chevron_left  पतिशोकाकुलांarrow_drop_down
वन पर्व
अध्याय ६५
सुदेव उवाच
पतिशोकाकुलां दीनां शुष्कस्रोतां नदीमिव ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
विश्वावसुरु उवाच
पतिश्च तपतां शश्वदादित्यस्तव भाषते ||
६४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११९
नारद उवाच
पतिष्यंश्चिन्तय़ामास गतिं गतिमतां वरः ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
पतिष्यतः क्षितितले पञ्चशीर्षाविवोरगौ ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
पतिष्यति रथाद्भीष्मे सर्वलोकप्रिय़े तदा ||
३९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
पतिष्यत्येतदस्त्रं हि गर्भे तस्या मय़ोद्यतम् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ५१
सूत उवाच
पतिष्यमाणे नागेन्द्रे तक्षके जातवेदसि |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ४८
सूत उवाच
पतिष्याम्यवशोऽद्याहं तस्मिन्दीप्ते विभावसौ ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय १३९
वैशम्पाय़न उवाच
पतिस्नेहोऽतिवलवान्न तथा भ्रातृसौहृदम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४४
भीष्म उवाच
पतिहीनापि का नारी सती जीवितुमुत्सहेत् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
पतींश्च द्रौपदी सर्वान्द्विजांश्चैव यशस्विनी |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
पञ्चचूडो उवाच
पतीनन्तरमासाद्य नालं नार्यः प्रतीक्षितुम् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
पतेच्च नरकं घोरं यदि राजा न पालय़ेत् ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
पतेद्दिवाकरः स्थानाच्छीर्येतानेकधा क्षितिः |
७६ क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
पतेद्द्यौर्हिमवाञ्शीर्येत्पृथिवी शकलीभवेत् |
११७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
पतेद्वहुविधं शस्त्रं वहुधा धर्मचारिषु |
१८ क
वन पर्व
अध्याय २६२
मार्कण्डेय़ उवाच
पतेय़ं गिरिशृङ्गाद्वा विशेय़ं वा हुताशनम् ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११९
यय़ातिरु उवाच
पतेय़ं सत्स्विति ध्याय़न्भवत्सु पतितस्ततः ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११९
नारद उवाच
पतेय़ं सत्स्विति वचस्त्रिरुक्त्वा नहुषात्मजः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
भीष्म उवाच
पत्तनानि च रम्याणि स्फीतानि नगराणि च |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
पत्तनेषु च रम्येषु महाशालवनेषु च ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
पत्तिं तु त्रिगुणामेतामाहुः सेनामुखं वुधाः |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
पत्तिभिश्च समाप्लुत्य द्विरदाः स्यन्दनास्तथा ||
३५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
पत्तिमच्छूरवीरौघैर्द्रुतमर्जुनमाद्रवत् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
पत्तिसङ्घा रणे पत्तीन्भिण्डिपालपरश्वधैः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
पत्तिसङ्घा हय़ारोहैः सादिसङ्घाश्च पत्तिभिः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८९
धृतराष्ट्र उवाच
पत्तिसङ्घान्रणे दृष्ट्वा धावमानांश्च सर्वशः |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
पत्तिसैन्यं दशगुणं सादिनामय़ुतानि षट् ||
६१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
पत्तीनां चापि शव्देन नागानां वृंहितेन च ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४४
सञ्जय़ उवाच
पत्तीनां द्रवतां चैव पदशव्देन मेदिनी |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
पत्तीनां निहताः सङ्घा हय़ानामय़ुतानि च |
४८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
पत्तीनां पादशव्दाश्च वाजिनां च महास्वनाः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
पत्त्यश्वरथनागैश्च प्रच्छन्नकृतसङ्क्रमाम् |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
पत्त्यश्वरथनागौघैः पतितैर्विषमीकृताम् ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
पत्त्यश्वरथमातङ्गाः प्रावृषीव वलाहकाः ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
पत्तय़ः पत्तिभिर्नागा नागैः सह हय़ैर्हय़ाः ||
५८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
पत्तय़ः पत्तिसङ्घैश्च हय़सङ्घैर्हय़ास्तथा ||
५ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
पत्तय़ः सात्यकेरन्ध्रा घोररूपपराक्रमाः ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
पत्तय़श्च महावाहो शतशः शस्त्रपाणय़ः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
पत्तय़श्छिन्नवर्माणः कृपणं शेरते हताः ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
पत्तय़ो रथमातङ्गान्रथा हस्त्यश्वमेव च |
६ क
वन पर्व
अध्याय २२८
वैशम्पाय़न उवाच
पत्तय़ो वहुसाहस्रा हय़ाश्च नवतिः शताः ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८९
भीष्म उवाच
पत्नी द्रुपदराजस्य द्रुपदं संविवेश ह ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५५
तुलाधार उवाच
पत्नीं चानेन विधिना प्रकरोति निय़ोजय़न् |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
पत्नीं चैव निराकारां परामभ्यगमन्मुदम् ||
५८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
पत्नीं रजस्वलां चैव नाभिगच्छेन्न चाह्वय़ेत् |
१४२ क
सभा पर्व
अध्याय १७
कृष्ण उवाच
पत्नीद्वय़ेनानुगतस्तपोवनरतोऽभवत् ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय १०४
लोमश उवाच
पत्नीभ्यां सह राजेन्द्र कैलासं गिरिमाश्रितः ||
९ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
पत्नीभ्यां सहितः पाण्डुर्महेन्द्रसदनं यय़ौ ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय १०४
लोमश उवाच
पत्नीभ्यां सहितस्तात सोऽतिहृष्टमनास्तदा ||
१६ ख