भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेन युधां श्रेष्ठ काल्यमानानि संय़ुगे ||
१६ ख
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेन हताः शूरा भीष्मस्य रथरक्षिणः |
३० क
वन पर्व
अध्याय
२३५
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेनाभ्यनुज्ञातो राजा दुर्योधनस्तदा |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेभ्यः प्रदास्यन्ति भीष्मो द्रोणः पिता च ते ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेभ्यः शिवं वोऽस्तु शस्त्रमभ्युत्सृजाम्यहम् ||
३४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६०
वासुदेव उवाच
पाण्डवेभ्यः स्वराज्यार्धं लोभाच्छकुनिनिश्चय़ात् ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेभ्योऽपि पञ्चभ्यः कृष्णाय़ां पञ्च जज्ञिरे |
१०१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेषु कथं हार्दं कुर्यान्न च पितामहः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेषु च नाथेषु वृष्णिवीरेषु चाभिभो |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेषु दय़ां राजन्सदा भीष्मः करोति वै |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेषु वनं राजन्प्रव्रजत्सु पुनः पुनः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेषु हि सापेक्षं द्रोणं जानाति ते सुतः |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेष्वथ युष्मासु धर्मस्त्वभ्यधिकस्ततः ||
५१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेष्विति तत्सर्वं निवोधत नराधिपाः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेय़ सदा यानि कीर्तय़ँल्लभते जय़म् ||
८१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेय़स्त्वसम्भ्रान्तो वाय़व्यास्त्रेण वीर्यवान् |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९४
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेय़स्य गाङ्गेय़ यदेतत्सैन्यमुत्तमम् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेय़ा महाराज तां रात्रिं सुखमावसन् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेय़ा महाराज नाशंसुर्विजय़ं तदा ||
६३ ख
विराट पर्व
अध्याय
१९
द्रौपद्यु उवाच
पाण्डवेय़ांश्च सम्प्राप्तो मम क्लेशो ह्यरिन्दम ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेय़ाः समाहूता युद्धं चेदं प्रवर्तितम् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेय़ानहं सङ्ख्ये भीमवीर्यपराक्रमान् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२३८
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेय़ानि रत्नानि त्वमद्याप्युपभुञ्जसे |
४५ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेय़ान्पुरस्कृत्य यय़ावभिमुखः कुरून् ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेय़ान्महाराज शरैर्वारितवान्रणे ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेय़ान्रणे जघ्नुर्द्रवमाणान्समन्ततः ||
५२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेय़ाभिगुप्तेन भृशं मे व्यथितं मनः ||
३६ ख
सभा पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवेय़ाभ्यनुज्ञातस्ततो दुर्योधनो नृपः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३९
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेय़ेषु सैन्येषु योधं पश्याम्यहं न तम् |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेय़ैर्हि यद्वृत्तं कौरवेय़ेषु मारिष |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेय़ैश्च सङ्ग्रामे त्वत्प्रिय़ार्थमरिन्दम ||
१० ग
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैः कौरवैश्चैव न प्रज्ञाय़त किञ्चन ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवैः पृथिवीं तात भोक्ष्यसे सहितः सुखी ||
३५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७२
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवैः पृथिवीमश्वो निर्जितामस्त्रतेजसा |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय
१
जनमेजय़ उवाच
पाण्डवैः प्राप्तकालं च किं प्रापद्यत कौरवः ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवैः संशमं कृत्वा कृत्वा च सुहृदां वचः |
६१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
धृतराष्ट्र उवाच
पाण्डवैः समरे पुत्रो निहतो मम सञ्जय़ ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैः समसज्जन्त चतुर्भिश्चतुरो रथाः ||
३२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवैः सह दाशार्ह सृञ्जय़ैश्च ससैनिकैः ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैः सह पाञ्चालैरशिवैः क्रूरकर्मभिः |
३२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
पाण्डवैः सह राजेन्द्र तव सेनासु भारत |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१९१
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवैः सह संय़ोगं गतस्य द्रुपदस्य तु |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैः सहपाञ्चालैश्चेदिभिः सात्यकेन च |
२० क
वन पर्व
अध्याय
९
व्यास उवाच
पाण्डवैः सहितो राजन्नेक एवासहाय़वान् ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैरतितेजोभिर्लोकस्त्वामनुदृष्टवान् ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैरवकीर्णानां संमोहः समजाय़त |
६१ क
आदि पर्व
अध्याय
१९२
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवैरुपसम्पन्ना द्रौपदी पतिभिः शुभा ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवैर्घातय़ामास जरासन्धमरिं तदा ||
५१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
अर्जुन उवाच
पाण्डवैर्धार्तराष्ट्राणां प्रतिपाद्यमनामय़म् |
२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवैर्धार्तराष्ट्राणां यदिदं कदनं कृतम् |
६३ क