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आदि पर्व
अध्याय ८
सूत उवाच
पितरं सखिभिः सोऽथ वाचय़ामास भार्गवः |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११९
नारद उवाच
पितरं समुपागच्छद्ययातिं सा ववन्द च ||
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
पितरं समुपातिष्ठद्धृतराष्ट्रं कृताञ्जलिः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
भीष्म उवाच
पितरं सम्परित्यज्य जगाम द्विजसत्तमः ||
६३ ग
उद्योग पर्व
अध्याय ४५
सनत्सुजात उवाच
पितरं सर्वभूतानां पुष्करे निहितं विदुः ||
२८ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
पितरं स्नापय़ामास स्वय़ं सस्नौ च पार्थिवः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय १५६
वैशम्पाय़न उवाच
पितरः पितृलोकस्थाः शोचन्ति च हसन्ति च ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३४
भीष्म उवाच
पितरः सर्वभूतानां नैतेभ्यो विद्यते परम् ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५३
अर्जुन उवाच
पितरः सहगन्धर्वाः सुपर्णाः सागराद्रय़ः |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९१
भीष्म उवाच
पितरश्चैव देवाश्च नाभिनन्दन्ति तद्धविः ||
४२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७
शल्य उवाच
पितरश्चैव यक्षाश्च भुजगा राक्षसास्तथा ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
पितरस्तर्पिताः सर्वे तथैव च पितामहाः |
२३ ख
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
पितरस्तस्य वै प्रीता दास्यन्ति भुवि दुर्लभम् |
३१ ख
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
पितरस्तारितास्तात सर्वे च प्रपितामहाः ||
९३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९६
जनमेजय़ उवाच
पितरस्ते महाभागास्तेभ्यो वुध्यस्व गम्यताम् ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ४१
पितर ऊचुः
पितरस्तेऽवलम्वन्ते गर्ते दीना अधोमुखाः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
पितरि प्रीतिमापन्ने सर्वाः प्रीय़न्ति देवताः ||
२० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
पितरीव सुविश्वस्तास्तस्मिन्नपि नराधिपे |
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
पितरो धर्मकार्येषु भवन्त्यार्तस्य मातरः ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९२
अग्निरु उवाच
पितरोऽभिलषन्ते वै नावं चाप्यधिरोहतः |
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२१
भीष्म उवाच
पितरौ सर्वभूतानां दैवतं च यशस्विनौ |
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
पितर्युपरते चापि कृतशौचः स भारत |
३५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
वासुदेव उवाच
पितर्युपरते राजन्राजा राज्यमकारय़त् ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
भीष्म उवाच
पितस्तदाचक्ष्व यथार्थय़ोगं; ममानुपूर्व्या येन धर्मं चरेय़म् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३
नारद उवाच
पिता गुरुर्न सन्देहो वेदविद्याप्रदः प्रभुः |
२८ क
सभा पर्व
अध्याय ११
नारद उवाच
पिता च त्वाह कौन्तेय़ पाण्डुः कौरवनन्दनः |
६५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
पिता च मम धर्मात्मा तस्य मे निष्कृतिः कुतः ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय १२
सूत उवाच
पिता चास्य तदाख्यानं पृष्टः सर्वं न्यवेदय़त् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
श्रीरु उवाच
पिता चैव जनित्री च श्रान्तौ वृत्तोत्सवाविव |
७२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
पिता ज्येष्ठो गतोऽस्माकमिति वाष्पपरिप्लुतः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
पिता तवाहवं त्यक्त्वा गतः कापुरुषो यथा |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
अर्जुन उवाच
पिता तु मे वसून्गत्वा त्वदर्थं समय़ाचत |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६४
भीष्म उवाच
पिता त्वस्य महातेजा वृद्धोऽपि युवभिर्वरः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय २९२
वैशम्पाय़न उवाच
पिता त्वां पातु सर्वत्र तपनस्तपतां वरः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
पिता नस्त्वं गुरुर्वन्धुस्तथा पुत्रा हि ते वय़म् |
८५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८६
पराशर उवाच
पिता परं दैवतं मानवानां; मातुर्विशिष्टं पितरं वदन्ति |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३३
नरनाराय़णावू ऊचतुः
पिता पितामहश्चैव तथैव प्रपितामहः |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
पिता पुत्रं न जानीते पुत्रो वा पितरं तथा |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
पिता पुत्रं मातुलं भागिनेय़ो; भ्राता चैव भ्रातरं प्रैतु राजन् ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
पिता पुत्रस्य भोक्ता च पितुः पुत्रस्तथैव च |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७०
भीष्म उवाच
पिता प्रदीप्ताग्निसमानतेजा; न तच्छक्यमनृतं विप्र कर्तुम् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
पिता मम महातेजाः शन्तनुर्निधनं गतः |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४४
भीष्म उवाच
पिता मम महाराज वाह्लीको वाक्यमव्रवीत् ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६६
सञ्जय़ उवाच
पिता मम यथा क्षुद्रैर्न्यस्तशस्त्रो निपातितः |
१९ क
वन पर्व
अध्याय २९०
वैशम्पाय़न उवाच
पिता माता गुरवश्चैव येऽन्ये; देहस्यास्य प्रभवन्ति प्रदाने |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
पूजन्यु उवाच
पिता माता गुरुर्गोप्ता वह्निर्वैश्रवणो यमः |
९९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
गालव उवाच
पिता माता च ते त्वं च पुत्र मृत्युविवर्जिताः |
४१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
पिता माता च पुत्रश्च खं द्यौश्च नरपुङ्गव |
७४ क
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
पिता माता च पुत्रश्च श्वश्रूश्वशुरमातुलाः |
७५ क
वन पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
पिता माता च भगवन्गाव एव च सत्तम |
४ क