तरूपः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युज्जगाम सौभद्रं राजपुत्रो वृहद्वलः ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युत्थानं तु कृष्णस्य सर्वावस्थं धनञ्जय़ः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३८
विदुर उवाच
प्रत्युत्थानाभिवादाभ्यां पुनस्तान्प्रतिपद्यते ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
प्रत्युत्थानाभिवादाभ्यां पुनस्तान्प्रतिपद्यते ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
प्रत्युत्थानाभिवादाभ्यां सम्प्रदानेन कस्यचित् |
४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युत्थाय़ च गोविन्दं स तस्माय़ासनं ददौ |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
प्रत्युत्थाय़ च तं विप्रमास्यतामित्युवाच ह ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युत्थाय़ च तां कृष्णा स्वसारं माधवस्य ताम् |
२० क
सभा पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युत्थाय़ जरासन्ध उपतस्थे यथाविधि ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युत्थाय़ तु ते सर्वे पूजय़ित्वा यतव्रतम् |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युत्थाय़ महातेजा भय़कर्ता यमोपमः ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युत्थाय़ महात्मानं कृष्णं दृष्ट्वाभ्यपूजय़न् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युत्थाय़ाभिनन्दामि आसनेनोदकेन च ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
प्रत्युत्थाय़ोपसङ्गृह्य चरणावभिवाद्य च |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
प्रत्युत्थिता भगवन्तं मणिभद्रपुरोगमाः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०५
मुनिरु उवाच
प्रत्युत्पन्नाननुभवन्मा शुचस्त्वमनागतान् ||
२८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्गत इव प्रेम्णा भूम्या स नरपुङ्गवः ||
५३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्गम्य भवेत्क्षेमी यो न स्यात्त्वमिव क्षमी ||
५२ ख
वन पर्व
अध्याय
२४५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युद्गम्य महात्मानं प्रत्यगृह्णाद्यथाविधि ||
९ ख
मौसल पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युद्गम्य स्वागतेनाभ्यनन्दं; स्तेऽपूजय़ंश्चार्घ्यपाद्यक्रिय़ाभिः ||
१५ ग
आदि पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युद्गम्याञ्जलिं कृत्वा राजानं वाक्यमव्रवीत् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
प्रत्युद्गम्याभिगमनं कुर्यान्न्याय़ेन चार्चनम् ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
प्रत्युद्गम्याभिपूज्यः स्यादेतदत्र सुमन्त्रितम् |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययावदीनात्मा वेगेन महता नदन् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुः पाण्डुसेनां सहसैन्या नराधिप ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुः प्रमुदिताः पाञ्चाला जय़गृद्धिनः ||
३७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७६
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युद्ययुरमृष्यन्तो राजानः पाण्डवर्षभम् ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुररातींस्ते समन्ताद्विगतव्यथाः ||
५२ ख
विराट पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युद्ययुर्भारतमापतन्तं; महारथाः कर्णमभीप्समानाः ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुर्महाराज गजा इव महागजान् ||
५१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुर्महाराज तव पुत्रान्महावलान् ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुर्महाराज पाण्डवा विजय़े वृताः ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुर्महाराज हंसा इव महार्णवम् ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
प्रत्युद्ययुर्महावेगाः साध्याश्च वसुभिः सह ||
४३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुर्महेष्वासाः पाण्डवानातताय़िनः ||
१८ ख
मौसल पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युद्ययुर्मुनय़श्चापि सिद्धा; गन्धर्वमुख्याश्च सहाप्सरोभिः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२८
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुस्तं त्वरिताः पाञ्चाला राजगृद्धिनः |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय
१०५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युद्ययुस्तं सम्प्राप्तं सर्वे भीष्मपुरोगमाः |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुस्ततो भीमं तव पुत्राश्चतुर्दश |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुस्तदा पार्थं सूतपुत्रपरीप्सय़ा ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुस्तदा पार्था जय़गृध्राः प्रहारिणः ||
६३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुस्तावकाश्च समेतास्तान्महारथान् |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुस्तु राधेय़ं पाण्डवानां महारथाः |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययुस्त्रिगर्तास्तं शिवय़ः कौरवैः सह |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययू रणे पार्थांस्तव पुत्रस्य शासनात् ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययौ कृपं तूर्णं धृष्टद्युम्नो महारथः ||
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्युद्ययौ गुडाकेशं सैन्येन महता वृतः |
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययौ च तं पार्थं भगदत्तः प्रतापवान् |
५४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
प्रत्युद्ययौ तदा कर्णः पाण्डवान्युद्धदुर्मदान् ||
५ ख