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द्रोण पर्व
अध्याय ६१
धृतराष्ट्र उवाच
परिदेवो महानत्र श्रुतो मे नाभिनन्दनम् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
परिदेवय़ती तत्र कौरवानभ्यभाषत |
१९ क
विराट पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
परिदेवय़ते मन्दः सकाशे सव्यसाचिनः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
परिदेवय़मानानां शान्तिं नोपलभे मुने ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १९४
कर्ण उवाच
परिद्यूनान्वृतवती किमुताद्य मृजावतः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय ५९
नल उवाच
परिद्यूनो गमिष्यामि तव शोकविवर्धनः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
परिद्रष्टा गुणानां च संस्रष्टा मन्यते सदा ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४०
व्यास उवाच
परिद्रष्टा गुणानां स स्रष्टा चैव यथातथम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय ५९
वृहदश्व उवाच
परिधावन्नथ नल इतश्चेतश्च भारत |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २११
भीष्म उवाच
परिधावन्महीं कृत्स्नां जगाम मिथिलामपि ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय ४७
सूत उवाच
परिधाय़ कृष्णवासांसि धूमसंरक्तलोचनाः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
परिधाय़ोर्ध्ववालं तु पात्रमादाय़ मृन्मय़म् |
६७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
परिनिर्मितकालानि आय़ूंषि च सुरोत्तमाः ||
७२ ख
मौसल पर्व
अध्याय ९
अर्जुन उवाच
परिनिर्विण्णचेताश्च शान्तिं नोपलभेऽपि च ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५५
तुलाधार उवाच
परिनिष्ठितकर्माणः प्रजानुग्रहकाम्यया ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
परिनिष्ठितकार्यः स्यान्नृपतिः परिपालनात् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
परिनिष्ठितकार्यस्तु स्वाध्याय़ेनैव व्राह्मणः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३०
व्यास उवाच
परिनिष्ठितकार्यो हि स्वाध्याय़ेन द्विजो भवेत् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०७
गुरुरु उवाच
परिपक्ववुद्धिः कालेन आदत्ते मानसं वलम् ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
परिपत्य यदा सूनुर्धरणीरेणुगुण्ठितः |
५२ क
आदि पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
परिपप्रच्छ निपुणं भीष्मः शस्त्रभृतां वरः |
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय २०१
नारद उवाच
परिपात्यमाना वित्रस्ताः शूलहस्तेन रक्षसा |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
परिपाल्य महाराज संसिद्धिं परमां गताः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
परिपाल्यः कथं तेन सोऽधिकारोऽधिकारिणा ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३१
भीष्म उवाच
परिपाल्यानुगृह्णीय़ादेष धर्मः सनातनः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
परिपूर्णश्च कालस्ते वस्तुं लोकेऽद्य मानुषे ||
९२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १६
व्राह्मण उवाच
परिपृच्छ यावद्भवते भाषेय़ं यत्तवेप्सितम् ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३३
महेश्वर उवाच
परिपृच्छन्त्यहरहः कुशलाकुशलं तथा ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
परिपृच्छ्य स मां पूर्वं परिक्लेशं पुरस्य च |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
परिपेतुः सुसंरव्धाश्चतुर्दंष्ट्राश्चतुर्दिशम् |
५४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
परिपेतुर्द्रुतं तत्र शतशोऽथ सहस्रशः ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
परिपेतुर्हय़ाश्चात्र केचिच्छस्त्रकृतव्रणाः |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
वासुदेव उवाच
परिभाषां च मे श्रुत्वा को नु दद्यात्प्रतिश्रय़म् |
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
परिभिन्नस्वरो रूक्ष उवाचाप्रिय़दर्शनः ||
४२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
परिभूतः कथं सूत पुनः शक्ष्यामि जीवितुम् |
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
परिभूय़ च दुर्वुद्धे ग्रहीतुं मां चिकीर्षसि ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८६
पराशर उवाच
परिभ्रमति भूतात्मा द्यामिवाम्वुधरो महान् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
परिभ्रमति संसारं चक्रवद्वहुवेदनः ||
५७ ख
आदि पर्व
अध्याय २९
सूत उवाच
परिभ्रमन्तमनिशं तीक्ष्णधारमय़स्मय़म् ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७
शल्य उवाच
परिभ्रष्टः कथं स्वर्गान्नहुषः पापनिश्चय़ः ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
परिमण्डलस्तय़ोर्मध्ये मेरुः कनकपर्वतः ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
परिमण्डलो महाराज स्वर्भानुः श्रूय़ते ग्रहः |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
परिमर्शो विशेषाणामश्रुतस्येह दुर्मतेः ||
२७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
परिमाणं विदित्वा च दण्डं दण्ड्येषु भारत |
२ क
आदि पर्व
अध्याय २०९
व्राह्मण उवाच
परिमाणं शतं त्वेतन्नैतदक्षय़वाचकम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ३६
भीमसेन उवाच
परिमाणेन तान्पश्य तावतः परिवत्सरान् ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
परिमार्जमानः शनकैर्वाहू चास्याय़तौ शुभौ |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
परिमुष्णन्ति शास्त्राणि धर्मस्य परिपन्थिनः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
परिमुष्णन्ति शास्त्राणि शास्त्रदोषानुदर्शिनः |
१४ क