वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
पद्मवर्णेन यानेन व्रह्मलोकं स गच्छति ||
१७० ग
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
पद्मसौगन्धिकवतीं नानाद्विजगणाय़ुताम् |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४
शल्य उवाच
पद्मस्य भित्त्वा नालं च विवेश सहिता तय़ा |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
व्यास उवाच
पद्माक्षस्तं विरूपाक्षमभितुष्टाव भक्तिमान् ||
६५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
पद्माक्षी पुण्डरीकाक्षमुपेत्य गजगामिनी |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
पद्मानामिव सङ्घातैः पार्थश्चक्रे निवेदनम् ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
पद्मान्यष्टादश तथा पताके द्वे तथैव च ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
पद्मार्कपूर्णेन्दुसमाननानि; किरीटमालामुकुटोत्कटानि |
५८ क
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
पद्मावती सुनक्षत्रा कन्दरा वहुय़ोजना |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२९२
वैशम्पाय़न उवाच
पद्माय़तविशालाक्षं पद्मताम्रतलोज्ज्वलम् |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
पद्माय़ताक्षी सुश्रोणी असिताय़तमूर्धजा ||
९६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
पद्मिनीतीरमाश्रित्य व्रूहि त्वं किं चिकीर्षसि ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
पद्मिनीभिश्च शतशः श्रीमतीभिरलङ्कृतान् ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
पद्मिनीमभिजग्मुस्ते सर्वे कृत्याभिरक्षिताम् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८७
युधिष्ठिर उवाच
पद्मिनीव सुतेय़ं ते ह्रदादन्यं ह्रदं गता ||
१० ग
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
पद्मिनीशतसञ्छन्नं नीलोत्पलसमाय़ुतम् ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
पद्मेन्दुद्युतिभिश्चैव वदनैश्चारुकुण्डलैः |
७४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
पद्मेऽनिरुद्धात्सम्भूतस्तदा पद्मनिभेक्षणः |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
पद्मोत्पलविचित्राणि सुखस्पर्शजलानि च |
६७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
गङ्गो उवाच
पद्मोत्पलविमिश्राणां ह्रदानामिव शीतलः |
६९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
पद्मोत्पलानि वृक्षेषु जाय़न्ते कुमुदानि च |
१० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
पद्मोत्पलापीडधरास्तथा कुमुदधारिणः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
पद्मोदरच्युतरजःकिञ्जल्कारुणरञ्जितैः ||
५१ ख
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
पद्मोऽथ मुचुकुन्दश्च भूरिद्युम्नः प्रसेनजित् |
२० क
वन पर्व
अध्याय
२७१
मार्कण्डेय़ उवाच
पनसं च गवाक्षं च वज्रवाहुं च वानरम् ||
४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
५
विदुर उवाच
पनसस्य यथा जातं वृन्तवद्धं महाफलम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
पनसाँल्लिकुचान्मोचान्खर्जूरानाम्रवेतसान् |
४१ क
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
पनसैश्च पलाशैश्च करीरैः पीलुभिस्तथा ||
५८ ख
वन पर्व
अध्याय
२६७
मार्कण्डेय़ उवाच
पनसो नाम मेधावी वानरः सुमहावलः |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१३३
राजो उवाच
पन्था अय़ं तेऽद्य मय़ा निसृष्टो; येनेच्छसे तेन कामं व्रजस्व |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
पन्था देय़ो व्राह्मणाय़ गोभ्यो राजभ्य एव च |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३
सहदेव उवाच
पन्था निषेवितः सद्भिः स निषेव्यो विजानता ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
पन्थानं तस्कराकीर्णं क्षेमेणाभिपतेद्युवा ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
पन्थानं पावनं हित्वा जनको मौण्ड्यमास्थितः ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३५
व्रह्मो उवाच
पन्थानं वः प्रवक्ष्यामि शिवं क्षेमकरं द्विजाः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८५
भृगुरु उवाच
पन्थानं सर्वलोकानां ते जानन्ति मनीषिणः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
५८
दमय़न्त्यु उवाच
पन्थानं हि ममाभीक्ष्णमाख्यासि नरसत्तम |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
पन्थानः सर्वनेतारो यज्ञवाहाः सनातनाः |
८ क
सभा पर्व
अध्याय
५०
दुर्योधन उवाच
पन्थानमनुगच्छेय़ुः कथं तस्य पदानुगाः ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
पन्थानममरैर्यातं शूरैश्चैवानिवर्तिभिः |
३७ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
पन्थानमशुभं दुर्गं सेवितं पापकर्मभिः ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
पन्थानमाचेमुरिव ग्रसमाना इवाम्वरम् ||
५९ ख
विराट पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
पन्थानमुपसङ्गम्य फल्गुनो वाक्यमव्रवीत् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६२
कपिल उवाच
पन्थानो व्रह्मणस्त्वेते एतैः प्राप्नोति यत्परम् |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७
युधिष्ठिर उवाच
पन्थानौ पितृय़ानश्च देवय़ानश्च विश्रुतौ |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
१३३
युधिष्ठिर उवाच
पन्थाश्च वो नाविदितः कश्चित्स्यादिति चाव्रवीत् ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
३१
शौनक उवाच
पन्नगानां तु नामानि न कीर्तय़सि सूतज |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
३४
व्रह्मो उवाच
पन्नगानां निवोधध्वं तस्मिन्काले तथागते ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
३५
व्रह्मो उवाच
पन्नगानां हितं देवास्तत्तथा न तदन्यथा ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
४४
सूत उवाच
पन्नगानां हितार्थाय़ पुत्रस्ते स्यात्ततो यदि ||
३ ख