chevron_left  प्रय़युर्यत्रarrow_drop_down
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
प्रय़युर्यत्र पाञ्चाल्यो धृष्टद्युम्नो महारथः ||
६० ख
शल्य पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़युर्हि ततो राजन्येन तीर्थं हि तत्तथा ||
५ ग
सभा पर्व
अध्याय ६५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़युर्हृष्टमनस इन्द्रप्रस्थं पुरोत्तमम् ||
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़युस्तत्र यत्रासौ त्रितय़ज्ञः प्रवर्तते ||
३९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८४
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़युस्तांस्तदा राजन्नुग्रसेनो न्यवारय़त् ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९६
इन्द्र उवाच
प्रय़युस्ते ततो भूय़स्तीर्थानि वनगोचराः |
५१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११४
नारद उवाच
प्रय़यौ कन्यया सार्धं दिवोदासं प्रजेश्वरम् ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ कौरवं सैन्यं कक्षमग्निरिव ज्वलन् ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ तत्र यत्रासौ पुत्रस्तव नराधिप |
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ तावकं सैन्यं युक्तः क्रूराय़ कर्मणे ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ त्वरितस्तूर्णं काम्वोजानां महाचमूम् ||
५३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ त्वरितो राजन्द्रुपदस्य रथं प्रति ||
५९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़यौ त्वरितो रामस्तीर्थहेतोर्महावलः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़यौ देवगन्धर्वैः स्तूय़मानो महाद्युतिः ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़यौ पार्थमुद्दिश्य स राजा वभ्रुवाहनः ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़यौ पुण्डरीकाक्षः सैन्यसुग्रीववाहनः ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़यौ पुण्डरीकाक्षस्ततो द्वारवतीं पुरीम् ||
५५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ पुरुषव्याघ्रः स्वसैन्यमभिचोदय़न् ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़यौ पृथिवीपालैर्वृतः शतसहस्रशः ||
७० ख
मौसल पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़यौ मातुलं द्रष्टुं नेदमस्तीति चाव्रवीत् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ रथघोषेण सिंहनादरवेण च |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ रथवंशेन यत्र राजा युधिष्ठिरः ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय २६७
मार्कण्डेय़ उवाच
प्रय़यौ राघवः श्रीमान्सुग्रीवसहितस्तदा ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
प्रय़यौ वपुषा युक्तो नगरं देवराजवत् ||
६४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
प्रय़यौ वीतहव्यानां पुरीं परपुरञ्जय़ः ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
प्रय़यौ स धनुर्धुन्वन्विवर्षुरिव तोय़दः ||
३१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
नारद उवाच
प्रय़यौ सञ्जय़ः सूतो हिमवन्तं महीधरम् ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ सदनं राजन्गाङ्गेय़स्य यशस्विनः |
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़यौ सपरीवारो नगरं नागसाह्वय़म् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ समरे तूर्णं तव पुत्रस्य शासनात् |
२५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ सर्वसैन्येन कैतव्यश्च महारथः ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
प्रय़यौ सह तैः सर्वैर्निमेषान्तरचारिभिः ||
४७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़यौ सहितो विप्रैः स्तूय़मानश्च माधवः ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ सात्यकी राजञ्श्वेताश्वस्य रथं प्रति ||
४४ ख
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ सिंहनादेन कम्पय़न्वै वसुन्धराम् ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ सिंहनादेन त्रासय़न्सर्वपार्थिवान् |
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ सिंहनादेन दिशः सर्वा विनादय़न् ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ सिंहनादेन नादय़न्भरतर्षभ ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ सिंहनादेन नादय़ानो धरातलम् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ सिंहनादेन परानभिमुखो द्रुतम् ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ सिंहनादेन यत्रार्जुनसुतो युवा ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
प्रय़यौ सृञ्जय़ान्क्रुद्धः स्त्रीत्वं चिन्त्य शिखण्डिनः ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय ७७
वृहदश्व उवाच
प्रय़यौ स्वपुरं हृष्टः पुष्करः स्वजनावृतः ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़यौ हास्तिनपुरं यत्र राजा स कौरवः ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय २०७
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़यौ हिमवत्पार्श्वं ततो वज्रधरात्मजः ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
प्रय़ागं च प्रभासं च पुण्यं नैमिषमेव च |
१८ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
प्रय़ागं जघनस्यान्तमुपस्थमृषय़ो विदुः ||
७१ ख
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
प्रय़ागं सप्रतिष्ठानं कम्वलाश्वतरौ तथा |
७२ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
प्रय़ागः सर्वतीर्थेभ्यः प्रभवत्यधिकं विभो ||
७४ ख
वन पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रय़ागमिति विख्यातं तस्माद्भरतसत्तम ||
१४ ख